कांग्रेस के किले में सेंधमारी की तैयारी में भाजपा, भाजपाइयों में जोश भर गए पीएम मोदी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकास परियोजनाओं की सौगात के बहाने लालगंज से मिशन 2019 का बिगुल फूंककर यह साफ कर दिया कि भाजपा कांग्रेस के परंपरागत गढ़ में सेंधमारी की पूरी तैयारी में है। कांग्रेसी गढ़ों को ढहाने के लिए भाजपा ने रायबरेली के आसपास के सात जिलों के 21 विधानसभा क्षेत्रों से अपने कार्यकर्ताओं व समर्थकों को सभा में बुलाया था।
सुबह का वक्त होने के बावजूद भीड़ ठीकठाक रही। पीएम कार्यकर्ताओं व समर्थकों में जोश भरने में सफल भी रहे। हालांकि सभा में आमजन की भागीदारी कम रही। कार्यकर्ताओं व समर्थकों को छोड़ दिया जाए तो सभा में पहुंचे अन्य लोगों में बहुत उत्साह नहीं दिखा।
पीएम मोदी पहली बार कांग्रेस की सबसे बड़ी नेता व यूयीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी के गढ़ को भेदने की मुहिम के तहत आए थे। इसीलिए भीड़ जुटाने और माहौल को भाजपामय बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई थी। पूरा लालगंज, बछरावां और रायबरेली से लालगंज की तरफ जाने वाले रास्ते भी भाजपा के झंडों व होर्डिंग्स से पटे थे।
सभा का समय पूर्वाह्न 11 बजे था, लेकिन हाथ में झंडा लिए नारे लगाते कार्यकर्ताओं के जत्थे सुबह से ही रेल कोच फैक्ट्री की तरफ बढ़ रहे थे। हालांकि पीएम के पहुंचने तक पूरा सभास्थल नहीं भरा था। कार्यकर्ता मोदी-मोदी के नारे लगाकर माहौल बना रहे थे।
यह सिलसिला जब भाषण के दौरान भी जारी रहा तो पीएम को कहना पड़ा कि वह कार्यकर्ताओं के जोश का सम्मान करते हैं। उन्हें अपनी बात कहने दें। कार्यकर्ताओं और समर्थकों को छोड़ दें तो सभा में तमाम लोग सिर्फ नजारा देखने पहुंचे थे।
छुट्टा जानवरों से फसलों को बचाए सरकार
सभा में सतांव के बरदर से आए किसान भोला प्रसाद ने कहा कि गांव के लोगों के साथ आए हैं। उन्हें उम्मीद थी कि किसानों के लिए बड़ी घोषणा होगी, लेकिन मायूसी हाथ लगी। भोला ने छुट्टा जानवरों को किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या बताते हुए कहा कि फसलें बर्बाद हो रही हैं। सरकार को छुट्टा जानवरों से फसलों को हो रहे नुकसान की भरपाई करनी चाहिए। इन पर अंकुश के लिए सरकार को कुछ करना चाहिए।
भाजपा ने कुछ नया नहीं किया
सभा में रायबरेली के व्यापारी राम सजीवन गुप्ता का कहना था कि कांग्रेस ने जो काम शुरू किए थे, भाजपा वही आगे बढ़ा रही है। कुछ नया नहीं किया है। नोटबंदी का असर व्यापार पर जरूर पड़ा है। इसका सबसे ज्यादा असर कारोबारियों पर पड़ा।