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किसानों के मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए भाजपा तांडव पर करा रही ‘तांडव’ : अखिलेश
Tue, 19 Jan 2021 08:09 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Tue, 19 Jan 2021 08:09 AM IST
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अखिलेश यादव
- फोटो : amar ujala
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सपा अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा के वादों और सुशासन के दावों की पोल खुलने लगी है। मुख्यमंत्री के स्टार प्रचारक का तमगा भी फीका पड़ने लगा है। किसानों का भाजपा से मोहभंग हो गया है। उन्हें विश्वास हो गया है कि उनके साथ किए गए वादे कभी पूरे नहीं होंगे। किसान को फसल की लागत का ड्योढ़ा मूल्य नहीं मिला। एमएसपी और आय दोगुनी करने के नारे थोथे सिद्ध हो चुके हैं। भाजपा किसानों के मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए तांडव पर ‘तांडव’ करा रही है।
अखिलेश ने सोमवार को जारी बयान में कहा, हाल ही में एक सर्वे से साबित हुआ कि मुख्यमंत्रियों के कामकाज की लिस्ट में उत्तर प्रदेश का दसवां नंबर भी नहीं है। इससे स्पष्ट है कि भाजपा के मुख्यमंत्री अपनी जमीन खोते जा रहे हैं। सीएम अपनी प्रशंसा में जो दावे करते रहे हैं, उनकी कलई भी इस सर्वेक्षण से खुल जाती है। किसानों को न तो धान का समर्थन मूल्य मिला है और न ही समय से भुगतान हुआ है। उसका धान 900 से 1100 रुपये में बिक गया है। गन्ना मूल्य घोषित नहीं हुआ, बकाया भुगतान भी नहीं मिला है। फसल बीमा में किसान को नहीं, बल्कि बीमा कंपनियों को फायदा हुआ है। उन्होंने कहा कि वास्तविकता में धान 6 प्रतिशत किसानों से जबकि 94 प्रतिशत बिचौलियों से खरीदा गया है। यानी उत्पादन का कुल 6 प्रतिशत एमएसपी से खरीदा गया है। अखिलेश ने कहा कि किसानों के हित में तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया जाना चाहिए।
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अखिलेश ने सोमवार को जारी बयान में कहा, हाल ही में एक सर्वे से साबित हुआ कि मुख्यमंत्रियों के कामकाज की लिस्ट में उत्तर प्रदेश का दसवां नंबर भी नहीं है। इससे स्पष्ट है कि भाजपा के मुख्यमंत्री अपनी जमीन खोते जा रहे हैं। सीएम अपनी प्रशंसा में जो दावे करते रहे हैं, उनकी कलई भी इस सर्वेक्षण से खुल जाती है। किसानों को न तो धान का समर्थन मूल्य मिला है और न ही समय से भुगतान हुआ है। उसका धान 900 से 1100 रुपये में बिक गया है। गन्ना मूल्य घोषित नहीं हुआ, बकाया भुगतान भी नहीं मिला है। फसल बीमा में किसान को नहीं, बल्कि बीमा कंपनियों को फायदा हुआ है। उन्होंने कहा कि वास्तविकता में धान 6 प्रतिशत किसानों से जबकि 94 प्रतिशत बिचौलियों से खरीदा गया है। यानी उत्पादन का कुल 6 प्रतिशत एमएसपी से खरीदा गया है। अखिलेश ने कहा कि किसानों के हित में तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया जाना चाहिए।
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