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Lucknow News: लगातार खांसी, थकान व सांस लेने में दिक्कत होने पर हो जाएं सतर्क
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प्रतीकात्मक।
लखनऊ। केजीएमयू के पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. वेद प्रकाश ने चेतावनी दी है कि फेफड़ों का कैंसर साइलेंट किलर की तरह शरीर पर हमला करता है। शुरुआती चरणों में स्पष्ट लक्षण न दिखने के कारण अधिकांश मरीज तब डॉक्टर के पास पहुंचते हैं, जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है। हालांकि, उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि आधुनिक जांच और उन्नत चिकित्सा तकनीकों से अब इस बीमारी पर काबू पाना पहले से कहीं अधिक आसान हो गया है।
शताब्दी भवन प्रेक्षागृह में आयोजित एआईपीकॉन-2026 में डॉ. वेद प्रकाश ने बताया कि देश में फेफड़े के कैंसर के मामले चिंताजनक रूप से बढ़ रहे हैं। लगातार खांसी, थकान, सांस फूलना या बार-बार होने वाला संक्रमण इसके संकेत हो सकते हैं, लेकिन लोग अक्सर इसे सामान्य सर्दी-जुकाम या स्मोकिंग का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
डॉ. वेद प्रकाश के अनुसार, शुरुआत में ट्यूमर छोटा होने के कारण लक्षण नहीं दिखते, लेकिन गंभीर स्थिति होने पर बलगम में खून आना और सीने में तेज दर्द जैसे लक्षण उभरते हैं। दिल्ली स्थित पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट के पूर्व निदेशक डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि समय पर सीटी स्कैन, बायोप्सी और लेटेस्ट इमेजिंग तकनीकों के जरिए रोग की पहचान कर सटीक इलाज शुरू किया जा सकता है।
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ऐसे कर सकते हैं बचाव
-धूम्रपान के लती और प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले नियमित फेफड़ों की जांच कराएं
-जीवनशैली में बदलाव लाएं
-धूम्रपान और तंबाकू से तौबा करें
-संतुलित आहार लें
-प्रदूषण से बचाव करें।
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शताब्दी भवन प्रेक्षागृह में आयोजित एआईपीकॉन-2026 में डॉ. वेद प्रकाश ने बताया कि देश में फेफड़े के कैंसर के मामले चिंताजनक रूप से बढ़ रहे हैं। लगातार खांसी, थकान, सांस फूलना या बार-बार होने वाला संक्रमण इसके संकेत हो सकते हैं, लेकिन लोग अक्सर इसे सामान्य सर्दी-जुकाम या स्मोकिंग का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
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डॉ. वेद प्रकाश के अनुसार, शुरुआत में ट्यूमर छोटा होने के कारण लक्षण नहीं दिखते, लेकिन गंभीर स्थिति होने पर बलगम में खून आना और सीने में तेज दर्द जैसे लक्षण उभरते हैं। दिल्ली स्थित पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट के पूर्व निदेशक डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि समय पर सीटी स्कैन, बायोप्सी और लेटेस्ट इमेजिंग तकनीकों के जरिए रोग की पहचान कर सटीक इलाज शुरू किया जा सकता है।
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ऐसे कर सकते हैं बचाव
-धूम्रपान के लती और प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले नियमित फेफड़ों की जांच कराएं
-जीवनशैली में बदलाव लाएं
-धूम्रपान और तंबाकू से तौबा करें
-संतुलित आहार लें
-प्रदूषण से बचाव करें।