अखिलेश यादव ने लिए आपके हित से जुड़े कई बड़े फैसले
जिला पंचायत अध्यक्षों को पहले की तरह समूह ‘ग’ के पदों पर भर्ती का अधिकार फिर से दे दिया गया है। प्रदेश कैबिनेट ने इसके लिए जिला पंचायत में अकेंद्रीय संवर्ग के समूह ‘ग’ के पदों को अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के दायरे से बाहर करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
पंचायतीराज विभाग के एक वरिष्ठ अधिकरी ने बताया कि पिछले साल सरकार ने समूह ‘ग’ के पदों पर भर्ती के लिए अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का गठन किया था।
आयोग के गठन के पहले जिला पंचायतों के स्टेनो, बाबू, कंप्यूटर आपरेटर, एकाउंटेंट जैसे पदों की नियुक्ति जिला पंचायत अध्यक्ष करते थे। आयोग के गठन की वजह से जिला पंचायत अध्यक्षों की यह अहम जिम्मेदारी आयोग के पास चली गई थी।
जिला पंचायतों के अध्यक्ष सरकार से इन नियुक्तियों का अधिकार मांग रहे थे।पंचायतीराज विभाग ने जिला पंचायतों के अकेंद्रीयत सेवा के पदों को आयोग के दायरे से बाहर निकालने की अनुमति देने का प्रस्ताव किया था।
प्रदेश कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसी के साथ जिला पंचायत अध्यक्षों के पास यह अहम अधिकार फिर से वापस आ गए हैं।
गरीब छात्रों को मदद देगी सरकार
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का कहना है कि राज्य सरकार आईआईटी में चयनित गरीब छात्रों की पूरी मदद करेगी। उन्होंने ऐसे छात्रों के बारे में जानकारी सामने लाने के लिए मीडिया की तारीफ भी की।
मंगलवार को कैबिनेट की बैठक के बाद पत्रकारों से रू-ब-रू मुख्यमंत्री ने कहा कि आईआईटी में चुने गए गरीब प्रतिभाशाली छात्रों की जानकारी सामने लाने में मीडिया की काफी अहम भूमिका रही है। मीडिया के जरिये जहां भी गरीब छात्रों के बारे में जानकारी मिलेगी, सरकार उनकी पूरी मदद करेगी।
सोलर पंपों के वितरण के सवाल पर कहा कि योजना फ्लाप नहीं हुई है। पंप बंटने में देरी क्यों हुई इसे दिखवाया जाएगा। इस योजना के लिए अभी तक सीमित बजट ही था। अब ऑनलाइन सिस्टम लागू करने जा रहे हैं ताकि पता चल सके कि कितने लोग सोलर पंप चाहते हैं।
उसी के हिसाब से बजट की व्यवस्था की जाएगी। इस साल 5000 सोलर पंप बांटने का लक्ष्य है। कानून-व्यवस्था के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा, घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई की जा रही है।
टोरेंट पावर को सौंपने का करार रद्द
राज्य सरकार ने कानपुर की बिजली व्यवस्था निजी कंपनी टोरेंट पावर को सौंपने का करार रद्द कर दिया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में टोरेंट के साथ 18 मई 2009 को किए गए करार को निरस्त करने संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।
सरकार के इस फैसले से कानपुर इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कंपनी (केस्को) के निजीकरण की कार्यवाही फिलहाल टल गई है।
मायावती के शासनकाल में कानपुर की बिजली व्यवस्था टोरेंट पावर को सौंपने का फैसला हुआ था। करार के छह साल बाद भी केस्को को टोरेंट पावर को हस्तांतरित नहीं किया जा सका।
जानकारों का कहना है कि भारी घाटे की वजह से केस्को को निजी हाथों में सौंपने का फैसला किया गया था लेकिन इस बीच राजस्व और आधारभूत आंकड़ों में भी काफी बदलाव आ गया। इसके मद्देनजर पिछले 27 दिसंबर को दोनों पक्षों के बीच हुई बैठक में करार को निरस्त करने पर सहमति बन गई थी।
बदल गया लखनऊ के चिड़ियाघर का नाम
कैबिनेट ने लखनऊ के चिड़ियाघर का नाम बदल दिया है। अब इसे ‘नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान के नाम से जाना जाएगा।
लखनऊ प्राणि उद्यान की स्थापना वर्ष 1921 में इंग्लैण्ड के राजकुमार प्रिंस ऑफ वेल्स के लखनऊ आगमन के अवसर पर करते हुए इसका नाम प्रिंस ऑफ वेल्स जूलोजिकल गार्डेन्स रखा गया था। 04 जून, 2001 को इसका नाम परिवर्तित कर लखनऊ प्राणि उद्यान किया गया था।
लखनऊ के अलावा नवाबगंज पक्षी बिहार का नाम भी बदल दिया गया है। चन्द्रशेखर आजाद के नाम पर नवाबगंज पक्षी विहार का नाम परिवर्तित कर ‘शहीद चन्द्रशेखर आजाद पक्षी विहार, नवाबगंज’ उन्नाव रखने का निर्णय लिया है।
शहीद चन्द्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई, 1906 को मध्यप्रदेश के अलीराजपुर जनपद के भवरा ग्राम में हुआ था।