यूपी में कभी नहीं चल सकता सत्ता का 'बिहार फॉर्मूला'
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पूर्व केंद्रीय मंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बेनी प्रसाद वर्मा ने कहा कि यूपी में बिहार फॉर्मूला नहीं चल पाएगा। यहां भाजपा के खिलाफ पूरा विपक्ष एकजुट नहीं हो सकता।
सपा व बसपा दोनों ही पार्टियों के नेता काफी महत्वाकांक्षी हैं। ऐसे में दोनों एकसाथ कभी नहीं आएंगे। वह गुरुवार को अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
बेनी वर्मा ने कहा कि कांग्रेस फिलहाल घर बैठकर सो गई है। यह स्थिति पार्टी के लिए अच्छी नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है तो उन्होंने कहा, इसके लिए प्रदेश के नेता ही जिम्मेदार हैं।
मैं कांग्रेस का सच्चा सिपाही
हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया। कहा, वह दिल्ली जा रहे हैं। वहां सोनिया व राहुल गांधी से मिल कर उन्हें स्थिति से अवगत कराएंगे।
बेनी ने एक बार फिर साफ किया कि उनकी सपा में जाने की अफवाह बार-बार उड़ा दी जाती है लेकिन न तो वे और न ही उनका बेटा सपा में जा रहे हैं। वे कांग्रेस के सच्चे सिपाही हैं, इसी पार्टी में रहकर राजनीति करेंगे।
कांग्रेस ने उन्हें काफी मान-सम्मान दिया है ऐसे में वह दूसरी जगह क्यों जाएंगे? उपचुनाव में प्रचार के प्रश्न पर उन्होंने कहा, जिस कांग्रेस प्रत्याशी को उनकी जरूरत होगी उसके लिए वे जरूर प्रचार करेंगे।
हालांकि कोशिश तो की गई...
गौरतलब है कि बिहार में भाजपा को रोकने के लिए लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार एक साथ आ गए हैं। राजद और जदयू के गठबंधन के बाद लालू ने मुलायम, माया से अपील की थी कि वह भी यूपी में भाजपा को रोकने के लिए एक साथ आ जाएं।
इस पर मुलायम सिंह ने मायावती की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया था लेकिन मायावती ने ऐसी किसी भी संभावना से इनकार कर दिया।
इस पर मायावती ने कहा था कि सपा-बसपा के गठजोड़ का सुझाव देने वाले लालू यादव के लिए सत्ता बड़ी चीज हो सकती है लेकिन हमारे लिए सत्ता से अधिक सम्मान बड़ा है। उन्होंने साफ कहा कि स्टेट गेस्ट हाउस कांड को बसपा नहीं भूल सकती।
दरअसल, उत्तर प्रदेश में अतीत की राजनीतिक परिस्थितियों और स्टेट गेस्ट हाउस की घटना के चलते मुलायम व सपा के रिश्तों में निजी स्तर पर तल्खी है, जिसके खत्म होने की संभावना दूर-दूर तक नहीं है।
किसी भी पार्टी से गठबंधन नहीं होगा
बसपा सुप्रीमो ने खुद सामने आकर कह दिया था कि उत्तर प्रदेश में सपा ही नहीं, किसी भी पार्टी से वे गठबंधन नहीं करेंगी। अकेले दम पर चुनाव लड़ेंगी।
राजनीतिक समीक्षकों की मानें तो मायावती की मुलायम सिंह यादव से रिश्तों की तल्खी को अगर अलग भी रख दें तो भी राजनीतिक स्तर पर सपा की बसपा से दोस्ती हो ही नहीं सकती।
यहां उस कहावत को लागू नहीं किया जा सकता कि राजनीति संभावनाओं का खेल है। मायावती ने यह कहकर ‘बसपा कार्यकर्ता स्टेट गेस्ट हाउस कांड को न भूलें’ बसपा के उन लोगों को भी चेतावनी दे दी है कि वे अपने दिमाग में किसी सहारे से सियासी नाव के पार होने का सपना देखना बंद कर दें।