यूपी में कमल ही कमल, भाजपा ने जीती 71 सीटें
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यूपी ने मोदी की मुराद पूरी ही कर दी। सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने की सीढ़ी मानी जाने वाली यूपी के वोटरों पर ‘मोदी लहर’ का जादू जमकर चला।
पिछले आम चुनाव में महज 10 सीटें जीतने वाली भाजपा, मोदी की सुनामी में 71 सीटें अपनी झोली में भर ले गई।
साथ में दो सीटें उसकी सहयोगी पार्टी अपना दल के खाते में रही यानी कुल 73 सीटें।
1998 में 57 सीटों के अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को कहीं पीछे छोड़ते हुए भाजपा ने यूपी में न सिर्फ रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन किया बल्कि सूबे में सभी दलों को हाशिए पर धकेल दिया।
कांग्रेस की बुरी गत
परिवर्तन की सुनामी में सभी पार्टियां तिनके की तरह उड़ गईं। सबसे बुरी गत तो कांग्रेस की हुई। 2009 में 21 सीटें जीतने वाली कांग्रेस दहाई के आंकड़े से भरभराकर महज 2 सीटों पर लुढ़क गई।
पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी ही अपनी सीटें बचाने में कामयाब रहे। वहीं, सपा भी सिर्फ कुनबे में सिमट कर रह गई।
बीते चुनाव में 23 सीटें हासिल करने वाली सपा की साइकिल परिवार में ही रफ्तार दिखा पाई और महज 5 सीटें ही नाप पाई।
सोशल इंजीनियरिंग से सफलता का दंभ भरने वाली बसपा को मतदाताओं ने बुरी तरह खारिज कर दिया और वह एक भी सीट नहीं जीत सकी।
सपा को बड़ा नुकसान
प्रदेश में भाजपा को इस बार 25 फीसदी अधिक वोट मिले तो उसने विरोधी दलों का सूपड़ा ही साफ कर दिया। सपा को पिछले लोकसभा चुनाव से मात्र एक फीसदी वोट ही कम मिला है लेकिन सीटों में उसे बड़ा नुकसान हुआ है।
इस चुनाव में उसकी 17 सीटें कम हो गई हैं। सपा की पिछले लोकसभा चुनाव में 23 सीटें थीं लेकिन इस बार उसे मात्र पांच से ही संतोष करना पड़ रहा है।
प्रदेश में वोटों का सबसे अधिक नुकसान कांग्रेस के खाते में गया है। कांग्रेस को 10.7 प्रतिशत वोट इस बार कम मिले हैं। इस कारण प्रदेश में उसकी 21 से घटकर मात्र दो सीटें ही रह गई हैं।
बसपा का नहीं खुला खाता
वोट प्रतिशत के मामले में बसपा को भी आठ फीसदी का नुकसान हुआ है। इतने कम वोटों ने बसपा के पैरो-तले जमीन ही खिसका दी है।
बसपा का इस चुनाव में खाता ही नहीं खुल सका। पिछले लोकसभा चुनाव में उसके पास 20 सीटें थीं। अजित सिंह के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोकदल को 2.3 प्रतिशत कम वोट मिले तो उसकी पांचों लोकसभा सीटें छिन गईं।
इस बार रालोद का भी प्रदेश में खाता नहीं खुल सका। वहीं, दो सीटों पर भाजपा के समर्थन से चुनाव लड़ने वाले अपना दल को इस चुनाव में भले ही एक फीसदी वोट मिला हो लेकिन उसके खाते में दोनों लोकसभा सीटें आ गई हैं।
किसको कितना मिला वोट प्रतिशत
पार्टी---2009---2014
भाजपा-17.5---42.3
सपा---23.2---22.2
बसपा--27.4---19.6
कांग्रेस--18.2---7.5
रालोद---3.2---0.9