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कृषि विधेयक किसानों के खिलाफ, हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे: वित्तमंत्री पंजाब सरकार
Fri, 25 Sep 2020 03:34 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Fri, 25 Sep 2020 03:34 PM IST
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पंजाब के वित्तमंत्री मनप्रीत सिंह
- फोटो : amar ujala
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पंजाब सरकार के वित मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने कहा कि संसद में बगैर चर्चा किए और उचित प्रक्रिया अपनाए ही तीन कृषि कानून पारित करने से मोदी सरकार का किसान विरोधी चेहरा उजागर हो गया है। मोदी सरकार ने सता में आने से पहले किसानों की आय को दुगुना करने का संकल्प लिया था, पर 6 साल के भाजपा के शासनकाल में कृषि वृद्धि दर जहां 3.1 प्रतिशत है, वहीं यूपीए शासनकाल में यह 4.3 प्रतिशत थी। पंजाब सरकार नए कानून को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देगी।
प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बादल ने कहा कि कृषि आय 14 साल में इस साल सबसे कम है। उपज का दाम पिछले 18 साल में इस साल सबसे कम आया है। प्रधानमंत्री ने कहा था कि वह स्वामीनाथन आयोग की
रिपोर्ट लागू करेंगे, लेकिन उसे लागू न करके किसानों के साथ विश्वासघात किया है। उन्होने कहा कि तीनों नए कृषि कानूनों में एमएसपी का जिक्र न किए जाने से सरकारी अनाज मंडिया, सब्जी और फल मंडिया समाप्त हो जाएंगी। किसान पूंजीपतियों के तय किए गए मूल्य पर फसल बेचने को मजबूर होंगे। नई व्यवस्था में पूंजीपतियों को ही फायदा होगा।
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बादल ने कहा कि सीएसीपी (कमीशन फॉर एग्रीकल्चरल कॉस्ट एंड प्राइसेस) ने सिफारिश की है कि 8.6 प्रतिशत महंगाई को देखते हुए गेहूं की एमएसपी पर 6.6 प्रतिशत और धान पर 5.9 प्रतिशत बढ़ोतरी की जाए। लेकिन, सरकार ने गेहूं पर 2.6 प्रतिशत और धान पर 2.9 प्रतिशत एमएसपी बढ़ाई है। जबकि, संसद में घोषणा की की 50 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की है। आयोग ने यह भी सिफारिश की है कि जिन भी कृषि उपज गेहूं, धान, मक्का, सरसों की एमएसपी पर खरीद होती है, उसका परीक्षण किया जाए। इसके साथ ही उर्वरक सब्सिडी सीधे किसानों के खाते में 5000 रुपये प्रति किसान दी जाए।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार कुछ किसानों के खाते में 500 रुपये प्रतिमाह भेज रही है, पर डीजल पर यूपीए शासनकाल में जो एक्साइज ड्यूटी 3.56 रुपये थी,
उसे बढ़ाकर 40 रुपये कर दी है। जिससे किसानों को सिर्फ डीजल खरीद पर ही 6000 रुपये सालाना अधिक देना पड़ रहा है।
बादल ने कहा कि देश में हर घंटे पर एक किसान आत्महत्या करने को विवश है। एक दिन में 24 किसान आत्महत्या कर रहे हैं। मोदी सरकार जबसे सता में आई है, कॉर्पोरेट टैक्स लगभग 40 प्रतिशत घटाया गया है। उन पर 6.6 लाख करोड़ रुपये विभिन्न तरीकों से माफ किया है। एक्साइज ड्यूटी का हिस्सा (लगभग 42 प्रतिशत) राज्यों को नहीं दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों से उच्च प्रीमियम लिया जा रहा है।अकेले हरियाणा में बीमा कंपनियों ने किसानों से 10 हजार करोड़ रुपये कमाया है।
उन्होंने कहा कि इन काले कानूनों से जहां एक तरफ किसान अधिकारविहीन हो जाएंगे, वहीं मंडी परिषद और विपणन समितियां खत्म हो जाएंगी। लाखों-लाख कर्मचारियों को नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा। मंडी परिषद की आय से ग्राम स्तर विकास कार्य होते हैं। कॉर्पोरेट घराने गांव के आंतरिक विकास जैसे लिंक रोड, नाली व खडंजा आदि में रुचि नहीं लेंगे।
बादल ने कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली का अनाज देने वाली पीसीएफ पर 6 लाख करोड़ का कर्ज है, क्योंकि सरकार ने 6 वर्ष से कोई ग्रांट ही नहीं दी है। उन्होने कहा कि एक राज्य से दूसरे राज्य में बिक्री पर पहले भी कोई प्रतिबंध नहीं था। बिहार में किसान को अपनी उपज का 30 प्रतिशत कम दाम मिलता है। भाजपा बिहार मॉडल को पूरे देश में लागू करना चाहती है।
उन्होंने कहा कि जो नया कानून पारित हुआ है, उसमें बिना लाइसेंस व्यापारी कारोबार कर सकता है। ऐसे में अगर वह किसान की उपज का मूल्य समय से न दे या एमएसपी से नीचे खरीद करे तो उस पर कार्यवाही नहीं हो पाएगी। पंजाब सरकार इस नए कानून को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देगी।
बादल ने कहा कि अन्नदाता देश का पेट भर रहा है और उसका बेटा सरहद की रक्षा कर रहा है। कांग्रेस पार्टी आखिरी दम और सांस तक किसानों के हितों की हिफाजत करेगी। प्रेसवार्ता में कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव धीरज गुर्जर, प्रदेश उपाध्यक्ष वीरेंद्र चौधरी, ओंकारनाथ सिंह, मीडया संयोजक ललन कुमार भी मौजूद रहे।
अजीत
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प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बादल ने कहा कि कृषि आय 14 साल में इस साल सबसे कम है। उपज का दाम पिछले 18 साल में इस साल सबसे कम आया है। प्रधानमंत्री ने कहा था कि वह स्वामीनाथन आयोग की
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रिपोर्ट लागू करेंगे, लेकिन उसे लागू न करके किसानों के साथ विश्वासघात किया है। उन्होने कहा कि तीनों नए कृषि कानूनों में एमएसपी का जिक्र न किए जाने से सरकारी अनाज मंडिया, सब्जी और फल मंडिया समाप्त हो जाएंगी। किसान पूंजीपतियों के तय किए गए मूल्य पर फसल बेचने को मजबूर होंगे। नई व्यवस्था में पूंजीपतियों को ही फायदा होगा।
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बादल ने कहा कि सीएसीपी (कमीशन फॉर एग्रीकल्चरल कॉस्ट एंड प्राइसेस) ने सिफारिश की है कि 8.6 प्रतिशत महंगाई को देखते हुए गेहूं की एमएसपी पर 6.6 प्रतिशत और धान पर 5.9 प्रतिशत बढ़ोतरी की जाए। लेकिन, सरकार ने गेहूं पर 2.6 प्रतिशत और धान पर 2.9 प्रतिशत एमएसपी बढ़ाई है। जबकि, संसद में घोषणा की की 50 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की है। आयोग ने यह भी सिफारिश की है कि जिन भी कृषि उपज गेहूं, धान, मक्का, सरसों की एमएसपी पर खरीद होती है, उसका परीक्षण किया जाए। इसके साथ ही उर्वरक सब्सिडी सीधे किसानों के खाते में 5000 रुपये प्रति किसान दी जाए।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार कुछ किसानों के खाते में 500 रुपये प्रतिमाह भेज रही है, पर डीजल पर यूपीए शासनकाल में जो एक्साइज ड्यूटी 3.56 रुपये थी,
उसे बढ़ाकर 40 रुपये कर दी है। जिससे किसानों को सिर्फ डीजल खरीद पर ही 6000 रुपये सालाना अधिक देना पड़ रहा है।
बादल ने कहा कि देश में हर घंटे पर एक किसान आत्महत्या करने को विवश है। एक दिन में 24 किसान आत्महत्या कर रहे हैं। मोदी सरकार जबसे सता में आई है, कॉर्पोरेट टैक्स लगभग 40 प्रतिशत घटाया गया है। उन पर 6.6 लाख करोड़ रुपये विभिन्न तरीकों से माफ किया है। एक्साइज ड्यूटी का हिस्सा (लगभग 42 प्रतिशत) राज्यों को नहीं दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों से उच्च प्रीमियम लिया जा रहा है।अकेले हरियाणा में बीमा कंपनियों ने किसानों से 10 हजार करोड़ रुपये कमाया है।
उन्होंने कहा कि इन काले कानूनों से जहां एक तरफ किसान अधिकारविहीन हो जाएंगे, वहीं मंडी परिषद और विपणन समितियां खत्म हो जाएंगी। लाखों-लाख कर्मचारियों को नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा। मंडी परिषद की आय से ग्राम स्तर विकास कार्य होते हैं। कॉर्पोरेट घराने गांव के आंतरिक विकास जैसे लिंक रोड, नाली व खडंजा आदि में रुचि नहीं लेंगे।
बादल ने कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली का अनाज देने वाली पीसीएफ पर 6 लाख करोड़ का कर्ज है, क्योंकि सरकार ने 6 वर्ष से कोई ग्रांट ही नहीं दी है। उन्होने कहा कि एक राज्य से दूसरे राज्य में बिक्री पर पहले भी कोई प्रतिबंध नहीं था। बिहार में किसान को अपनी उपज का 30 प्रतिशत कम दाम मिलता है। भाजपा बिहार मॉडल को पूरे देश में लागू करना चाहती है।
उन्होंने कहा कि जो नया कानून पारित हुआ है, उसमें बिना लाइसेंस व्यापारी कारोबार कर सकता है। ऐसे में अगर वह किसान की उपज का मूल्य समय से न दे या एमएसपी से नीचे खरीद करे तो उस पर कार्यवाही नहीं हो पाएगी। पंजाब सरकार इस नए कानून को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देगी।
बादल ने कहा कि अन्नदाता देश का पेट भर रहा है और उसका बेटा सरहद की रक्षा कर रहा है। कांग्रेस पार्टी आखिरी दम और सांस तक किसानों के हितों की हिफाजत करेगी। प्रेसवार्ता में कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव धीरज गुर्जर, प्रदेश उपाध्यक्ष वीरेंद्र चौधरी, ओंकारनाथ सिंह, मीडया संयोजक ललन कुमार भी मौजूद रहे।
अजीत