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Lucknow News: कांग्रेस की आंंधी में भाजपा का गिरा ग्राफ
Thu, 06 Jun 2024 04:20 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Thu, 06 Jun 2024 04:20 AM IST
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रायबरेली। लोकसभा चुनाव रायबरेली के लिए ऐतिहासिक रहा। कांग्रेस प्रत्याशी राहुल गांधी ने 3.90 लाख की प्रचंड जीत हासिल कर भाजपा के सियासी समीकरणों को ध्वस्त कर दिया। बसपा को हाशिए पर लाकर खड़ा कर दिया। इस चुनाव में सबसे अधिक नुकसान बसपा का हुआ और उसका बेस वोट भी खिसककर कांग्रेस में शिफ्ट हो गया। भाजपा के वोट शेयर में 9.72 फीसदी की बड़ी गिरावट आई है। जबकि कांग्रेस के वोट शेयर में 10 फीसदी का जबरदस्त उछाल आया है।
रायबरेली लोकसभा सीट को देश की हाईप्रोफाइल सीट माना जाता है। इस बार लोकसभा चुनाव का आगाज हुआ तो सोनिया गांधी ने रायबरेली से न उतरने का फैसला किया। उसके बाद प्रियंका गांधी के रायबरेली से उतरने के दावे हुए। नामांकन पत्र भरने के 24 घंटे पहले कांग्रेस ने सारे कयासों को किनारे कर मास्टर स्ट्रोक खेलते हुए राहुल गांधी को मैदान में उतारा।
संसदीय सीट के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ जब कांग्रेस प्रत्याशी राहुल गांधी ने नामांकन पत्र भरने की अंतिम तारीख को अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इसके बाद कांग्रेस और भाजपा प्रत्याशी तथा राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह के बीच मुकाबला हुआ। बसपा प्रत्याशी ठाकुर प्रसाद तो इस चुनाव में निर्दलीय सरीखी नजर आए। 20 मई को मतदाताओं ने 58.12 फीसदी मतदान कर प्रत्याशियों के भाग्य को ईवीएम में बंद किया।
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चार जून को जब मतगणना हुई तो गठबंधन प्रत्याशी राहुल गांधी ने लोकसभा सीट की पांचों विधानसभाओं में जबरदस्त लीड लेकर 3.90 लाख की तगड़ी जीत हासिल की। राहुल गांधी की इस जीत ने रायबरेली के संसदीय इतिहास में कई रिकाॅर्ड बनाए। राहुल गांधी परिवार के पहले राजनेता बने, जिसके नाम लोकसभा चुनाव में सबसे अधिक मतों से जीत रही। कांग्रेस जो विधानसभा चुनाव 2022 में वजूद बचाने के लिए संघर्ष करती नजर आई, उसने पांचों विधानसभा में बहुत भारी मत हासिल किए। यह मत 2019 के लोकसभा चुनाव से बहुत अधिक रहे।
10.37 फीसदी कांग्रेस का बढ़ा वोट शेयर
लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी राहुल गांधी को 6,87,649 (66.17 फीसदी) मत मिले, जो रिकाॅर्ड है। 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी सोनिया गांधी को 534918 (55.80 फीसदी) मत मिले थे। राहुल गांधी को पांचों विधानसभा से खुलकर वोट मिला। सदर विधानसभा में वोटों की जमकर बारिश राहुल के लिए हुई। राहुल गांधी को रिकार्ड 103017 मत मिले। ऊंचाहार विधानसभा से 81895 मत मिले। यहां पर 33204 मतों की लीड रही।
बछरावां में 72523 मत, हरचंदपुर विधानसभा में 56831 मत, सरेनी में 74918 मत से राहुल गांधी ने लीड ली थी। सदर में राहुल गांधी को रिकार्ड 71.01 फीसदी मत मिले। जबकि ऊंचाहार में 67.35 प्रतिशत, सरेनी में 65.29 फीसदी, बछरावां में 64.78 फीसदी और हरचंदपुर में 61.83 फीसदी मत मिले। यह भी एक रिकार्ड है।
आपसी रस्साकसी और जातीय समीकरण फिट न होने से भाजपा हुई फेल
भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में जबरदस्त मुकाबला किया था और पार्टी प्रत्याशी दिनेश प्रताप सिंह 1.63 लाख वोटों से कांग्रेस प्रत्याशी सोनिया गांधी से हार गए थे, लेकिन भाजपा का वोट शेयर 38.36 प्रतिशत पहुंच गया था जो अब तक सबसे अधिक था। इस कारण भाजपा के रणनीतिकारों को जीत का भरोसा था लेकिन इस बार के चुनाव में जातीय समीकरणों को सही से फिट न कर पाने के साथ आपसी तनातनी पार्टी पर भारी पड़ गई।
हालत यह रहा कि सदर विधानसभा सीट भाजपा के पास है और पार्टी प्रत्याशी को यहां पर सबसे बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा। इस बार के लोकसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशी दिनेश प्रताप सिंह को 2,97,619 (28.64 फीसदी) मत मिले। हर विधानसभा में उनका मत प्रतिशत पिछले चुनाव से 10 से 12 फीसदी तक गिरा। भाजपा को वोट शेयर 2024 के लोकसभा चुनाव में जिस तरह गिरा, उससे साफ है कि पांचों विधानसभाओं में पार्टी की जमीन खिसक गई है।
बसपा का अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन
इस चुनाव में सबसे बड़ी गिरावट बसपा में देखने को मिली है। पार्टी का कैडर वोटर तक उससे खिसक कर चला गया। पार्टी प्रत्याशी ठाकुर प्रसाद यादव को संसदीय चुनाव के इतिहास में सबसे कम 21,625 मत मिले। 2019 में सपा से गठबंधन होने के कारण बसपा ने प्रत्याशी नहीं उतारा था और 2024 में उतारा तो नीले झंडे की पूरी की पूरी राजनीतिक जमीन खिसक कर बंजर नजर आई। हाल यह है कि बसपा प्रत्याशी को बेस वोटर ने भी वोट नहीं दिया और वह कांग्रेस में चला गया।
बसपा का वोट शेयर महज 2 फीसदी बचा है। 2017 में यह 7.17 फीसदी थी। असल में रायबरेली की सियासी जमीन हाथी को रास नहीं आ सकी है। 1996 में बसपा ने पहली बार चुनाव लड़ा तो पार्टी प्रत्याशी को 24.80 फीसदी मत मिले थे। उसके बाद से लगातार उसमें गिरावट आती चली गई। इस पर पार्टी थिकंटैंक ने भी गौर नहीं किया। नतीजा यह है कि रायबरेली में बसपा राजनीतिक रूप से सफाए के दौर से गुजर रही है।
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रायबरेली लोकसभा सीट को देश की हाईप्रोफाइल सीट माना जाता है। इस बार लोकसभा चुनाव का आगाज हुआ तो सोनिया गांधी ने रायबरेली से न उतरने का फैसला किया। उसके बाद प्रियंका गांधी के रायबरेली से उतरने के दावे हुए। नामांकन पत्र भरने के 24 घंटे पहले कांग्रेस ने सारे कयासों को किनारे कर मास्टर स्ट्रोक खेलते हुए राहुल गांधी को मैदान में उतारा।
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संसदीय सीट के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ जब कांग्रेस प्रत्याशी राहुल गांधी ने नामांकन पत्र भरने की अंतिम तारीख को अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इसके बाद कांग्रेस और भाजपा प्रत्याशी तथा राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह के बीच मुकाबला हुआ। बसपा प्रत्याशी ठाकुर प्रसाद तो इस चुनाव में निर्दलीय सरीखी नजर आए। 20 मई को मतदाताओं ने 58.12 फीसदी मतदान कर प्रत्याशियों के भाग्य को ईवीएम में बंद किया।
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चार जून को जब मतगणना हुई तो गठबंधन प्रत्याशी राहुल गांधी ने लोकसभा सीट की पांचों विधानसभाओं में जबरदस्त लीड लेकर 3.90 लाख की तगड़ी जीत हासिल की। राहुल गांधी की इस जीत ने रायबरेली के संसदीय इतिहास में कई रिकाॅर्ड बनाए। राहुल गांधी परिवार के पहले राजनेता बने, जिसके नाम लोकसभा चुनाव में सबसे अधिक मतों से जीत रही। कांग्रेस जो विधानसभा चुनाव 2022 में वजूद बचाने के लिए संघर्ष करती नजर आई, उसने पांचों विधानसभा में बहुत भारी मत हासिल किए। यह मत 2019 के लोकसभा चुनाव से बहुत अधिक रहे।
10.37 फीसदी कांग्रेस का बढ़ा वोट शेयर
लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी राहुल गांधी को 6,87,649 (66.17 फीसदी) मत मिले, जो रिकाॅर्ड है। 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी सोनिया गांधी को 534918 (55.80 फीसदी) मत मिले थे। राहुल गांधी को पांचों विधानसभा से खुलकर वोट मिला। सदर विधानसभा में वोटों की जमकर बारिश राहुल के लिए हुई। राहुल गांधी को रिकार्ड 103017 मत मिले। ऊंचाहार विधानसभा से 81895 मत मिले। यहां पर 33204 मतों की लीड रही।
बछरावां में 72523 मत, हरचंदपुर विधानसभा में 56831 मत, सरेनी में 74918 मत से राहुल गांधी ने लीड ली थी। सदर में राहुल गांधी को रिकार्ड 71.01 फीसदी मत मिले। जबकि ऊंचाहार में 67.35 प्रतिशत, सरेनी में 65.29 फीसदी, बछरावां में 64.78 फीसदी और हरचंदपुर में 61.83 फीसदी मत मिले। यह भी एक रिकार्ड है।
आपसी रस्साकसी और जातीय समीकरण फिट न होने से भाजपा हुई फेल
भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में जबरदस्त मुकाबला किया था और पार्टी प्रत्याशी दिनेश प्रताप सिंह 1.63 लाख वोटों से कांग्रेस प्रत्याशी सोनिया गांधी से हार गए थे, लेकिन भाजपा का वोट शेयर 38.36 प्रतिशत पहुंच गया था जो अब तक सबसे अधिक था। इस कारण भाजपा के रणनीतिकारों को जीत का भरोसा था लेकिन इस बार के चुनाव में जातीय समीकरणों को सही से फिट न कर पाने के साथ आपसी तनातनी पार्टी पर भारी पड़ गई।
हालत यह रहा कि सदर विधानसभा सीट भाजपा के पास है और पार्टी प्रत्याशी को यहां पर सबसे बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा। इस बार के लोकसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशी दिनेश प्रताप सिंह को 2,97,619 (28.64 फीसदी) मत मिले। हर विधानसभा में उनका मत प्रतिशत पिछले चुनाव से 10 से 12 फीसदी तक गिरा। भाजपा को वोट शेयर 2024 के लोकसभा चुनाव में जिस तरह गिरा, उससे साफ है कि पांचों विधानसभाओं में पार्टी की जमीन खिसक गई है।
बसपा का अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन
इस चुनाव में सबसे बड़ी गिरावट बसपा में देखने को मिली है। पार्टी का कैडर वोटर तक उससे खिसक कर चला गया। पार्टी प्रत्याशी ठाकुर प्रसाद यादव को संसदीय चुनाव के इतिहास में सबसे कम 21,625 मत मिले। 2019 में सपा से गठबंधन होने के कारण बसपा ने प्रत्याशी नहीं उतारा था और 2024 में उतारा तो नीले झंडे की पूरी की पूरी राजनीतिक जमीन खिसक कर बंजर नजर आई। हाल यह है कि बसपा प्रत्याशी को बेस वोटर ने भी वोट नहीं दिया और वह कांग्रेस में चला गया।
बसपा का वोट शेयर महज 2 फीसदी बचा है। 2017 में यह 7.17 फीसदी थी। असल में रायबरेली की सियासी जमीन हाथी को रास नहीं आ सकी है। 1996 में बसपा ने पहली बार चुनाव लड़ा तो पार्टी प्रत्याशी को 24.80 फीसदी मत मिले थे। उसके बाद से लगातार उसमें गिरावट आती चली गई। इस पर पार्टी थिकंटैंक ने भी गौर नहीं किया। नतीजा यह है कि रायबरेली में बसपा राजनीतिक रूप से सफाए के दौर से गुजर रही है।