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8.5 हजार एडमिशन, परीक्षा में बैठे 15 हजार
सचिन त्रिपाठी/लखनऊ
Updated Sun, 22 Sep 2013 01:58 PM IST
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मेरठ जोन की निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) में सत्र 2013 में साढ़े आठ हजार ज्यादा दाखिले नहीं हुए थे।
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सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के तहत राजस्थान की आशा देवी को दी गई सूचना में प्रशिक्षण एवं सेवायोजन निदेशालय ने यह बात स्वयं मानी है।
मेरठ जोन में जुलाई-2013 की वार्षिक परीक्षा में 15 हजार से ज्यादा छात्रों ने परीक्षा दी थी।
दोनों आंकड़ों में अंतर से यह बात साफ है कि परीक्षा में फर्जी परीक्षार्थी बैठे थे। इसके साथ ही पोर्टल की गड़बड़ी के कारण ओएमआर शीट भरवाने के उनके दावे पर भी सवाल उठ रहा है।
प्रदेश के बहुत से निजी आईटीआई से फर्जी परीक्षार्थियों के परीक्षा में शामिल होने की बात उठती रही है। प्रदेश के पश्चिमी जिलों में इसकी शिकायत सबसे ज्यादा आती है।
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आशा देवी ने मेरठ जोन की निजी आईटीआई में फरवरी-2011, अगस्त-2011 और फरवरी 2012 के लिए प्रवेश पाने वाले छात्रों का ब्यौरा आरटीआई के तहत मांगा था। प्रशिक्षण एवं सेवायोजन निदेशालय के निर्देश पर मेरठ मंडल के संयुक्त निदेशक ने 11 फरवरी को आशा को ब्यौरा भेजा था।
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इसके अनुसार जुलाई-2013 की परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की संख्या उस समय करीब साढ़े आठ हजार थी। इसके चार माह बाद जुलाई-2013 की परीक्षा में मेरठ जोन की प्राइवेट आईटीआई से 15 हजार छात्रों ने परीक्षा दी थी।
आईटीआई के ज्यादातर ट्रेड का प्रशिक्षण दो साल का होता है। महज चार माह में छात्रों की संख्या में इतना ज्यादा अंतर दिखाता है कि परीक्षा में फर्जी परीक्षार्थी बैठे थे।
परीक्षा में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए सत्र 2011 से सभी आईटीआई को उनके यहां पंजीकृत छात्रों का ब्यौरा पोर्टल पर फीड करना अनिवार्य किया गया था। जुलाई 2013 की वार्षिक परीक्षा के लिए फीडिंग की समय सीमा दिसंबर 2012 में ही समाप्त हो चुकी थी।
इसके बावजूद जून 2013 में परीक्षा से ठीक पहले पोर्टल गड़बड़ होने की बात कहकर सभी छात्रों से ओएमआर शीट पर परीक्षा फॉर्म भरवाए गए। आरटीआई के तहत दी सूचना में 11 फरवरी, 2013 तक ऐसी किसी गड़बड़ी की बात नहीं कही गई।
पोर्टल पर दर्ज छात्रों की संख्या को ही अंतिम मानते हुए विभाग ने आशा को सूचना दी थी। इसके बाद जून 2013 में अचानक पोर्टल गड़बड़ होने की बात कहकर ओएमआर शीट पर परीक्षा फॉर्म भरवा गए और दाखिले के मुकाबले साढ़े छह हजार ज्यादा छात्रों को परीक्षा दिलवा दी गई।
विभागीय अधिकारी खुद करेंगे अपनी जांच
आईटीआई की परीक्षा में शामिल हुए फर्जी परीक्षार्थियों की जांच का जिम्मा विभाग के ही अधिकारियों को सौंप दिया गया है। ज्यादातर वे ही अधिकारी हैं जो दाखिलों से लेकर परीक्षा तक के लिए खुद जिम्मेदार हैं।
अमर उजाला में ‘अगले साल के लिए पंजीकृत थे, इसी साल दे दी’ परीक्षा शीर्षक से खबर छपने के बाद शासन ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन कर दिया है।
विभाग से जुड़े अधिकारी जांच में कितना न्याय कर पाएंगे यह समय बताएगा, फिलहाल समिति को दो सप्ताह में जांच रिपोर्ट देने को कहा गया है। व्यवसायिक शिक्षा सचिव आलोक कुमार के निर्देश पर जांच समिति का गठन किया गया है।
व्यवसायिक परीक्षा निदेशक अनीता श्रीवास्तव की अध्यक्षता में गठित समिति में अपर निदेशक प्रशिक्षण राहुल देव और राजकीय आईटीआई अलीगंज के प्रधानाचार्य राजेंद्र प्रसाद शामिल हैं।
24 सितंबर को मेरठ जाएगी जांच टीम
निजी आईटीआई में फर्जी परीक्षार्थियों संबंधी जांच के लिए जांच समिति 24 सितंबर को मेरठ रवाना होगी। समिति को मेरठ मंडल के अंतर्गत आने वाले बुलंदशहर, गाजियाबाद आदि जिलों में स्थित आईटीआई की जांच करनी है।