सामने आया यूपी चुनाव जीतने का बीजेपी का नया समीकरण!
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‘मैं न तो गुटबाजी से परेशान होता हूं और न यह दावा करता हूं कि राजनीति से गुटबाजी पूरी तरह खत्म हो जाएगी। राजनीति में महत्वाकांक्षा भी रहेगी और गुटबाजी भी। इसीलिए पार्टी के भीतर गुटबाजी की बात न तो हमें डराती है और न यूपी में भाजपा के भविष्य को लेकर मेरे मन में किसी आशंका को जन्म ही देती है।
मेरा प्रयास सभी को साथ लेकर पार्टी को मजबूत बनाना है।’ यह कहना है, भाजपा के प्रदेश प्रभारी ओम माथुर का।
शुक्रवार को यहां पार्टी की बैठक में शामिल होने आए माथुर ‘अमर उजाला’ के सवालों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि अब तक जितना उन्होंने उत्तर प्रदेश को समझा है, उसके आधार पर कह सकते हैं कि यहां की सियासत बहुत टेढ़े-मेढ़े रास्ते से होकर गुजरती है। कई सारे समीकरण हैं। कई को समझ चुका हूं तो कुछ को समझ रहा हूं।
पर, मुलायम सिंह यादव ने जिस तरह अपने लोगों को पंचायत चुनाव में अधिकारियों को भरोसे न रहने को कहा है, उससे यह साबित हो जाता है कि भाजपा की कोशिशें उन्हें भी डराने लगी हैं। माथुर से बातचीत के कुछ प्रमुख अंश-
इस तरह खत्म कर रहे हैं गुटबाजी
सवाल : उत्तर प्रदेश भाजपा की सबसे बड़ी समस्या गुटबाजी रही है? आपको नहीं लगता कि इसका असर पंचायत और विधानसभा चुनाव में भाजपा पर पड़ेगा?
माथुर : गुटबाजी के निराकरण को मैने उत्तर प्रदेश में कई प्रयास किए हैं। हर जिले में समन्वय समितियां बनाई गई हैं। इनमें नए, पुराने, मौजूदा और सभी पूर्व पदाधिकारियों व जिलों के प्रमुख नेताओं को शामिल किया है। मेरा मानना है कि जो पूर्व हैं, उनकी बात भी सुनी जाए। आखिर उन्होंने भी पार्टी के लिए पहले काम किया ही है।
पंचायत चुनाव से एक प्रयोग शुरू कर रहा हूं, वह यह कि सारे फैसले व प्रत्याशियों के बारे में फैसला इन्हीं समितियों की राय से होगा। मुझे भरोसा है कि इससे काफी हद तक इस समस्या का समाधान होगा। रही महत्वाकांक्षा की बात तो यह राजनीतिक क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा और मानव स्वभाव है। मेरा प्रयास सिर्फ इतना रहता है कि अपने साथ पार्टी की महत्वाकांक्षा का भी ध्यान रहे।
सवाल : आपको नहीं लगता कि ओमप्रकाश सिंह जैसे वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी से भाजपा को नुकसान हो सकता है?
माथुर : यह बात सिर्फ मीडिया में है कि वे नाराज हैं। सिंह हों या विनय कटियार अथवा अन्य कोई वरिष्ठ नेता। मेरा सबसे संवाद है। उत्तर प्रदेश आने के बाद मैने जब चित्रकूट में चिंतन बैठक की तो प्रदेश के सभी पूर्व प्रदेश अध्यक्षों को बुलाकर उनसे बातचीत की।
मेरा मानना है कि भाजपा का कोई साधारण से साधारण कार्यकर्ता भाजपा को नुकसान पहुंचाने के बारे में सपने में भी नहीं सोच सकता। सिंह तो बड़े नेता हैं। चुनाव में सभी पार्टी के लिए जुटेंगे। गुटबाजी तब ही ज्यादा खतरनाक और पार्टी को नुकसान पहुंचाने वाली हो जाती है जब संपर्क व संवाद बंद हो जाए। इसीलिए मैने उत्तर प्रदेश में इसी पर फोकस किया है।
पंचायत चुनाव पर है खास फोकस
सवाल : उत्तर प्रदेश में भाजपा का इस बार पंचायत चुनाव लड़ने पर काफी फोकस होने की कोई विशेष वजह?
माथुर : मेरा अनुभव है कि पार्टी जिन राज्यों में पंचायत चुनाव में हिस्सा लेती हैं, वहां विधानसभा चुनाव में भी प्रभावी प्रदर्शन रहता है। सबसे पहले मैंने ही राजस्थान में पंचायत चुनाव पार्टी के आधार पर लड़ने का प्रस्ताव रखा था। कुछ लोगों का मत भिन्न था। अंतत: मेरा प्रस्ताव स्वीकार हो गया। नतीजा सामने हैं।
राजस्थान में भाजपा गांव तक अपना आधार रखती है। गुजरात, मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में इसी प्रयोग के कारण हम लगभग 15 साल से सत्ता में हैं। प्रारंभ में उत्तर प्रदेश में भी पार्टी के आधार पर चुनाव लड़ने में असमंजस था। पर, अंतत: जिला पंचायतों के 3128 वार्डों का चुनाव लड़ने पर सहमति बन गई। इससे एक लाभ हुआ। चुनाव की तैयारियों के सिलसिले में भाजपा जिला पंचायतों के सभी वार्डों तक पहुंच गई।
सवाल : उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव सत्तारूढ़ दल का माना जाता है। भाजपा कैसे निपटेगी?
माथुर : मुलायम सिंह को अगर कार्यकर्ताओं से यह कहना पड़ रहा है कि अधिकारियों से सिफारिश न करना। चुनाव में गुटबाजी न होने देना। जाहिर है कि उन्हें इस बात का एहसास है कि इस बार सिर्फ सत्ता के सहारे मनचाहा नतीजा हासिल नहीं कर पाएंगे। अभी भाजपा के बमुश्किल 50-60 लोग जिला पंचायतों में सदस्य होंगे। वातावरण को देखते हुए भरोसा है कि पार्टी इससे आगे बढे़गी ही। साथ ही विधानसभा चुनाव के लिए भी कसरत हो जाएगी।
पार्टी कार्यकर्ताओं को आशंका टिकट बाहरी ले जाएंगे
सवाल : विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीद्वारों की घोषणा कब तक हो जाएगी? दूसरे दलों के लोगों के आने से पार्टी कार्यकर्ताओं में आशंका है कि टिकट इसी तरह के लोग पा जाएंगे?
माथुर : राजनीति में मैं कोई लाइन खींचकर न तो काम करता हूं और न बात करता हूं। जब जैसा जरूरी होगा उस आधार पर उम्मीद्वारों की घोषणा हो जाएगी। कार्यकर्ताओं का पूरा ध्यान रखा जाएगा। दूसरे दलों के लोगों को पार्टी में शामिल करने पर पूरी रोक नहीं लगाई जा सकती है। पर, हमारा प्रयास होगा कि कार्यकर्ताओं की अनदेखी न हो।
सवाल : पार्टी में रतनलाल अहिरवार जैसे कई दागी लोग भी शामिल हो रहे हैं?
माथुर : मैंने तो स्पष्ट रूप से कह रखा है कि किसी आपराधिक या भ्रष्टाचार के मामले में लिप्त या आरोपी व्यक्ति को भाजपा में जगह न दी जाए। फिर भी अगर ऐसा है तो मैं इसे देखूंगा। इतनी बात तो समझ लीजिए कि चुनाव लड़ने का मौका साफ-सुथरी छवि वालों को ही मिलेगा।