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अफसरों पर मेहरबान भाजपा: दो साल में तीन आईपीएस अफसर BJP में हुए शामिल, दलितों को भी खास तवज्जो
Thu, 23 May 2024 02:22 PM IST
ishwar ashish
अशोक मिश्रा, अमर उजाला, लखनऊ
अशोक मिश्रा, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Thu, 23 May 2024 02:22 PM IST
सार
भाजपा दलित वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए ऐसे अफसरों को अपनी पार्टी में जगह दे रही है। हाल में ही डीजीपी के पद से सेवानिवृत्त विजय कुमार भी भाजपाई हो गए।
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भाजपा में शामिल हुए पूर्व आईपीएस प्रेम प्रकाश।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
चुनावी समर के दौरान यदि नौकरशाह सियासी दलों का दामन थामते हैं तो सबकी नजरें उन पर टिक जाती हैं। हालिया चुनाव में भी नौकरशाहों का सियासत में आने का सिलसिला जारी है। मंगलवार को सेवानिवृत्त आईपीएस प्रेम प्रकाश के भाजपा में शामिल होने से साफ हो गया कि यह चलन आगे और बढ़ेगा। दरअसल, बीते दो साल में प्रदेश के तीन आईपीएस अधिकारी भाजपा में शामिल हुए हैं। अफसर यदि दलित है तो पार्टी उसे खास तवज्जो दे रही है।
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गौरतलब है कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में मुंबई के पुलिस कमिश्नर रहे सत्यपाल सिंह ने भाजपा ज्वाइन की थी। इसके बाद वह सांसद और केंद्रीय मंत्री बने। इनके बाद वर्ष 2015 में यूपी से सेवानिवृत्त डीजीपी बृजलाल ने भी भाजपा से सियासी सफर की शुरुआत की और राज्यसभा सांसद बने। वहीं, वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में कानपुर के पुलिस कमिश्नर असीम अरुण ने वीआरएस लेने के बाद भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और वर्तमान में राज्य सरकार में समाज कल्याण मंत्री हैं।
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ईडी के ज्वाइंट डायरेक्टर रहे राजेश्वर सिंह ने भी वीआरएस लेकर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े और विधायक बने। हालिया लोकसभा चुनाव के दौरान डीजीपी के पद से सेवानिवृत्त हुए विजय कुमार ने भी अपनी पत्नी के साथ भाजपा की सदस्यता ग्रहण करके राजनीतिक सफर का आगाज किया।
रेरा व सूचना आयोग में भी अफसरों का समायोजन
राज्य सरकार ने सेवानिवृत्त हुए कई आईपीएस अफसरों को दोबारा सिस्टम में लाने की बड़ी पहल भी की। विजिलेंस डायरेक्टर के पद से सेवानिवृत्त भानु प्रताप सिंह को रेरा में सदस्य बनाया गया। इसी तरह डीजी इंटेलिजेंस के पद से सेवानिवृत्त भवेश कुमार सिंह और सेवानिवृत्त डीजीपी आरके विश्वकर्मा को सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर तैनात किया गया। सेवानिवृत्त आईपीएस सुबेश कुमार सिंह, सुधीर कुमार सिंह और गिरजेश कुमार चौधरी को भी सूचना आयोग में सूचना आयुक्त बनाया गया।
दलित वोट बैंक में सेंध की कवायद
भाजपा में दलित अफसरों की वाइल्ड कार्ड इंट्री का असली मकसद दलित वोट बैंक में सेंध माना जा रहा है। उदाहरण के तौर पर बृजलाल और प्रेम प्रकाश लंबे वक्त तक बसपा सरकार में अहम पदों पर रहने के दौरान दलितों को न्याय दिलाने की मुहिम चलाते रहे। दलित वोटरों के बीच उनकी लोकप्रियता को भांपकर ही भाजपा ने उन्हें तत्काल पार्टी में शामिल करने के साथ अहम पदों पर नियुक्त किया।
अन्य दलों में भी तवज्जो
सिर्फ भाजपा ही नहीं, बाकी दल भी अफसरों को तवज्जो दे रहे हैं। सेवानिवृत्त आईपीएस उमेश कुमार सिंह कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं तो हरीश कुमार बसपा में। प्रयागराज रेंज के आईजी केपी सिंह भाजपाई हो गए हैं। डीजी के पद से सेवानिवृत्त हुए आईपीएस सूर्य कुमार सिंह, बसपा सुप्रीमो मायावती के सुरक्षा अधिकारी रहे पदम सिंह भी भाजपा का हिस्सा बन चुके हैं। सेवानिवृत्त आईपीएस अरविंद सेन कम्युनिस्ट पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं।
अंतिम समय में बदला फैसला
हालिया लोकसभा चुनाव में फिरोजाबाद सीट से एक आईपीएस अधिकारी द्वारा वीआरएस लेकर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की खासी चर्चा रही लेकिन अंतिम वक्त पर यह मामला अधर में लटक गया। इसके जरिये भाजपा फिरोजाबाद और आसपास के जिले के यादव वोट बैंक में सेंध लगाने की रणनीति पर काम कर रही थी।