जानिए,दिवाली पूजन के लिए कौनसा मुहूर्त सबसे शुभ है?
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दीपावली पर बुधवार को धन और ऐश्वर्य की देवी महालक्ष्मी के पूजने के लिए शाम 5:26 बजे से 7:23 बजे तक पूजन करने का मुहूर्त सबसे शुभ है। इस समय लक्ष्मीकारक स्थिर वृष लग्न होने के कारण पूजन करना गृहस्थों के साथ ही व्यापारियों के लिए फलदायी होगा।
ज्योतिषियों के मुताबिक शाम की इस लग्न के अलावा दोपहर और देर रात की अन्य लग्नों में भी पूजन करना श्रेयस्कर रहेगा। वहीं अरसे बाद अमावस्या का मान 24 घंटों से अधिक समय तक मिलने के कारण पूजन विशेष फलदायी रहेगा।
महानगर निवासी आचार्य प्रदीप ने बताया कि मंगलवार रात 8:43 बजे के बाद से अमावस्या लग गई, जो कि बुधवार रात 10:29 बजे तक रहेगी। उन्होंने बताया कि दीपावली पर गणेश-लक्ष्मी और कुबेर के पूजन के लिए शाम को स्थिर वृष लग्न में शाम 5:26 बजे से 7:23 बजे तक पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त है।
इस लग्न में घरों में गृहस्थों और प्रतिष्ठानों में व्यापारियों का पूजन करना उत्तम रहेगा। इसके अलावा दोपहर में 12:49 से 02:20 बजे तक स्थिर कुंभ लग्न में भी पूजन किया जा सकेगा।
उन्होंने बताया कि जो भी व्यापारी शाम को लग्न में पूजा करने से चूक जाएं तो वे देर रात स्थिर सिंह लग्न में भी रात 11:55 से 2:08 बजे बजे तक महालक्ष्मी का पूजन कर सकते हैं। ज्योतिषाचार्य के मुताबिक दीपावली पर चंद्रमा-सूर्य का योग होने के चलते ही महालक्ष्मी रात्रि विचरण करने के लिए धरा पर आती है।
लग्नसमय
वृश्चिक लग्नसुबह 6:41 बजे से 8:48 बजे तक।
कुंभ लग्नदोपहर 12:49 बजे से 02:20 बजे तक।
वृष लग्नशाम 05:26 बजे से शाम 07:23 बजे तक। सिंह लग्नरात 11:55 बजे से रात 02:08 बजे तक।
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक प्रतिष्ठान चलाने वाले व्यापारी शुभ मूहूर्त लग्न के अलावा सूर्यास्त के समय गोधूलि बेला में भी पूजन कर सकते हैं। सूर्यास्त के समय से एक घड़ी पहले (24 मिनट) और सूर्यास्त के एक घड़ी बाद के समय में भी पूजन करना श्रेयस्कर रहेगा।
ऐसे करें दिवाली की पूजा
•चौकी पर लक्ष्मी-गणेश की स्थापना पूर्व या पश्चिम दिशा की ओर मुख कर करें।
•लक्ष्मी प्रतिमा को गणेशजी के दाहिने और वरुणदेव के प्रतीक कलश को मां लक्ष्मी के पास ही चावलों पर ही स्थापित करें।
•तेल और गौ घृत के दो दीपक जलाएं और उन्हें लक्ष्मी प्रतिमा-कलश के पास स्थापित करें।
•मां के आह्वाहन के साथ ही दोनों ही प्रतिमाओं का स्नान करें-आचमन करें। लाल रंग के नववस्त्रों, कमल पुष्प से सुसज्जित करें। पंचगव्य (दुग्ध, दधि, मधु, गंगाजल और शर्करा) का भोग लगायें या मधुपर्क (दूध-दही-मधु) का भोग चांदी के पात्र में लगाएं।
•पूजन केदौरान ‘ऊं भूर्भव: स्व: महालक्ष्मयै नम:’ के उच्चारण के साथ ही मां लक्ष्मी को वस्तुएं अर्पित करें।
•षोडशोपचार पूजन और आरती के बाद चूरा, खील, बताशे, लईय्या, गट्टे, सफेद मिष्ठान्न और मौसमी फल (विशेषकर अनार) चढ़ायें।
•व्यापारी बंधु पूजन के समय अपने बही-खातों के साथ सिक्कों की थैली-तिजोरी की चाभियां भी पूजन के स्थान पर रखकर पूजन करें तो उत्तम रहेगा।
यह रहेगा प्रतिबंध
•रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक पटाखे नहीं फोड़े जा सकेंगे
•शांत क्षेत्र जैसे अस्पताल, धर्मस्थल के 100 मीटर दायरे में आतिशबाजी नहीं
•125 डेसीबल से कम के पटाखे ही मान्य
•चाइनीज पटाखे पूरी तरह प्रतिबंधित