यूपी के धुरंधरों को भूली भाजपा, परदेसियों के हाथ कमान
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लोकसभा चुनाव का कुरुक्षेत्र यूपी बना हुआ है। यहां की लड़ाई के परिणाम पर देश की सत्ता का फैसला निर्भर दिख रहा है।
भाजपा आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है तो उसके विरोधी उसे रोकने की जी-तोड़ मेहनत में जुटे हैं।
पर, भाजपा की तरफ से कुरुक्षेत्र के मैदान का सारा दारोमदार परदेसियों के हवाले है।
पहले चरण में यूपी की 10 सीटों पर प्रदेश संगठन के अधिकतर पदाधिकारी प्रत्यक्ष तौर पर किसी महत्वपूर्ण भूमिका में नहीं दिखे। न व्यूह रचना में और न रणनीतिक फैसलों में।
दिल्ली से हो रहे हैं फैसले
उत्तर प्रदेश देश का ऐसा एकमात्र राज्य होगा जहां भाजपा की टीम इतनी बड़ी है। पर, अधिकांश पूरे चुनावी परिदृश्य से गायब से हैं।
जो दिख भी रहे हैं तो उनकी महत्वपूर्ण भूमिका नहीं सिर्फ निर्देशों का पालन करने वाली दिख रही है। यह तो साफ नहीं है कि प्रदेश पदाधिकारी लगे नहीं है या इन्हें लगाने की जरूरत नहीं समझी गई।
पर, चुनावी व्यूह रचना से इनकी दूरी कुछ और ही कहानी कहती है। टिकट तय होने के बाद से सारे फैसले दिल्ली से हो रहे हैं।
प्रदेश की चुनावी कमान विद्यार्थी परिषद से भेजे गए सुनील बंसल के हाथ है जो चुनाव से कुछ समय पहले ही यूपी भेजे गए।
वह सीधे प्रदेश प्रभारी अमित शाह को रिपोर्ट करते हैं। क्या कुछ हो रहा है और कौन आने-जाने वाला है, यह तक बताने वाला कोई नहीं।
यह है बानगी
इसकी एक बानगी पिछले दिनों स्मृति ईरानी के लखनऊ आगमन पर दिखी। जब भाजपा का कोई प्रवक्ता यह बताने की स्थिति में ही नहीं था कि ईरानी कब आएंगी और कहां रुकेंगी और उनका कार्यक्रम क्या है?
एक प्रवक्ता से बात की गई तो उन्होंने दिलचस्प तर्क दिया। कहा, गोपनीयता के चलते ईरानी का कार्यक्रम नहीं बताया जा रहा है।
दूसरी बानगी लालकृष्ण आडवाणी का लखनऊ आने का कार्यक्रम रहा। महानगर के लोगों को मालूम हो गया कि लालकृष्ण आडवाणी 17 अप्रैल को लखनऊ आ रहे हैं।
पर, प्रदेश के मीडिया प्रकोष्ठ को नहीं। नरेंद्र मोदी वाराणसी से चुनाव लड़ रहे हैं। पर, वह नामांकन कब दाखिल करेंगे, यह बताने में प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी भी असमर्थ हैं।
यह चेहरे चुनाव में बाकी विश्राम में
पदाधिकारियों की सूची में राजवीर सिंह राजू अपने पिता की विरासत संभालने के लिए एटा से चुनाव लड़ रहे हैं।
साध्वी निरंजन ज्योति भी फतेहपुर से चुनाव लड़ रही हैं। एक अन्य उपाध्यक्ष आशुतोष टंडन उर्फ गोपाल राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह का चुनाव लड़ा रहे हैं तो प्रदेश महामंत्री पंकज सिंह पुत्र के नाते पिता राजनाथ सिंह का चुनाव लड़ रहे हैं।
पर, शेष चेहरे कहां है, यह बताने वाला कोई नहीं। सूची में प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी के बाद सबसे पहला नाम उपाध्यक्ष के रूप में शिवप्रताप शुक्ल का है। शुक्ल संत कबीरनगर सीट से टिकट के दावेदार भी थे।
टिकट नहीं मिला तो प्रदेश कार्यालय पर सिमटकर रह गए। न पार्टी ने कहीं उन्हें लगाने की सोची और न वह खुद लगे। हरद्वार दूबे की भी कोई चुनावी भूमिका नहीं दिखती।
वह भी प्रदेश कार्यालय में ही एक कक्ष से दूसरे कक्ष तक सिमटकर रह गए हैं। अशोक कटारिया बिजनौर से टिकट के दावेदार थे। टिकट मिला नहीं और पार्टी ने चुनाव में कहीं लगाया नहीं। घर बैठे रहे। उपाध्यक्ष कृष्णा पासवान भी परिदृश्य से गायब हैं।
कहां हैं कोविद
पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं प्रदेश महामंत्री रामनाथ कोविद टिकट वितरण के पहले काफी सक्रिय दिख रहे थे। पर, अब परिदृश्य से गायब हैं।
कहां हैं के सवाल पर कहते हैं, ‘अभी तो स्वेच्छा से इधर-उधर जाकर पार्टी का काम कर रहा हूं। आगे वाराणसी व जौनपुर इलाके का दौरा करने का निश्चय किया है।’
एक अन्य महामंत्री देवेंद्र सिंह चौहान कानपुर में डॉ. जोशी का चुनाव लड़ा रहे हैं। पर, इसमें पार्टी का निर्णय नहीं उनकी अपनी इच्छा है। चौहान डॉ. जोशी के शिष्यवत हैं। जोशी के परिवार से उनके निजी रिश्ते हैं।
तीन को मिली कार्यालय की जिम्मेदारी
प्रदेश मंत्रियों की बात करें तो तीन लोगों अनुपमा जायसवाल, अनूप गुप्ता और समीर सिंह को कार्यालय पर रहने का निर्देश है।
शेष में अश्वनी त्यागी, कांता कर्दम, रामप्रताप सिंह, नीलिमा कटियार, बेबी रानी मौर्य की भूमिका के बारे में प्रदेश कार्यालय कुछ बताने की स्थिति में नहीं है।
सिर्फ एक रटा-रटाया सा जवाब कि सब अपने-अपने क्षेत्रों में लगे हुए हैं।