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Lucknow News: सावधान...उन दिनों से पहले बढ़ जाता है रक्तचाप
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लखनऊ। माहवारी शुरू होने से ठीक पहले की अवधि में स्वस्थ महिलाओं का रक्तचाप (बीपी) सामान्य के मुकाबले काफी बढ़ जाता है। इसलिए महिलाओं को उच्च रक्तचाप की जांच और निदान में इसे ध्यान में रखना चाहिए। किंग जाॅर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के फिजियोलाॅजी विभाग में हुए अध्ययन में यह निष्कर्ष सामने आया है। यह इंटरनेशनल जर्नल ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड रिसर्च में प्रकाशित हुआ है।
यह अध्ययन डाॅ. श्वेता सिंह, डाॅ. मनीष बाजपेयी, डाॅ. श्रद्धा सिंह और डाॅ. अर्चना घिल्डियाल ने किया है। अध्ययन में 18 से 35 साल उम्र की 30 महिलाओं को शामिल किया गया। इन सभी का बीपी मासिक चक्र के दाैरान मापा गया। ये सभी स्वस्थ महिलाएं थीं और उनको किसी प्रकार की दवाएं नहीं दी जा रही थी। इसमें देखा गया कि माहवारी से ठीक पहले की अवधि में बीपी सबसे ज्यादा था। उच्च रक्तचाप के लिए अलग-अलग कारण जिम्मेदार होते हैं। हाॅर्मोन में बदलाव भी इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं।
माहवारी के दाैरान कम रही धड़कन
अध्ययन के दाैरान महिलाओं में दिल की धड़कन भी कम दिखाई दी। इसमें देखा गया कि माहवारी की अवधि में औसत दिल की धड़कन 80.41, माहवारी से बाद की अवधि में 84.90 और माहवारी से ठीक पहले की अवधि में दिल की धड़कन 84.02 दर्ज की गई।
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औसत बीपी- माहवारी अवधि- माहवारी के बाद- माहवारी से पूर्व
बीपी का न्यूनतम स्तर- 78.03- 79.91-89.58
बीपी का अधिकतम स्तर- 103.79-105.41-124.13
हर छठे व्यक्ति को बीपी की समस्या
हाइपरटेंशन सोसाइटी ऑफ इंडिया के अध्ययन के मुताबिक देश के हर छठे व्यक्ति को बीपी की समस्या है, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। बीपी के मरीजों को लेकर देशभर के सौ सेंटर 15 हजार से ज्यादा लोगों की जांच कराई थी। इसमें पाया गया कि 16.4 फीसदी आबादी को पता ही नहीं था कि उनको बीपी की समस्या है। इनमें महिलाओं के मुकाबले पुरुषों की संख्या ज्यादा रही। यह अध्ययन यूरोपियन हार्ट जर्नल में प्रकाशित किया गया।
आहार-विहार से नियंत्रित रहता है रक्तचाप
राजकीय आयुर्वेद कॉलेज के डॉ. धर्मेंद्र के मुताबिक आयुर्वेद में उच्च रक्तचाप को मुख्य रूप से आहार-विहार से जोड़ा गया है। बीपी को नियंत्रित रखने से सबसे पहले जीवनशैली में सुधार करने की सलाह दी जाती है। सुबह जल्दी उठने, योग और व्यायाम करने, रात में जल्दी भोजन करने और तनाव को दूर रखकर बीपी को नियंत्रित रखा जा सकता है।
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यह अध्ययन डाॅ. श्वेता सिंह, डाॅ. मनीष बाजपेयी, डाॅ. श्रद्धा सिंह और डाॅ. अर्चना घिल्डियाल ने किया है। अध्ययन में 18 से 35 साल उम्र की 30 महिलाओं को शामिल किया गया। इन सभी का बीपी मासिक चक्र के दाैरान मापा गया। ये सभी स्वस्थ महिलाएं थीं और उनको किसी प्रकार की दवाएं नहीं दी जा रही थी। इसमें देखा गया कि माहवारी से ठीक पहले की अवधि में बीपी सबसे ज्यादा था। उच्च रक्तचाप के लिए अलग-अलग कारण जिम्मेदार होते हैं। हाॅर्मोन में बदलाव भी इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं।
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माहवारी के दाैरान कम रही धड़कन
अध्ययन के दाैरान महिलाओं में दिल की धड़कन भी कम दिखाई दी। इसमें देखा गया कि माहवारी की अवधि में औसत दिल की धड़कन 80.41, माहवारी से बाद की अवधि में 84.90 और माहवारी से ठीक पहले की अवधि में दिल की धड़कन 84.02 दर्ज की गई।
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औसत बीपी- माहवारी अवधि- माहवारी के बाद- माहवारी से पूर्व
बीपी का न्यूनतम स्तर- 78.03- 79.91-89.58
बीपी का अधिकतम स्तर- 103.79-105.41-124.13
हर छठे व्यक्ति को बीपी की समस्या
हाइपरटेंशन सोसाइटी ऑफ इंडिया के अध्ययन के मुताबिक देश के हर छठे व्यक्ति को बीपी की समस्या है, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। बीपी के मरीजों को लेकर देशभर के सौ सेंटर 15 हजार से ज्यादा लोगों की जांच कराई थी। इसमें पाया गया कि 16.4 फीसदी आबादी को पता ही नहीं था कि उनको बीपी की समस्या है। इनमें महिलाओं के मुकाबले पुरुषों की संख्या ज्यादा रही। यह अध्ययन यूरोपियन हार्ट जर्नल में प्रकाशित किया गया।
आहार-विहार से नियंत्रित रहता है रक्तचाप
राजकीय आयुर्वेद कॉलेज के डॉ. धर्मेंद्र के मुताबिक आयुर्वेद में उच्च रक्तचाप को मुख्य रूप से आहार-विहार से जोड़ा गया है। बीपी को नियंत्रित रखने से सबसे पहले जीवनशैली में सुधार करने की सलाह दी जाती है। सुबह जल्दी उठने, योग और व्यायाम करने, रात में जल्दी भोजन करने और तनाव को दूर रखकर बीपी को नियंत्रित रखा जा सकता है।