भाजपा के लिए एक तरफ कुआं, दूसरी तरफ खाईं बना प्रमोशन में आरक्षण
भाजपा प्रमोशन में आरक्षण का मामला फिलहाल ठंडे बस्ते में ही रखना चाहती है। रविवार को राजधानी में आयोजित अधिकार दिलाओ रैली से यह बात साफ हो गई। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह इस रैली में आए ही नहीं।
केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह इसमें शामिल तो हुए, लेकिन इस मुद्दे पर कुछ बोले नहीं। रैली के आयोजक भाजपा सांसद कौशल किशोर ने प्रमोशन में आरक्षण की बात तो कही लेकिन बदले हुए सुरों के साथ।
पिछले दिनों एक नेता ने यह दावा किया था कि उनकी भाजपा के कई नेताओं से बातचीत हो चुकी है और प्रमोशन में आरक्षण बहाली के लिए जल्द ही मोदी सरकार कोई फैसला करेगी।
पर, रैली में उन्होंने पदोन्नति में आरक्षण समाप्ति के लिए जिस तरह बसपा सुप्रीमो मायावती को कठघरे में खड़ा किया और प्रदेश में भाजपा सरकार बनने पर दलितों को न्याय मिलने की बात कहकर इस मामले से खुद को किनारे कर लिया, उससे यह बात साफ हो गई कि भाजपा इस मुद्दे पर फिलहाल यथास्थिति की राह पर ही चलने की पक्षधर है।
विधानसभा चुनाव में भी दलितों का साथ मिलने की उम्मीद
दरअसल, भाजपा के लिए यह मुद्दा एक तरफ कुआं तो दूसरी तरफ खाई जैसा है। संविधान संशोधन विधेयक न पारित होने पर अगर दलित समाज के अधिकारी व कर्मचारी नाराज हैं तो इस विधेयक को पारित कराने से प्रदेश के पिछड़ों और अगड़ों के भाजपा के खिलाफ लामबंद होने की आशंका है। यह ज्यादा नुकसानदेह होगा।
जहां तक दलितों का सवाल है तो भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि इस मुद्दे के रहते भाजपा को जब लोकसभा चुनाव में दलितों का अच्छा-खासा वोट मिल सकता है तो विधानसभा चुनाव में भी कुछ न कुछ मिल ही जाएगा।
केंद्र सरकार द्वारा अंबेडकर के नाम पर किए गए काम भी कुछ मदद करेंगे। साथ ही मायावती विरोधी कुछ दलित वोट मिलेंगे ही। इन वजहों से भाजपा अभी इस मुद्दे को ठंडे बस्ते में ही रखना चाहती है।