मास्टर प्लान से यूपी में अपनों की ताकत परखेगी भाजपा
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भाजपा ने संगठन चुनाव के बहाने विधानसभा चुनाव-2017 का रोडमैप बनाना शुरू कर दिया है। शीर्ष नेतृत्व ने संगठन चुनाव की प्रक्रिया में ग्राम पंचायत स्तर पर गठित होने वाली स्थानीय कमेटियों को बूथ स्तर तक कर दिया है।
अगर किसी ग्राम पंचायत में मतदान के लिए तीन बूथ हैं तो वहां अब तीन स्थानीय समितियां गठित होंगी। यह प्रक्रिया संगठन के नेताओं के लिए अग्निपरीक्षा जैसी है। छोटे से लेकर बड़े पदों पर बैठे सभी भाजपा नेताओं की सच्चाई इस चुनाव के जरिये सामने आ जाएगी।
इस कवायद से यह साफ हो जाता है कि वर्षों से एक बूथ 20 यूथ का नारा लगाते-लगाते थक जाने के बाद शीर्ष नेतृत्व ने भाजपा के लोगों को कामकाज में जुटाने के लिए यह बड़ा बदलाव किया है। साथ ही संगठन चुनाव के बहाने ही इस नारे को असलियत में बदलने की रणनीति बनाई है। स्थानीय समितियों को चार श्रेणियों में बांटकर चुनाव होंगे।
समितियों का स्वरूप अब गांव की आबादी के बजाय प्राथमिक सदस्यता के आधार पर तय किया गया है। पहली श्रेणी में 25 से 49 प्राथमिक सदस्य वाले बूथ, दूसरी में 50 से 149 सदस्य, तीसरी में 150 से 299 सदस्य और चौथी श्रेणी में 300 या इससे अधिक प्राथमिक सदस्यता वाले बूथों को रखा गया है।
इस तरह कराए जाएंगे चुनाव
पहली श्रेणी वाले बूथ की समिति पर एक अध्यक्ष और 12 सदस्य, दूसरी श्रेणी वाले बूथों पर एक अध्यक्ष और 18 सदस्य, तीसरी श्रेणी के बूथों पर एक अध्यक्ष और 24 सदस्य तथा चौथी श्रेणी वाले बूथों पर एक अध्यक्ष और 30 सदस्यों का चुनाव कराया जाएगा।
अध्यक्ष बाकी पदाधिकारियों को समितियों के सदस्यों से राय लेकर मनोनीत करेंगे। इनकी संख्या भी क्रमश: बढ़ती जाएगी। सभी श्रेणियों की समितियों में कम से कम एक तिहाई महिला होना जरूरी होगा।
अनुसूचित जाति के भी किसी व्यक्ति को समिति के सदस्यों में रखा जाएगा। इस तरह सभी श्रेणियों में क्रमश: 4, 6, 8 और 10 महिला सदस्यों की भागीदारी अनिवार्य हो गई है। पदाधिकारियों में भी महिलाओं को 33 प्रतिशत भागीदारी देने का फैसला किया गया है।
बड़बोले नेताओं पर लगाम लगाना है मकसद
इस सबके पीछे पार्टी के बड़बोले नेताओं पर लगाम कसने का मकसद भी है। शायद इसीलिए पार्टी ने छोटे-बड़े नेताओं को अपने-अपने बूथ पर अनिवार्य रूप से सदस्यता की जिम्मेदारी सौंपी थी। अब पार्टी नेता से संबंधित किसी बूथ पर अगर 25 प्राथमिक सदस्य भी नहीं बने होंगे तो वहां समिति का चुनाव नहीं हो पाएगा।
नेताओं के लिए भी यह तथ्य छिपाए रखना आसान नहीं होगा। भविष्य में किसी नेता की हैसियत तय करने में भी यह जानकारी फीडबैक का काम करेगी। प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक कहते हैं, कभी किसी बड़ी ग्राम पंचायत में अलग-अलग गांवों में बूथ बन जाते थे।
ऐसी स्थिति में भाजपा की स्थानीय समिति के लिए सभी जगह चुनाव प्रबंधन संभालना मुश्किल हो जाता था। नई विकेंद्रीकृत व्यवस्था से हर बूथ पर भाजपा को चुनाव प्रबंधन के लिए टीम मिल जाएगी।
प्रदेश में लगभग 1.40 लाख बूथ हैं। पार्टी ने इनमें से लगभग सवा लाख बूथों तक प्राथमिक सदस्यता का लक्ष्य पा लिया है। बूथों पर 20 नवंबर तक टीमें बन जाएंगी।