फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   BJP to make its place in co oprative institutions in Uttar Pradesh.

मोदी मंत्र से अब यूपी की सहकारी संस्थाओं में पैठ बनाएगी भगवा टोली, ये है तैयारी

Mon, 11 Sep 2017 09:18 AM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 11 Sep 2017 09:18 AM IST
विज्ञापन
BJP to make its place in co oprative institutions in Uttar Pradesh.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

मोदी मैजिक से देश में एक के बाद एक राज्य में सत्तारूढ़ हो रही भगवा टोली की अब इसी मंत्र के सहारे प्रदेश की सहकारी संस्थाओं में पकड़ और पैठ बढ़ाकर गांवों में सियासी जमीन मजबूत बनाने की तैयारी है। इस सिलसिले में 21 सितंबर को दिल्ली स्थित विज्ञान भवन सभागार में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबंधित संगठन सहकार भारती तथा सहकारी आंदोलन में सक्रिय संघ परिवार से संबंधित लगभग 400 लोगों की बैठक बुलाई गई है। इसमें यूपी से भी लगभग 100 लोग शामिल होंगे। बैठक को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संबोधित करेंगे।

विज्ञापन


इसमें सहकार भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्योतिंद्र भाई मेहता भी रहेंगे। इससे पहले लखनऊ में 17 सितंबर को एक महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार और प्रदेश के सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा की मौजूदगी में होने वाली इस बैठक में सहकार भारती के निवर्तमान अध्यक्ष और अब संरक्षक सतीश मराठे और राष्ट्रीय संगठन मंत्री विष्णु गोबड़े भी रहेंगे। इनके अलावा सहकार भारती के प्रदेश के प्रमुख पदाधिकारी भी हिस्सा लेंगे।
विज्ञापन


दिल्ली बैठक का सियासी महत्व भी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक और सहकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले लक्ष्मण राव इनामदार की जन्मशती पर दिल्ली में होने वाली इस जुटान के जरिये संघ परिवार बड़े राजनीतिक अभियान पर काम शुरू करने की तैयारी में है। इनामदार का महत्व इसी से जाना जा सकता है कि वे गुजरात में कई वर्षों तक क्षेत्र प्रचारक रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन


संघ के लोग बताते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गांव बडनगर (गुजरात) में संघ के काम से गए इनामदार ही मोदी को आठ वर्ष की आयु में संघ की शाखा में लाए थे। उन्होंने ही मोदी को आगे बढ़ाया। गुजरात में सक्रियता के दौरान ही उन्होंने तमाम स्वयंसेवकों को न सिर्फ संघ बल्कि सहकारिता के क्षेत्र से जोड़कर स्वावलंबी बनाया। उन्हीं के प्रयास से संघ ने सहकारी क्षेत्र के लोगों के बीच पकड़ व पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से सहकार भारती संस्था का गठन कराया था।

यह वजह तो नहीं

BJP to make its place in co oprative institutions in Uttar Pradesh.

पार्टी के बैनर पर जिला पंचायतों के चुनाव लड़ने के प्रयोग से जमीनी आधार का विस्तार होने में मिली सफलता से उत्साहित भगवा टोली का शायद यह निष्कर्ष है कि पंचायत और सहकारी संस्थाओं में पैठ मजबूत होने से पार्टी का गांव-गांव मजबूत आधार ही नहीं तैयार होगा, बल्कि संगठन के पास नीचे तक राजनीतिक रूप से सक्रिय प्रभावी लोगों की बड़ी जमात भी हो जाएगी। यह भाजपा के साथ ही संघ परिवार से जुड़े अन्य कई संगठनों का विस्तार करने में भी मददगार बनेगी।

भगवा टोली का यह निष्कर्ष अकारण नहीं है। गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भाजपा के अनुकूल समीकरणों में वहां की सहकारी संस्थाओं में भाजपा समर्थकों की मजबूत पैठ को भी बड़ा कारण माना जाता है।

संघ परिवार का शायद यह मानना है कि देश में और ज्यादातर प्रदेशों में भाजपा की सरकारें होने के नाते इस समय अगर पंचायतों के साथ-साथ सहकारी संस्थाओं में भी पकड़ और पैठ मजबूत कर ली जाए तो भाजपा सहित संघ परिवार के सभी संगठनों का हर जगह मजबूत ढांचा खड़ा किया जा सकता है। साथ ही कार्यकर्ताओं के मजबूत समूह भी तैयार करने में मदद मिलेगी।

लखनऊ की बैठक में इन मुद्दों पर चर्चा
लखनऊ में 17 सितंबर को होने वाली बैठक में यूपी की सहकारी संस्थाओं की समीक्षा के साथ उन्हें मजबूत बनाने पर विचार-विमर्श होगा। इसमें प्रदेश की सहकारी संस्थाओं में संघ परिवार की विचारधारा से जुड़े लोगों को लाने तथा राजनीतिक खींचतान की वजह से यूपी में बदहाल हो रही सहकारी संस्थाओं को मजबूत बनाने पर चर्चा होगी।

इस तरह हुई तैयारी

BJP to make its place in co oprative institutions in Uttar Pradesh.

जानकारी के मुताबिक, पिछले महीने यहां सरस्वती कुंज में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहसरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले और डॉ. कृष्ण गोपाल की मौजूदगी में सरकार के प्रतिनिधियों के साथ मनन-मंथन के बाद सहकारी संस्थाओं में पैठ बनाने की रणनीति बनी थी। तय हुआ था कि यह काम सपा, बसपा या कांग्रेस की राह पर नहीं, बल्कि सहकारी संस्थाओं में विचार परिवार के लोगों को ज्यादा से ज्यादा सदस्य बनाकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिये किया जाए।

इसमें सरकार सिर्फ सहयोगी की भूमिका में रहे। बाकी प्रयास, अभ्यास और कार्य की जिम्मेदारी भगवा टोली के सदस्य ही निभाएं। सहकार भारती के प्रदेश महामंत्री वीरेंद्र पांडेय हालांकि इसके राजनीतिक उद्देश्य से इन्कार करते हैं।

वे कहते हैं कि प्रदेश में सत्तारूढ़ रहे कुछ राजनीतिक दलों ने स्वार्थ में सहकारी संस्थाओं को बदहाल कर डाला। इससे लोगों को सहकारिता का पूरा लाभ नहीं मिला। ग्रामीण भारत के लगभग 50 प्रतिशत परिवार अब भी सहकारी संस्थाओं की पहुंच से बाहर हैं। सहकार भारती की कोशिश है कि सहकारिता लोगों को स्वावलंबी और देश के विकास में साझीदार बनाए। उसी उद्देश्य से सारे प्रयास हो रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed