स्मृति और साक्षी महाराज के अलावा कोई और भी है रेस में?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सूबे में डेढ़ साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा की सरकार बनेगी या नहीं, यह तो अभी भविष्य के गर्भ में है, पर हाल ही अमेठी दौरे पर आईं केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी को मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार घोषित करने की मांग के साथ भाजपा में मुख्यमंत्री बनने व बनाने की दौड़ तेज होती दिख रही है।
फेसबुक पर कई नेताओं के नाम से अभियान चलाया जा रहा है। किसी के नाम के साथ सीधे तौर पर अगला मुख्यमंत्री लिखते हुए समर्थन जुटाया जा रहा है तो किसी के बारे में इशारों-इशारों में। इनमें विधायकों व सांसदों के साथ ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी शामिल हैं।
सोशल मीडिया पर पहले से स्मृति का नाम : वैसे स्मृति ईरानी को मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार घोषित करने की मांग सार्वजनिक तौर पर भले ही पहली बार हुई हो लेकिन फेसबुक पर उनकी दावेदारी पहले से चल रही है। लिखा गया है, ‘पूरे उत्तर प्रदेश की यही आवाज, स्मृति दीदी अबकी बार।’
वरुण गांधी के समर्थक भी कम नहीं
दावेदारों में वरुण गांधी का नाम भी शामिल है। उनके नाम से बने पेज पर लिखा है, ‘अबकी यूपी में चलेगी भाजपा की आंधी, सीएम होंगे वरुण गांधी।’ वरुण की तस्वीर के साथ शेर की फोटो भी लगाई गई है।
गोरखपुर के गोरक्ष पीठ के महंत आदित्यनाथ भी सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में शामिल हैं। लिखा है, ‘क्या आप योगीजी को उत्तर प्रदेश की कमान देना चाहते हैं। वी सपोर्ट योगी आदित्यनाथ फॉर सी...।’ सी का मतलब यूपी के अगले सीएम से लगाया जा रहा है।
सूबे के नगर विकास मंत्री रहे भाजपा के वरिष्ठ नेता लालजी टंडन को भी अगला मुख्यमंत्री बनाने के लिए फेसबुक पर पेज बनाकर समर्थन मांगा जा रहा है। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह के नाम से बने पेज पर ‘पंकज सिंह फॉर सीएम यूपी’ लिखा गया है।
साक्षी महाराज भी कतार में
उन्नाव से सांसद स्वामी साक्षी महराज को भी अगला मुख्यमंत्री बनाने के लिए समर्थन का आग्रह किया गया है। यही नहीं, फूलपुर से सांसद केशव मौर्य को भी मुख्यमंत्री का दावेदार बताते हुए समर्थन जुटाने की मुहिम चलाई जा रही है।
मौर्य 2012 में पहली बार विधायक बने थे और 2014 में सांसद चुने गए। पहली बार विधायक चुने गए संगीत सोम भी इस दौड़ में पीछे नहीं हैं।
मुख्यमंत्री पद की दावेदारी की इस जंग की जानकारी संबंधित नेताओं को है या नहीं, यह तो वे ही जानें, पर इससे भाजपा के भीतर तेज होती धड़ेबंदी का पता जरूर चलता है।
साथ ही साबित होता है कि लोकसभा चुनाव में जीत की खुमारी भाजपाइयों के सिर से उतर नहीं पा रही है। विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी पूरी तरह तैयार है या नहीं, इस सवाल से बेफिक्र वे यह मानकर चल रहे हैं कि यूपी में अगली सरकार भाजपा की ही होगी।
इसीलिए अपने-अपने नेताओं को मुख्यमंत्री पद का दावेदार साबित करने में जुटे हैं।