नगर निकाय चुनाव में भी ध्रुवीकरण को धार देने की कोशिश में भाजपा
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यूपी विधानसभा चुनाव में मिली जीत के बाद भाजपा ने अब नगर निकाय चुनाव में भी ध्रुवीकरण की राजनीति को धार देने की तैयारी कर ली है। इसके तहत भाजपा की राज्य सरकार अयोध्या-फैजाबाद और मथुरा-वृंदावन को नगर निगम का दर्जा देने जा रही है।
इन दोनों शहरों को नगर निगम बनाने का प्रस्ताव तो अखिलेश सरकार में ही तैयार किया गया था, लेकिन इसे अमली जामा योगी सरकार पहनाएगी।
नगर निकाय चुनाव से पहले दोनों शहरों को नगर निगम का दर्जा देकर योगी सरकार इसका सियासी फायदा लेने की तैयारी में है। इससे संबंधित प्रस्ताव मंगलवार को होने वाली कैबिनेट में लाया जाएगा। संभावना है कि इसे मंजूरी भी मिल जाएगी।
अयोध्या व मथुरा शुरू से ही भाजपा के एजेंडा में रहे हैं। अखिलेश सरकार ने विधानसभा चुनाव से पहले ही इन दोनों शहरों को नगर निगम का दर्जा देकर भाजपा के ध्रुवीकरण की धार को कुंद करने की कोशिश जरूर की थी, लेकिन समय कम होने के कारण अखिलेश सरकार यह काम नहीं कर पाई।
लगभग तैयार कर लिया गया है प्रस्ताव
अब सूबे में अगले महीने नगर निकायों के चुनाव होने हैं तो योगी सरकार ने इन दोनों शहरों को नगर निगम का दर्जा देकर महानगर की पहचान देने तैयारी कर ली है। नगर विकास विभाग ने अयोध्या के साथ फैजाबाद और मथुरा के साथ वृंदावन को मिलाकर नगर निगम बनाने का प्रस्ताव लगभग तैयार कर लिया है।
अयोध्या व मथुरा में मंदिर निर्माण भाजपा के पुराने एजेंडे में शामिल है, लेकिन कई कारणों से यह संभव नहीं हो पाया है। इसलिए पार्टी और सरकार चाहती है कि कम से कम इन दोनों शहरों को महानगर में शामिल करके अपने सियासी एजेंडे के प्रति जनता के बीच प्रतिबद्धता का इजहार तो किया ही जा सकता है।
...तो नेपथ्य में ही रहेगा फैजाबाद
अयोध्या और फैजाबाद को मिलाकर भले ही नगर निगम बनने जा रहा है, लेकिन योगी सरकार भाजपा के एजेंडे को धार देने के लिए इसे अयोध्या नगर निगम का नाम देने जा रही है। प्रस्ताव भी इसी नाम से तैयार किया गया है।
इस प्रकार नगर निगम सीमा में शामिल होने के बाद भी फैजाबाद का नाम एक तरह से नेपथ्य में ही रहेगा। वहीं, मथुरा व वृंदावन दोनों भाजपा के एजेंडे का हिस्सा हैं, इसलिए इस नगर निगम का नामकरण दोनों शहरों के नाम पर किया जा रहा है।
इस बार होंगे 16 नगर निगमों में चुनाव
सरकार की कोशिश है कि कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद इन दोनों नगर निगमों में चुनाव भी करा लिए जाएं। चूंकि राज्य निर्वाचन आयोग ने अब तक चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा नहीं की है।
इसलिए सरकार चाहती है कि कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद इन दोनों नगर निगमों में भी वार्डों के परिसीमन और आरक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाए। सूत्रों की मानें तो तैयारियां पूरी करने के लिए कम से कम 50 दिन का समय चाहिए। इसलिए चुनाव कराना संभव है। भले ही दूसरे चरण में यहां चुनाव कराना पड़े।
ऐसे में इस बार 14 के बजाय 16 नगर निगमों के चुनाव कराए जाने की संभावना अधिक है। पिछली बार 12 नगर निगमों में ही चुनाव हुए थे, जबकि गठन होने के बाद भी सहारनपुर नगर निगम में चुनाव नहीं हो पाया था।
वहीं, फिरोजाबाद नगर निगम का गठन सपा सरकार ने बाद में किया था। अब तक 14 नगर निगमों समेत 654 नगर निकायों के लिए ही चुनावी तैयारियां की जा रही थीं। संभावना है कि दो नए नगर निगमों का गठन होने के बाद अब 656 निकायों में चुनाव कराए जाएंगे।