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यूपी भाजपाइयों की नजर फिर शाह-मोदी की जोड़ी पर

Sat, 27 Dec 2014 01:15 AM IST
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 27 Dec 2014 01:15 AM IST
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BJP member for legislative assembly.

विधान परिषद की एक सीट के लिए भाजपा में कई दावेदार सामने आ गए हैं। हाल एक अनार सौ बीमार जैसा है। हर दावेदार का अपना तर्क है। कई तो दिल्ली दरबार तक माथा टेक आए हैं। एकमात्र सीट के लिए पार्टी के भीतर खींचतान जबरदस्त है।

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भाजपा के विनोद पांडेय और बाबूराम एमकॉम का कार्यकाल 30 जनवरी को समाप्त हो रहा है। भाजपा के  विधायकों की संख्या 40 है। विधान परिषद की एक सीट के लिए कम से कम 33 वोट चाहिए। जाहिर है कि भाजपा सिर्फ एक व्यक्ति को ही विधान परिषद भेज सकती है।
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अपने-अपने समीकरण: कार्यकाल पूरा होने वाले सदस्यों में बाबूराम एमकॉम की उम्र काफी हो चुकी है। उनका स्वास्थ्य भी ठीक नहीं रहता है। जहां तक विनोद पांडेय की बात है तो पार्टी के अंदरूनी समीकरण उनके बारे में बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं बंधाते।
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हालांकि, इसके बावजूद उनके नाम को एकदम से खारिज नहीं किया जा सकता। उनके अलावा पार्टी के अन्य कई नेता भी टिकट पाने के दावे के साथ दिल्ली तक दौड़-भाग कर रहे हैं।

इनका दावा है सबसे मजबूत

BJP member for legislative assembly.

दावेदारों में पार्टी के प्रदेश महासचिव स्वतंत्र देव सिंह, प्रदेश उपाध्यक्ष शिव प्रताप शुक्ल, पश्चिम क्षेत्र के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह, प्रदेश मंत्री अश्विनी त्यागी व दयाशंकर सिंह के नाम शामिल हैं। हाल ही में पार्टी के प्रदेश महामंत्री पद से हटाए गए रामनाथ कोविद भी दावा ठोक रहे हैं।

भूपेंद्र सिंह के पक्ष में तर्क दिए जा रहे हैं कि पार्टी पश्चिम में जाट समीकरणों को ठीक करने के लिए उन्हें विधान परिषद में भेज सकती है। स्वतंत्र देव सिंह की लगातार संगठनात्मक सक्रियता और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से लेकर बड़े नेताओं तक के साथ रिश्तों को देखते हुए उनकी भी दावेदारी गंभीर मानी जा रही है। पिछड़े वर्ग का चेहरा होना भी उनके पक्ष में जा रहा है। लोकसभा चुनाव के दौरान वे नरेंद्र मोदी की रैलियों के प्रबंधक भी रहे हैं।

शिव प्रताप शुक्ल भी लंबे समय से संगठन में सक्रिय हैं। उन्होंने कई बार विधानसभा चुनाव के लिए टिकट मांगा। पर, चुनाव लड़ाने के बजाय उनसे संगठन का कामकाज लेने को तवज्जो दिया गया। जानकारी के मुताबिक प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी की सहमति भी उनके दावे को मजबूत बना रही है।

अंतिम फैसला मोदी व शाह पर

BJP member for legislative assembly.

जिस तरह अभी पिछले दिनों राज्यसभा के लिए पार्टी हाईकमान ने गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर परिकर को उत्तर प्रदेश से भेजा उसके चलते विधान परिषद के बारे में भी निश्चित रूप से कोई भविष्यवाणी नहीं की जा सकती।

बावजूद इसके प्रदेश के दावेदार अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते। कई दावेदार दिल्ली जाकर राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से तो कई प्रदेश प्रभारी ओम माथुर से मिल भी आए हैं।

सभी अपने-अपने तरीके से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोगों से भी तार जोड़े हुए हैं।

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