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शुरू हुई भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष की उल्टी गिनती

Fri, 02 Jan 2015 01:24 AM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 02 Jan 2015 01:24 AM IST
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BJP state chief to face challenges in 2015.

वर्ष 2014 बीत गया। 2015 शुरू हो गया। साथ ही शुरू हो गई हैं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी की परीक्षाओं की उल्टी गिनती। इस साल उन्हें पार्टी की सदस्यता दो करोड़ तक पहुंचाने के साथ ही पंचायत चुनाव में भाजपा को सफलता दिलाने के इम्तिहानों से गुजरना है।

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विधान परिषद की स्थानीय प्राधिकारी कोटे की अगले साल जनवरी में खाली हो रहीं 36 सीटों में भी ज्यादा से ज्यादा पर भाजपा का कब्जा कराकर अपनी रणनीति व नेतृत्व क्षमता का लोहा मनवाना है। साथ ही अपने चुनाव के इम्तिहान से भी गुजरना है।
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बीते साल लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पहली बार अपने अकेले दम पर सूबे की 80 में से 71 सीटें जीतकर प्रदेश ही नहीं, देश की राजनीति में जबर्दस्त वापसी की। इसका श्रेय प्रदेश अध्यक्ष डॉ. वाजपेयी के खाते में भी गया। पर, उनकी असली परीक्षा तो अब होनी है।
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पार्टी का सदस्यता अभियान चल रहा है। केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश भाजपा को सदस्यता 30 लाख से बढ़ाकर डेढ़ करोड़ पहुंचाने का लक्ष्य दिया है, पर वाजपेयी ने इसे दो करोड़ पहुंचाने का ऐलान करके  खुद अपनी तरफ से परीक्षा को और कठिन बना लिया है।

कद और रुतबे को बरकरार रखने की चुनौती

BJP state chief to face challenges in 2015.

सदस्यता अभियान के बाद भाजपा के संगठनात्मक चुनाव होने हैं। बिना किसी विवाद के इन्हें संपन्न कराने के साथ ही उन्हें संगठन में मनोनयन युग को समाप्त करने के दावे पर खरा उतरकर दिखाना है।

पार्टी संविधान के मुताबिक, वाजपेयी दूसरी बार भी प्रदेश अध्यक्ष पद के दावेदार हो सकते हैं। अगर वे चुनाव लड़ते हैं तो और नहीं लड़ते हैं तो भी उन्हें भविष्य में अपने कद व रुतबे को बरकरार रखने की चुनौती से गुजरना है।

पंचायतों में दिखानी होगी पहुंच : प्रदेश में लगभग 52 हजार ग्राम पंचायतों, 822 क्षेत्र पंचायतों और 75 जिला पंचायतों के चुनाव होने हैं। पार्टी ने पहली बार औपचारिक रूप से ये चुनाव लड़ने की घोषणा की है। खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने इन चुनावों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों की राजनीति में पहुंच व पकड़ बढ़ाने की बात कही है।

जाहिर है भाजपा को इन चुनावों में ज्यादा से ज्यादा स्थानों पर कब्जा करके साबित करना होगा कि लोकसभा चुनाव में उसे 71 सीटें सिर्फ संयोग से नहीं मिलीं, बल्कि इस सफलता में संगठन के लोगों की मेहनत व रणनीति की भी भूमिका रही है।

इन्हीं पंचायतों के प्रतिनिधियों के माध्यम से विधान परिषद की 36 सीटों का चुनाव भी इसी साल संभावित है। ये चुनाव भी उनकी नेतृत्व क्षमता की परीक्षा लेंगे।

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