लालजी टंडन: मट्ठा पिलाये बिना जाने नहीं देते थे 'बाबूजी', उनके जैसा खाने-खिलाने का शौकीन नहीं मिलेगा
रामलीला में रावण बनने वाले और लंकेश नाम से चौक में पहचाने जाने वाले भाजपा नेता व पूर्व पार्षद विष्णु त्रिपाठी लंकेश वरिष्ठ भाजपा नेता व मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन के निधन पर भावुक होकर कहते हैं कि उनके जैसा खाने और खिलाने का शौकीन खोजे नहीं मिलेगा।
अमर उजाला से बातचीत में लंकेश ने बताया कि जब लालजी टंडन नगर विकास मंत्री थे तो अपने माल एवेन्यू स्थित आवास में उन्होंने दो देशी गाय पाल रखी थी। गाय के दूध का दही मट्ठा बनवाते, उनसे मिलने जाने वाले हर आदमी को बैठा कर बिना मट्ठा पिलाए हुए जाने नहीं देते।
मिलने वाला चाहे मोहल्ले का हो, पार्टी का हो, कोई अफ़सर नेता हो या बाहर से आया हुआ कोई और हो। मट्ठे के अलावा उनकी खास बनवाई हुई मट्ठी भी वह लोगों को खिलाते। यह मठिया वे अक्सर चौक के एक हलवाई कारीगर से खास तौर पर अपने बताएं नुस्खे मसालों से तैयार करवाते थे। शाम की उनकी चाय और मठ्ठी भाजपा नेताओं और उनसे मुलाकातियों के बीच काफी मशहूर थी।
'पान तो लाए ही होगे, लाओ दो जरा'
परिवर्तन चौक के अलावा चौक चौराहे में उनकी परिचित दुकानों से वह मघई पान खाना पसंद करते थे। मुझसे मिलते ही कहते कि पान तो लाए ही होगे, लाओ दो जरा। काजू की दालमोठ उन्हें बहुत पसंद थी।
राजनेताओं को क्या नहीं करना चाहिए पर अक्सर हम जब लोग उनसे सवाल पूछते तो वे बताते अगर नींद ना आए तो कभी नींद की गोली नहीं खानी चाहिए..! कुछ लोग समझ पाते, कुछ मतलब नहीं जान पाते।
1974 में भूमि भवन आंदोलन के दौरान उनके साथ 22 दिन तक आदर्श कारागार में हम बंद रहे। सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन करने में 144 धारा का उल्लंघन किया था और 133 लोग बन्द हुए थे।