यूपी: लखनऊ-दिल्ली हाईवे पर भ्रष्टाचार की मार, लागत 1000 करोड़ पार, सिर्फ 20 माह में बढ़ी 300 करोड़ लागत
लखनऊ दिल्ली हाइवे की लागत सिर्फ 20 महीने में ही 300 करोड़ रुपये बढ़ गई। इसके बाद भी काम पूरा होने के आसार अभी नहीं हैं। कंसल्टेंट ने 74 लाख रुपये लेकर एस्टीमेट तैयार किया था।
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सीतापुर होते हुए लखनऊ-दिल्ली हाईवे (एनएच-30) के निर्माण पर भ्रष्टाचार की जबर्दस्त मार पड़ी है। प्राइवेट कंसल्टेंट ने 74 लाख रुपये लेकर 157 किमी लंबी सड़क का एस्टीमेट तैयार किया था, पर 20 माह बाद ही बताया जा रहा है कि काम पूरा करने के लिए करीब 300 करोड़ रुपये अतिरिक्त चाहिए। मतलब, 697 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजना की लागत अब 1000 करोड़ रुपये से पार जाएगी। एनएचएआई के कुछ अफसर भी स्वीकार करते हैं कि इस परियोजना में बड़ी गड़बड़ियां हुई हैं। इसकी सच्चाई सामने लाने के लिए उच्चस्तरीय एजेंसी से जांच कराने की जरूरत है।
सीतापुर से बरेली के बीच हाईवे काफी जर्जर हालत में है। 11 साल पहले दिया गया निर्माण का कांट्रैक्ट वर्ष 2019 में रद्द किया गया। इसके बाद निर्माण पूरा करने के लिए दिल्ली के एक प्राइवेट कंसल्टेंट को एस्टीमेट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई। उसने इसे फोरलेन बनाने के लिए 800 करोड़ रुपये का एस्टीमेट बनाया। अक्तूबर, 2019 में यह काम लीडिंग पार्टनगर राज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आरसीएल) के ज्वाइंट वेंचर (जेवी) को 697 करोड़ की न्यूनतम बिड डालने पर दिया गया।
मार्च 2021 तक इस सड़क का निर्माण पूरा करना था, लेकिन अभी तक काम की प्रगति मात्र 37 प्रतिशत है। कोविड संकट के कारण दिसंबर तक का अतिरिक्त दिया गया है, लेकिन मौजूदा प्रगति और काम की धीमी रफ्तार के आधार पर विशेषज्ञ इंजीनियर का कहना है कि 2022 में भी इसके पूरा होने के कोई आसार नहीं हैं। इसी बीच लागत में वृद्धि (वैरिएशन) की तैयारी भी गुपचुप ढंग से की जा रही है। एनएचएआई सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल काम पूरा करने के लिए 300 करोड़ रुपये और मांगे जा रहे हैं। अहम सवाल यह भी है कि जब कंसल्टेंट को एस्टीमेट तैयार करने के लिए मोटी राशि दी गई थी, तो मात्र 20 माह में लागत में इतनी वृद्धि कैसे हो गई। इसके पीछे कहीं न कहीं बड़े खेल की आशंका जताई जा रही है।
ठेकेदार काली सूची में, फिर भी नहीं कसी लगाम
अक्तूबर 2019 में जिस जेवी को सीतापुर-बरेली के बीच एनएच-30 के हिस्से को बनाने की जिम्मेदारी दी गई, उसी के लीडिंग पार्टनर राज कॉर्पोरेशन लिमिटेड को एनएचएई ने 11 सितंबर 2020 को दो साल के लिए काली सूची में डाल दिया। बताते हैं कि टेंडर में गलत डॉक्युमेंट लगाने का मामला पकड़ में आने पर यह कार्रवाई की गई। ऐसी हालत में माहवार लक्ष्य तय करके काम कराना चाहिए था, जोकि नहीं हुआ।
एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी अब्दुल बासित का कहना है कि हम इस प्रोजेक्ट की रोजाना समीक्षा कर रहे हैं। लागत बढ़ने की बात सही है, पर यह कितना है, अभी बता पाने की स्थिति में नहीं हूं। काम में तेजी लाने के लिए नए प्रोजेक्ट डायरेक्टर की तैनाती की गई है। अगर लागत में वृद्धि होती है, तो जिन आईटम के कारण यह वृद्धि होगी, वो काम मौजूदा कांट्रैक्टर से नहीं कराए जाएंगे।