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भाजपा ने उम्मीदवार घोषित कर सभापति के पद पर भी लगाया दांव, आज दाखिल करेंगे नामांकन
Mon, 18 Jan 2021 02:37 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Mon, 18 Jan 2021 02:37 AM IST
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तमाम चर्चाओं के बीच भाजपा ने विधान परिषद के पूर्व उप सभापति, प्रोटेम व कार्यकारी सभापति रहे कुंवर मानवेंद्र सिंह को उम्मीदवार घोषित कर नए कयासों को जन्म दे दिया है। माना जा रहा है कि मानवेंद्र सिर्फ परिषद के उम्मीदवार भर नहीं है, बल्कि भविष्य में भाजपा की तरफ से सभापति के दावेदार भी होंगे। एक तरह से भाजपा ने उन्हें उम्मीदवार बनाकर सभापति के आसन पर कब्जा करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं।
दरअसल, 30 जनवरी को जिन सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है उनमें सपा के रमेश यादव भी शामिल हैं। रमेश ही इस समय विधान परिषद के सभापति हैं। रमेश का विधान परिषद सदस्य के तौर पर कार्यकाल खत्म होने के साथ ही स्वाभाविक तौर पर भाजपा की निगाहें सभापति के आसन पर हैं, ताकि सदन में विपक्ष की तरफ से सत्तापक्ष पर होने वाले हमलों की धार को कुछ कुंद किया जा सके। लेकिन जो परिस्थिति है उसमें प्रोटेम सभापति की परिस्थिति पैदा हो रही है। चुनाव उसके बाद ही हो पाएगा। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा की तरफ से प्रोटेम स्पीकर को लेकर क्या रणनीति अपनाई जाती है।
संभावना है कि भाजपा सदन के किसी मध्यम मार्गी व्यक्ति को प्रोटेम सभापति बनवाएगी। इसके बाद बहुमत की प्रतीक्षा करेगी। स्थानीय निकाय प्राधिकारी क्षेत्र के चुनाव होने के बाद जब सदन में भाजपा का बहुमत हो जाएगा तब वह चुनाव कराकर मानवेंद्र को पूर्णकालिक सभापति बनवाने की कोशिश करेगी। क्या कुछ होगा यह आने वाले दिनों में साफ होगा, लेकिन भाजपा ने इस बारे में संविधान और संसदीय नियमों व परंपराओं के जानकारों से विचार-विमर्श शुरू कर दिया है। जहां तक मानवेंद्र की बात है तो वह न सिर्फ अनुभवी और वरिष्ठ हैं, बल्कि सदन के संचालन में अपनी कुशलता साबित भी कर चुके हैं।
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दरअसल, 30 जनवरी को जिन सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है उनमें सपा के रमेश यादव भी शामिल हैं। रमेश ही इस समय विधान परिषद के सभापति हैं। रमेश का विधान परिषद सदस्य के तौर पर कार्यकाल खत्म होने के साथ ही स्वाभाविक तौर पर भाजपा की निगाहें सभापति के आसन पर हैं, ताकि सदन में विपक्ष की तरफ से सत्तापक्ष पर होने वाले हमलों की धार को कुछ कुंद किया जा सके। लेकिन जो परिस्थिति है उसमें प्रोटेम सभापति की परिस्थिति पैदा हो रही है। चुनाव उसके बाद ही हो पाएगा। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा की तरफ से प्रोटेम स्पीकर को लेकर क्या रणनीति अपनाई जाती है।
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संभावना है कि भाजपा सदन के किसी मध्यम मार्गी व्यक्ति को प्रोटेम सभापति बनवाएगी। इसके बाद बहुमत की प्रतीक्षा करेगी। स्थानीय निकाय प्राधिकारी क्षेत्र के चुनाव होने के बाद जब सदन में भाजपा का बहुमत हो जाएगा तब वह चुनाव कराकर मानवेंद्र को पूर्णकालिक सभापति बनवाने की कोशिश करेगी। क्या कुछ होगा यह आने वाले दिनों में साफ होगा, लेकिन भाजपा ने इस बारे में संविधान और संसदीय नियमों व परंपराओं के जानकारों से विचार-विमर्श शुरू कर दिया है। जहां तक मानवेंद्र की बात है तो वह न सिर्फ अनुभवी और वरिष्ठ हैं, बल्कि सदन के संचालन में अपनी कुशलता साबित भी कर चुके हैं।
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पंचायत चुनाव की व्यूह रचना पुख्ता बनाने में जुटी भाजपा
पंचायत चुनाव में परचम लहराने की कोशिश में जुटी भाजपा चुनावी व्यूह रचना को लगातार मजबूत बनाने में जुटी है। इस क्रम में अलग-अलग क्षेत्रों में मंत्रियों व पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपने के साथ जिलों में भी वहां के वरिष्ठ पदाधिकारियों, नेताओं के समूह गठित किए जा रहे हैं।
पंचायत चुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाकर मैदान में उतरी भाजपा ने संगठन व सरकार दोनों के समन्वय से चुनावी व्यूह रचना तैयार की है। प्रदेश सरकार में विधि एवं न्याय मंत्री ब्रजेश पाठक को पश्चिम क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पाठक के साथ पार्टी के प्रदेश मंत्री संजय राय को लगाया गया है। बृज क्षेत्र में पंचायती राज मंत्री भूपेंद्र चौधरी और सुभाष यदुवंश को, गोरखपुर में मंत्री रमाशंकर पटेल व प्रकाश पाल को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
यहां इनको जिम्मेदारी
कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य और पिछड़ा वर्ग वित्त विकास निगम के अध्यक्ष बाबू राम निषाद पर काशी क्षेत्र की जिम्मेदारी डाली गई है। अवध क्षेत्र की जिम्मेदारी कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और प्रदेश मंत्री शंकर लाल लोधी को सौंपी गई है। कानपुर की जिम्मेदारी जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह और प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह पर डाली गई है। क्षेत्रीय प्रभारी बनाए गए मंत्रियों और पदाधिकारियों को जिलों में संगठन के समूह बनाकर स्थानीय रणनीति बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन पर जिताऊ व टिकाऊ चेहरों के चयन की भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। पिछले चुनाव के आंकड़े जुटाने के साथ ही परिसीमन से आए बदलाव तथा भाजपा के लिए बनी संभावनाओं के मद्देनजर भी रिपोर्ट बनाने को कहा गया है।
पंचायत चुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाकर मैदान में उतरी भाजपा ने संगठन व सरकार दोनों के समन्वय से चुनावी व्यूह रचना तैयार की है। प्रदेश सरकार में विधि एवं न्याय मंत्री ब्रजेश पाठक को पश्चिम क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पाठक के साथ पार्टी के प्रदेश मंत्री संजय राय को लगाया गया है। बृज क्षेत्र में पंचायती राज मंत्री भूपेंद्र चौधरी और सुभाष यदुवंश को, गोरखपुर में मंत्री रमाशंकर पटेल व प्रकाश पाल को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
यहां इनको जिम्मेदारी
कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य और पिछड़ा वर्ग वित्त विकास निगम के अध्यक्ष बाबू राम निषाद पर काशी क्षेत्र की जिम्मेदारी डाली गई है। अवध क्षेत्र की जिम्मेदारी कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और प्रदेश मंत्री शंकर लाल लोधी को सौंपी गई है। कानपुर की जिम्मेदारी जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह और प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह पर डाली गई है। क्षेत्रीय प्रभारी बनाए गए मंत्रियों और पदाधिकारियों को जिलों में संगठन के समूह बनाकर स्थानीय रणनीति बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन पर जिताऊ व टिकाऊ चेहरों के चयन की भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। पिछले चुनाव के आंकड़े जुटाने के साथ ही परिसीमन से आए बदलाव तथा भाजपा के लिए बनी संभावनाओं के मद्देनजर भी रिपोर्ट बनाने को कहा गया है।
भाजपा उम्मीदवार सोमवार को दाखिल करेंगे नामांकन
विधान परिषद चुनाव में भाजपा के सभी दस उम्मीदवार सोमवार को नामांकन दाखिल करेंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश सरकार के मंत्री एवं भाजपा पदाधिकारी उपस्थित रहेंगे। अब तक केवल सपा के दो उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है। सोमवार को भाजपा के उम्मीदवार सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री के नेतृत्व में नामांकन दाखिल करने पार्टी मुख्यालय से रवाना होंगे। भाजपा प्रत्याशियों में उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, अरविंद कुमार शर्मा, लक्ष्मण आचार्य, गोविंद नारायण शुक्ला, कुंवर मानवेंद्र सिंह, सलिल विश्नोई, अश्वनी त्यागी, धर्मवीर प्रजापति और सुरेंद्र चौधरी शामिल हैं। परिषद की 12 सीटों के लिए हो रहे चुनाव के लिए 18 जनवरी को दोपहर 3 बजे तक नामांकन दाखिल किए जाएंगे। 19 जनवरी को नामांकन पत्रों की जांच होगी। उम्मीदवार 21 जनवरी तक नाम वापस ले सकेंगे।