यूपी उपचुनाव से जनता का रुख भांपने की कोशिश में भाजपा, पूरी ताकत झोंकी, युवाओं की टीम करेगी प्रचार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तर प्रदेश में 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले होने जा रहे सात सीटों के उपचुनाव को फतह करने के लिए सत्तारूढ़ भाजपा पूरी शिद्दत से जुटी है। ये उपचुनाव इस लिहाज से काफी अहम माने जा रहे हैं कि इससे प्रदेश में बह रही सियासी बयार का रुख पता चलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद उपचुनाव वाली सीटों के कार्यकर्ताओं से वर्चुअल संवाद करके जोश भरने में जुटे हैं तो पार्टी ने भी त्रिस्तरीय रणनीति बनाई है। हर बूथ पर बाइक व स्मार्ट फोन से लैस पांच-पांच युवाओं की टीम को प्रचार की कमान सौंपी गई है।
इन्हें सोशल मीडिया के जरिये माहौल बनाने के साथ वोटरों से सीधे संपर्क की जिम्मेदारी दी गई है। ये बूथ कार्यकर्ता मठ, मंदिर, आश्रम के पुजारियों व प्रमुखों के साथ-साथ सामाजिक संगठनों व एनजीओ से भी संपर्क साधेंगे। कोविड-19 के प्रकोप से इस बार का चुनाव बिल्कुल अलग तरह का है। मौजूदा हालात को देखते हुए भाजपा ने अपनी रणनीति भी बदली है। चूंकि इस बार बड़ी चुनावी सभाओं की गुंजाइश नहीं है, इसलिए वोटरों तक सीधे पहुंचने की रणनीति बनी है।
इसके तहत सरकार के मंत्री प्रशासन से जुड़े काम देखेंगे जबकि प्रदेश पदाधिकारियों को व्यवस्था संबंधी काम सौंपे गए हैं। क्षेत्रीय संगठन के लोग स्थानीय स्तर पर संगठन के काम की निगरानी करेंगे। हर बूथ पर बाइक व स्मार्ट फोन से लैस पांच युवाओं की टीम होगी जो जाति और वर्ग के आधार पर लोगों से सीधे संपर्क करेगी।
बूथ स्तर पर गठित युवाओं की टोलियां मतदाताओं के बीच केंद्र व प्रदेश सरकार की योजनाओं की जानकारी साझा करने के साथ ही लाभार्थियों के साथ सेल्फी लेकर उसे वायरल करेंगी। उपचुनाव वाले सभी विधानसभा क्षेत्रों में सोशल मीडिया टीम व्हाट्सएप के जरिये ज्यादा से ज्यादा लोगों तक सरकार व पार्टी का संदेश पहुंचाएगी।
ऐसे हुआ काम का बंटवारा
त्रिस्तरीय रणनीति के तहत मंत्रियों, प्रदेश पदाधिकारियों व क्षेत्र पदाधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारी सौंपी गई है। मंत्रियों को प्रशासनिक अधिकारियों, थानाध्यक्ष व पुलिस से जुड़े विषयों का समाधान कराने के साथ प्रतिष्ठित राजनीतिक व सामाजिक व्यक्तियों से संवाद व संपर्क करने की जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही उन्हें ग्राम प्रधान, बीडीसी, जिला पंचायत सदस्य, ब्लॉक प्रमुख, आंगनबाड़ी, आशा कार्यकर्ता, स्वयं सहायता समूह, राशन कोटेदार व अन्य लोगों के साथ बैठक करके योजना तैयार करने की जिम्मेदारी भी दी गई है।
प्रदेश पदाधिकारियों को चुनाव की व्यवस्था संबंधी जिम्मेदारी सौंपी गई है जो खास तौर पर क्षेत्र व जिलाध्यक्ष के बीच समन्वय बनाने, दूसरे दलों की स्थिति का आकलन करने, कार्यक्रमों व अभियानों के संचालन तथा सेक्टर, मंडल व विधानसभा क्षेत्र में सभाओं के आयोजन का काम संभालेंगे।
क्षेत्र पदाधिकारियों को चुनाव की संगठनात्मक रूपरेखा तैयार करने के साथ हर बूथ का व्हाट्सएप ग्रुप बनवाने, प्रत्येक बूथ पर पांच-पांच बाइक वाले कार्यकर्ताओं की सूची तैयार करने व बूथ प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।