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यूपी चुनाव: हर चरण में मुकाबले में रही भाजपा तो सपा देती रही टक्कर

Fri, 10 Mar 2017 02:44 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 10 Mar 2017 02:44 AM IST
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 BJP was main fighter in every step of Uttar Pradesh election.

यूपी विधानसभा चुनाव के लिए 403 सीटों पर मतदान पूरा होने के बाद अब परिणाम जानने की उत्सुकता बढ़ हुई है। वोटरों ने क्या जनादेश दिया है, यह तो 11 मार्च को ही पता लगेगा, लेकिन वर्ष 2012 की तुलना में मतदान में करीब डेढ़ फीसदी की बढ़ोतरी को लेकर दलों में माथा-पच्ची जरूर हो रही है।

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यह कोई बड़ा संकेत नहीं दे रही है, लेकिन माना जा रहा है कि जहां वोटों का ध्रुवीकरण हुआ, वहां मतदान में उछाल आया है। कुछ लोग इसे बदलाव की आहट से जोड़ रहे हैं। वे भाजपा को नंबर-1 की दौड़ में देख रहे हैं। हालांकि, जीत का दावा करने में सपा-बसपा भी पीछे नहीं हैं।
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प्रदेश में 11 फरवरी से 8 मार्च के बीच 7 चरणों में विधानसभा चुनाव हुए। पहले चरण में सर्वाधिक 73 और सातवें चरण में सबसे कम 40 सीटों पर वोट पड़े। बूथों पर सबसे ज्यादा वोटर दूसरे चरण के जिलों में पहुंचे।
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इस चरण में सहारनपुर से लेकर पीलीभीत तक 11 जिलों की 67 सीटों पर मतदान हुआ। इस चरण के अधिकतर जिले मुस्लिम बहुल हैं। भाजपा इन जिलों में ध्रुवीकरण कराने में सफल रही।

दूसरे चरण में बसपा को सियासी नुकसान होने का अनुमान

 BJP was main fighter in every step of Uttar Pradesh election.
डेमो - फोटो : amar ujala

पहले चरण में चतुष्कोणीय मुकाबले में राष्ट्रीय लोकदल भी शामिल रहा। दूसरे चरण में मुख्य लड़ाई भाजपा और सपा के बीच मानी जा रही है। इस चरण में बसपा को सियासी नुकसान होने का अनुमान है।

विधानसभा के पहले 6 चरणों में पश्चिमी यूपी से पूरब की तरफ बढ़ने पर मतदान गिरता चला गया। अलग-अलग चरणों में अधिकतम 65 और न्यूनतम 57 फीसदी मतदान हुआ। सातवें चरण में काशी क्षेत्र में वोटरों की सुस्ती टूटी। यहां 60 प्रतिशत से ज्यादा वोट पड़े हैं।

पिछले चुनाव की तुलना में कुछ जिलों में मतदान घटा और कुछ जिलों में बढ़ा। 2012 में कुल 59.40 फीसदी मतदान हुआ, जबकि इस बार 60.03 प्रतिशत वोटर बूथों कर पहुंचे।

चुनाव विश्लेषण से जुड़े लोगों का मानना है कि 2012 की तुलना में एक-डेढ़ फीसदी वोट बढ़ना कोई चौंकाने वाला रुझान नहीं है। वोटरों की जागरूकता से भी इतना मतदान बढ़ जाता है। उनका कहना है कि जिन जिलों में ज्यादा मतदान हुआ है, वहां वोटों का ध्रुवीकरण हुआ है।

पहले दो चरणों में सपा के साथ दिखाई दिए मुस्लिम

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demo pic

पहले दो चरणों में मुस्लिम मतों का बड़ा हिस्सा सपा के पक्ष में खड़ा दिखाई पड़ा। पहले चरण में आधा दर्जन जिलों तथा दूसरे चरण के लगभग सभी जिलों मे वोटों के ध्रुवीकरण के चलते सपा-भाजपा आपस में चुनाव लड़ते रहे।

इन दोनों चरणों में बसपा की सर्वाधिक संभावना नजर आ रही थीं, लेकिन उसका दलित-मुस्लिम समीकरण परवान चढ़ता नहीं दिखा। तीसरे चरण में सपा को झटके के साथ मतदान का ट्रेंड कुछ हद तक बदला है।

अति पिछड़ों में दिखा भाजपा का प्रभाव
चुनाव के दौरान अति पिछड़े वोटों में लंबे अरसे बाद भाजपा का प्रभाव दिखा। उनके मतों का स्वाभाविक झुकाव भाजपा की तरफ रहा। पहले इन वोटों का बड़ा हिस्सा बसपा या सपा के पक्ष में जाता रहा है।

जिन सीटों पर सपा-कांग्रेस या बसपा के प्रत्याशी अति पिछड़ी जातियों से हैं, वहां इन दलों को भी अति पिछड़े वोट मिले। सवर्ण मतों का रुझान आमतौर पर भाजपा के पक्ष में रहा। यही स्थिति भाजपा को लड़ाई में आगे दिखा रही है।

मध्य यूपी में यादवों में रही नाराजगी

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मुलायम सिंह यादव

सपा का गढ़ समझे जाने वाले मध्य यूपी में इस बार यादवों में कहीं-कहीं सरकार से नाराजगी दिखी। इसकी वजह मुलायम सिंह परिवार का विवाद माना जा रहा है। जसवंतनगर समेत यादव पट्टी में पुराने यादवों में मुलायम को अध्यक्ष पद से हटाए जाने के फैसले को सही नहीं माना गया।

मध्य यूपी में इसका चुनाव नुकसान होने का अंदेश बना हुआ है। तीसरे चरण के जिलों में सपा खासतौर पर घाटे में रहेगी जहां 2012 में उसे 69 में से 55 सीट मिली थी।

पूर्वांचल में त्रिकोणात्मक रहा चुनाव
जब चुनाव दो दलों के बीच हो तो हार-जीत की संभावना लगाना आसान हो जाता है। त्रिकोणात्मक चुनाव होने पर दो-चार हजार मतों का प्रबंधन ही चुनाव नतीजे को प्रभावित कर देता है।

आखिरी दो चरणों में किसी एक दल के पक्ष में वोटरों का इकतरफा रुझान वाले नहीं रहे। इन जिलों में मिले-जुले नतीजे आने की संभावना है।

हवा के रुख के खिलाफ किया मतदान

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demo pic - फोटो : amar ujala

पहले चरण में जाटों ने हवा के रुख के खिलाफ मतदान किया। उनका रुझान भाजपा, सपा या बसपा के पक्ष में नहीं रहा। अधिसंख्य जाट मतों का झुकाव चौधरी अजित सिंह के रालोद के पक्ष में रहा। इससे जाट वोटों की उम्मीद संजोए रखने वाली भाजपा को वेस्ट यूपी में कई सीटों पर नुकसान होने का अनुमान है।

राष्ट्रीय लोकदल को भले ही ज्यादा सीट न मिलें, लेकिन उसका वोट प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। दूसरे चरण में वोटों का ध्रुवीकरण हो जाने से ऐसी स्थिति नहीं बनी। पूर्वी यूपी में भी कई सीटों पर रालोद अच्छा चुनाव लड़ा है।

पूर्वांचल में नवगठित निषाद पार्टी के कई उम्मीदवार मजबूती से चुनाव लड़े हैं। विधानसभा में उसका खाता खुलने की संभावना जताई जा रही है। अति पिछड़े वर्ग की इस जाति ने मुख्य धारा के दलों से काफी हद तक किनारा किया है।

देखें, ये है हर चरण की मतदान सीटों का प्रतिशत

 BJP was main fighter in every step of Uttar Pradesh election.

चरण--जिले--सीट--मतदान (फीसदी)
पहला--15--73--63.64
दूसरा--11--67--65.97
तीसरा--12--69--61.35

चौथा--12--53--59.28
पांचवां--11--51--57.30
छठा--7--49--57.03
सातवां--7--40--60.03

नोट: पांचवे चरण की आलापुर सीट पर बृहस्पतिवार को 00 फीसदी वोटिंग हुई।

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