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मिशन यूपी के लिए भाजपा का फॉर्मूला व फोकस तय, यहां देखें

Fri, 13 May 2016 02:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 13 May 2016 02:12 AM IST
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 BJP decided its plan for UP election.

मिशन 2017 की तैयारियों में जुटी भाजपा ने बूथ अभियान के सहारे वोटों का गणित साधने की भी तैयारी की है। इसके लिए सूबे में राजनाथ सिंह के नेतृत्व वाली सरकार के समय गठित सामाजिक न्याय समिति की किताब का सहारा लेने की योजना है।

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तय किया गया है कि बूथ संपर्क पर जाने वाले नेताओं को उस समिति की सिफारिशों का ब्योरा दिया जाए। साथ ही उन्हें समझाया जाए कि वे इस ब्योरे का हवाला देकर लोगों को देकर समझाएं कि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनेगी तो पिछड़ों व दलितों की सभी जातियों को आरक्षण का लाभ दिया जाएगा। मौजूदा कोटे का बंटवारा कर दिया जाएगा।
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राजनीतिक समीक्षकों के मुताबिक 2017 के चुनाव में पिछड़ों में यादव वोटों का ज्यादातर हिस्सा समाजवादी पार्टी को, दलितों में जाटव वोटों का अधिकांश हिस्सा क्रमश: सपा और बसपा के साथ ही रहने के आसार हैं। भाजपा के रणनीतिकार भी इस बात को जानते हैं।
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इसीलिए उनका फोकस गैर यादव पिछड़ों व गैर जाटव दलितों को अपने पक्ष में लामबंद करने की है। यह प्रयास सफल रहा तो भाजपा का सूबे में सरकार बनाने का सपना साकार हो सकता है।

ये है यूपी में जाति का गणित

 BJP decided its plan for UP election.
प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्य - फोटो : amar ujala

भाजपा का यह प्रयास यूं ही नहीं है। प्रदेश में 54 फीसदी पिछड़ों की आबादी में यादव लगभग 20 फीसदी ही हैं। अन्य बिरादरी में कुर्मी, लोध, मौर्य, तेली, तमोली, कुम्हार सहित अन्य कई नाम से जानी जाने वाली जातियां आती हैं।

इसी तरह दलितों की 22 फीसदी आबादी में जाटव लगभग 55 फीसदी हैं, जबकि 45 फीसदी हिस्सा पासी, खटिक, धानुक, वाल्मीकि सहित अन्य नाम से जानी जाने वाली जातियों का है।

रणनीतिकार जानते हैं कि किसी तरह अगर यह गैर यादव पिछड़ी और गैर जाटव दलित जातियां भाजपा के पक्ष में हो जाएं, तो भाजपा को चुनाव में काफी फायदा हो सकता है।

यह बना था फार्मूला

 BJP decided its plan for UP election.
गैर यादव पिछड़ों और गैर जाटव दलित जातियों को भाजपा की तत्कालीन सरकार के समय गठित सामाजिक न्याय समिति ने क्रमश: अति पिछड़ी और अति दलित जातियां नाम दिया था।

साथ ही पिछड़ों के 27 फीसदी और अनुसूचित जाति को मिलने वाले 21 फीसदी आरक्षण को सभी जातियों के बीच आबादी के आधार पर बांटने का फार्मूला तय किया था।

जिससे आरक्षण का लाभ पिछड़ों व दलितों की सभी जातियों को मिल सके। तब इसका असर भी दिखाई पड़ा था। अति पिछड़ी व अति दलित जातियों का रुझान भाजपा की तरफ देखा गया था।
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