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स्वरोजगार के सपने में अड़ंगा लगा रही बैंकों की मनमानी

Sun, 11 Oct 2020 01:24 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 11 Oct 2020 01:24 AM IST
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Banks arbitrary in self-employment
स्वरोजगार के सपने में अड़ंगा लगा रही बैंकों की मनमानी
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ज्ञान सक्सेना
लॉकडाउन में गाजियाबाद से प्राइवेट नौकरी छोड़ कर आए वृंदावन कॉलोनी निवासी माधवन ने पीएम रोजगार सृजन योजना के तहत प्लास्टिक बोतल बनाने की यूनिट लगाने को मई में 25 लाख के ऋण का आवेदन किया था। यह स्वीकृत होने के बाद भी वह बैंक के चक्कर काट रहे हैं।
जानकीपुरम के अभिषेक विपुल ने सब्जी मसाला का पैकजिंग प्लांट लगाने को सीएम युवा स्वरोजगार योजना में लोन के लिए जून में ऑनलाइन आवेदन किया था। जिला उद्योग केंद्र से स्वीकृति के बाद भी बैंक की मनमानी से प्रोजेक्ट अटका है।
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युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करने के लिए पीएम व सीएम की ओर से कई ऋण योजनाएं चलाई जा रही हैं। हालांकि, बैंकों की मनमानी जरूरतमंदों के सपना पूरा होने में अड़ंगा लगा रही है।
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इसके चलते जिला उद्योग केंद्र से आवेदन मंजूर हो जाने के बाद भी लोन की रकम के लिए महीनों बैंकों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
पीएम रोजगार सृजन योजना, सीएम युवा स्वरोजगार योजना तथा ओडीओपी योजना के लिए जिला उद्योग केंद्र ने 735 आवेदकों के लिए लोन के कुल 1,08,25.28 लाख रुपये स्वीकृत किए थे।
हालांकि, बैंकों ने इनमें से 97 आवेदकों के प्रोजेक्ट के लिए 1552.07 लाख रुपये की ऋण राशि ही स्वीकृत करते हुए इनमें से भी सिर्फ 60 आवेदकों को लोन के 907.49 लाख रुपये उपलब्ध कराए।
ऐसे में आवेदन स्वीकृत होने के बाद भी बैंकों से लोन की रकम हासिल करने के लिए इतने चक्कर काटने पड़ते हैं कि स्वरोजगार शुरू करने का सारा जोश खत्म हो जाता है।
अलग-अलग कारण बताकर कर रहे परेशान
पीड़ित बताते हैं कि पहले तो बैंक शाखा में जिला उद्योग केंद्र से ऑनलाइन स्वीकृति न आने की बात कहते हुए पूरे माह दौड़ाया जाता है। वहीं, आवेदन बैंक पहुंचने के बाद कभी स्टाफ की कमी तो कभी हेड ऑफिस से स्वीकृति न आने की बात कहकर परेशान किया जाता है। किसी तरह लोन की स्वीकृति आ भी जाती है तो फील्ड सर्वे के लिए समय न निकालकर मामले को लटका दिया जाता है। शिकायत पर ऋण दस्तावेजों में जानबूझ कर कोई न कोई कमी बताकर परेशान किया जाता है। सबसे ज्यादा परेशानी चार राष्ट्रीयकृत बैंकों में आती है।
विभागीय ऋण योजना एक नजर में
पीएम रोजगार सृजन योजना
आवेदन ऋण राशि स्वीकृत
301 4323 लाख 690 लाख
सीएम युवा स्वरोजगार योजना
आवेदन ऋण राशि स्वीकृत
280 3239 लाख 441लाख
एक जनपद एक उत्पाद योजना
आवेदन ऋण राशि स्वीकृत
154 3263 लाख 421 लाख
लीड बैंक प्रबंधक को दी गई जानकारी
जिला उद्योग केंद्र के उपायुक्त मनोज कुमार चौरसिया ने बताया कि हमारे यहां तीनों ऋण योजनाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन ही स्वीकार होते हैं। इनकी जांच के बाद अधिकतम 7 से 10 दिनों में लोन स्वीकृति के साथ बैंक को भेज दिया जाता है। इसके बाद भी बैंक प्रबंधन ऋण राशि देने से बचने को मनमानी बरतते हैं। लीड बैंक प्रबंधक को पत्र भेजकर इसकी जानकारी दी गई है।.
कोरोना के चलते बाधित हुआ काम
लीड बैंक प्रबंधक, विनोद मिश्रा ने बताया कि स्वीकृत आवेदन पत्रों के निस्तारण का काम जून के बाद से शुरू हुआ है। अप्रैल से जून तक कोरोना के चलते फील्ड पर जाना बंद था। वहीं, अलग-अलग बैंक शाखाओं में संक्रमण के मामले निकलने से काम बाधित रहा। 31 अक्तूबर तक लोन के सभी लंबित मामले निस्तारित कर दिए जाएंगे।

कार्रवाई के घेरे में आएंगे शाखा प्रबंधक
सीडीओ मनीष बंसल ने बताया कि स्वरोजगार से जुड़ी तीनों प्रमुख ऋण योजनाओं में बैकों का काम संतोषजनक नहीं पाया गया है। इसे लेकर अब प्रशासन पूरी सख्ती बरतते हुए संबंधित लोगों की जिम्मेदारी तय कर कड़ी कार्रवाई करेगा। बैंक प्रबंधन को पत्र भेजकर चेताया गया है कि सभी आवेदन पत्रों का निस्तारण माह के अंत तक कराए, अन्यथा संबंधित शाखा प्रबंधक पर कार्रवाई होगी।
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