बाराबंकी: सवा दो लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद उफनाई घाघरा, तीन गांवों में घुसा पानी
बाढ़ से बचाव के लिए ग्रामीणों का पलायन तेज
नेपाल तीन दिनों में छोड़ चुका है 6 लाख 75 हजार क्यूसेक पानी
एडीएम के आदेश पर एसडीएम ने तटबंध का लिया जायजा
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वहीं नदी का पानी तराई के तीन गांवों में पूरी तरह से पहुंच जाने के बाद यहां के लोगों ने सुरक्षित स्थानों के लिए पलायन शुरू कर दिया है। अपर जिलाधिकारी के आदेश के बाद एसडीएम सिरौलीगौसपुर ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर तटबंध पर रह रहे लोगों से बात कर उनका हाल जाना।
कंट्रोल रुम के मुताबिक, मंगलवार को नेपाल द्वारा सवा दो लाख क्यूसेक पानी नदी में छोड़ जाने के बाद घाघरा नदी का पानी खतरे के निशान 106.076 को पार कर 106.096 पर पहुंच गया है। क्योंकि नेपाल पिछले तीन दिनों से घाघरा नदी में लगातार पानी छोड़ रहा है और अब तक वह करीब 6 लाख 75 हजार क्यूसेक पानी छोड़ चुका है। जिससे नदी का पानी लगातार बढ़ता ही जा रहा है। जिससे तराई के हालात और बिगड़ने लगे हैं।
नेपाली पानी तराई के तीन गांवों, सरायं सुरजन, बधौली पुरवा और तेलवारी में भर जाने की वजह से यहां के लोगों ने सुरक्षित स्थानों के लिए पलायन भी शुरू कर दिया है। वहीं गांवों को जोड़ने वाले मार्गों पर पानी भर जाने के कारण लोगों को आवागमन में दिक्कतें होने लगी हैं।
इसके बाद भी लोग परिजनों और मवेशियों के साथ सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने लगे हैं। वहीं कई परिवारों ने अलीनगर रानीमऊ तटंबध पर डेरा डाल दिया है। जानकारी मिलने के बाद अपर जिलाधिकारी ने स्थिति का जायजा लेने के लिए एसडीएम सिरौलीगौसपुर को मौके पर भेजा है।
घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। नदी का पानी लगातार बढ़ रहा है। इससे तराई क्षेत्र में बाढ़ से प्रभावित होने वाले गांवों के लोगों को गांव खाली करने के लिए कहा गया है। वहीं जानकारी मिलने के बाद मंगलवार को एसडीएम सिरौलीगौसपुर को मौके पर जांच के लिए भेजा गया है। तटबंध पर जो लगे रह रहे हैं यदि उन्हें कोई दिक्कत होगी तो उनकी समस्या का तुरंत निराकरण कराया जाएगा।
संदीप कुमार गुप्ता, अपर जिलाधिकारी
गोंडा : खतरे के निशान से तीन सेमी. ऊपर घाघरा, 35 हजार आबादी बेघर
करनैलगंज तहसील के नदी के तटवर्ती व बांध के किनारे बसे गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। परसावल, बेहटा, नएपुरवा, कमियार, माझा रायपुर, बहुवन माझा दक्षिणी, नकहरा आंशिक बाढ़ की चपेट में हैं। इन गांवों की करीब 35 हजार की आबादी बाढ़ की समस्या से घिर गई है। बड़ी संख्या में लोग परसावल व कमियार के स्कूलों में तो रुके ही हैं बांध पर भी अपना ठिकाना बना लिया है।
बड़ी संख्या में लोग अभी भी सुरक्षित स्थानों की तलाश कर रहे हैं तो गांवों में भी काफी लोग रुके हुए हैं। प्रशासन बाढ़ चौकियों को सतर्क तो कर दिया है लेकिन अभी पर्याप्त सुविधा नहीं हो पाई है। लोगों को खाने-पीने के सामानों के लिए इंतजाम करना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि तहसील प्रशासन अभी बाढ़ के स्थिति की निगरानी कर रहा है। प्रशासन का मानना है कि अभी जलस्तर इस स्थिति में नहीं है कि घरों को नुकसान कर सके।
वहीं बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि पानी भर जाने से गांवों में रुकना संभव नहीं है। ऊंचे स्थानों पर ही व्यवस्था की जानी चाहिए। भोजन का इंतजाम कर पाना संभव नहीं हो पा रहा है। इस तरह 35 हजार की आबादी के सामने कई तरह की समस्या शुरू हो गई हैं। बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मचारियों ने बाढ़ की स्थिति पर नजर तो रखनी शुरू कर दी है लेकिन प्रभावितों तक मदद पहुंचाने में पसीने छूट रहे हैं।