{"_id":"5fc2bc2b8ebc3e9be10573e7","slug":"bjp-relies-on-yogi-for-establishing-foothold-in-telangana-and-andhra-pradesh","type":"story","status":"publish","title_hn":"सियासी डगर-भाजपा की नजरः तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में पैर जमाने के लिए योगी पर भरोसा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सियासी डगर-भाजपा की नजरः तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में पैर जमाने के लिए योगी पर भरोसा
Sun, 29 Nov 2020 02:37 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अखिलेश वाजपेयी, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 29 Nov 2020 02:37 AM IST
सार
- हिंदुत्व व राष्ट्रवाद के सहारे ओवैसी के गढ़ में पैठ से संदेश
- नगर निगम चुनाव से 2023 के विधानसभा चुनाव पर भाजपा की नजर
विज्ञापन
योगी आदित्यनाथ...
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (जीएचएमसी) चुनाव में प्रचार के लिए गए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सभा में जिस तरह भीड़ उमड़ी और ‘आया-आया शेर आया’, ‘योगी-योगी जय श्रीराम’, और वंदेमातरम’ की गूंज हुई, उससे भाजपा को भी भरोसा हो चुका है कि वह योगी के जरिए ही मुस्लिम ध्रुवीकरण की राजनीति करने वालों को सटीक जवाब दे सकती है। योगी के काम, नाम, वेशभूषा और वाणी के सहारे तुष्टीकरण की राजनीति को जवाब देने की यह भाजपा की रणनीति है।
विज्ञापन
अन्य राज्यों की तरह हैदराबाद में भी योगी के स्वागत ने फिर बता दिया कि उनकी सभा उम्मीदवारों के लिए वोट मांगना भर नहीं है, बल्कि भाजपा की हिंदुत्व व राष्ट्रवाद के सहारे दक्षिण में पैर मजूबत करने की रणनीति का हिस्सा भी है। लोकसभा चुनाव में तेलंगाना में चार सीटों और उपचुनाव में विधानसभा की तेलंगाना राष्ट्रीय समिति (टीआरएस) की सीट पर कमल खिलने से उत्साहित भाजपा ने जीएचएमसी चुनाव के जरिये दक्षिण के राज्यों में 2023 के विधानसभा चुनाव के लिए पकड़ व पहुंच बढ़ाने की तैयारी की है। इसमें तेलंगाना व आंध्र प्रदेश के सामाजिक समीकरण में योगी का योगदान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
विज्ञापन
ये हैं समीकरण
तेलंगाना के वरिष्ठ पत्रकार हरपाल सिंह कहते हैं कि योगी आदित्यनाथ तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के दूरदराज इलाकों में भी हिंदुत्व की उम्मीदों का चेहरा बनते जा रहे हैं। लोगों को लगता है कि ये व्यक्ति मुस्लिम राजनीति करने वालों को सटीक जवाब दे सकता है। खासतौर से ओवैसी के भाषणों का योगी जिस तरह जवाब देते हैं उससे भी हिंदुओं के बीच उनकी लोकप्रियता बढ़ी है। जहां तक ओवैसी का सवाल है तो वे तेलंगाना में सिर्फ पुराने हैदराबाद इलाके में ही अच्छा प्रभाव रखते हैं। शेष में अब हिंदू स्वाभिमान व सम्मान का सवाल लोगों के बीच गंभीर चर्चा बनने लगा है। इसकी झलक इन नगर निगम चुनाव के प्रचार में दिख भी रही है। भाजपा ने शायद इसे ही वोटों में बदलने और ओवैसी की ताकत के गुब्बारे की हवा निकालने की तैयारी की है। इसमें योगी अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसका परीक्षण भाजपा ओवैसी के घर हैदराबाद नगर निगम चुनाव से कर रही है।
विज्ञापन
तेलंगाना में हिंदुत्व की थाह लेने की कोशिश
हरपाल की बातों से साफ लगता है कि भाजपा ने जीएचएमसी चुनाव को तेलंगाना में 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव का लिटमस टेस्ट मानते हुए बड़े चेहरों को मैदान में प्रचार के लिए उतारा है। योगी के सहारे कोशिश सिर्फ ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम का चुनाव जीतने की नहीं है, बल्कि इसके सहारे तेलंगाना में हिंदुत्व की धारा की गति नापने की भी कोशिश है। जिससे दक्षिण में पार्टी के विस्तार की संभावनाओं को जमीन पर उतारा जा सके। यही वजह है कि पहली बार किसी नगर निगम के चुनाव में राष्ट्रीय मुद्दे गूंज रहे हैं। भाजपा ने निजाम हैदराबाद की देश विरोधी नीति तक को मुद्दा बनाते हुए ओवैसी की राजनीति पर हमला बोला है तो ओवैसी की तरफ से नागरिकता संशोधन कानून और तीन तलाक जैसे मुद्दों के जरिए मुस्लिम ध्रुवीकरण की कोशिश हो रही है। दरअसल, दक्षिण में भाजपा के पास अभी सिर्फ कर्नाटक ही है। लेकिन जिस तरह लोकसभा चुनाव और उपचुनाव में तेलंगाना में भाजपा की उम्मीदें परवान चढ़ी हैं उससे भाजपा के रणनीतिकारों को लगता है कि ओवैसी को हैदराबाद में पटकनी देकर हिंदुत्व की राजनीति को और पुख्ता किया जा सकता है और तेलंगाना में 2023 में उम्मीदों का कमल खिलाया जा सकता है।
इसलिए भी योगी
तेलंगाना के सामाजिक ढांचे पर शोध कर रहे रूपेश पांडेय कहते हैं कि औवैसी के चलते योगी तेलंगाना की राजनीति में भाजपा के लिए तुरुप का पत्ता साबित हो सकते हैं। कारण गाय, मंदिर, अयोध्या की दिवाली, बरसाना की होली और काशी की देव दीपावली, सरयू आरती, मंदाकिनी आरती, चित्रकूट का विकास, कांवड़ यात्रा पर पुष्पवर्षा, लव जिहाद और धर्मांतरण पर कड़े तेवर जैसे अनेक कामों से योगी इस राज्य के हिंदुओं को भी लुभाने लगे हैं। गांवों में लोग उनकी चर्चा करते हैं। यूपी और बिहार के लोग बड़ी संख्या में हैदराबाद में भी रहते हैं। भाजपा भी शायद इसे समझ रही है। इसीलिए उसने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 की विदाई, तीन तलाक, नागरिकता संशोधन कानून जैसे मुद्दों को लेकर हिंदुत्ववादी छवि और तीखे तेवरों की राजनीति करने वाले अमित शाह के साथ योगी को भी मैदान में उतारकर भविष्य के लक्ष्य पर अभी से राजनीतिक निशाना साधने की कोशिश की है।