बैंक अफसर की मौत, कोरोना की आशंका में मची अफरातफरी
वह तीन दिन से बुखार और सांस की समस्या से पीड़ित थे। मंगलवार रात सांस लेने में परेशानी होने पर उन्हें लोहिया अस्पताल लाया गया, जहां उल्टी होने के बाद उन्होंने दम तोड़ दिया।
बुधवार दोपहर अनुदीप का शव पोस्टमार्टम हाउस ले जाया गया। वहां कोरोना संक्रमण की चर्चा से अफरातफरी मच गई। वहां पूरी सावधानी और एहतियात के साथ डॉक्टर के पैनल ने शव का पोस्टमार्टम किया।
एडीसीपी राजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि अनुदीप अमेठी के तिलोई मोहनगंज स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा में सहायक प्रबंधक थे। पिता विशंभर दयाल मिश्रा बांदा में एसबीआई में प्रबंधक हैं। वह माता-पिता के इकलौते पुत्र थे।
पोस्टमार्टम हाउस में मची अफरातफरी
जूनियर डॉक्टर ने उन्हें सर्दी-जुकाम की दवाएं देकर वापस भेज दिया। मंगलवार रात फिर से तकलीफ होने पर वह अस्पताल गए जहां उन्हें एक उल्टी हुई और मौत हो गई।
बुधवार दोपहर शव पोस्टमार्टम के लिए आया तो कोरोना वायरस से मौत की चर्चा फैल गई। यह सुनते ही पोस्टमार्टम हाउस में अफरातफरी मच गई।
अगर कोरोना से मौत हुई तो गंभीर लापरवाही
अनुदीप की मौत अगर कोरोना वायरस के संक्रमण से हुई है तो पूरे सिस्टम की गंभीर लापरवाही सामने आएगी। अनदीप को अगर कोरोना संक्रमण था तो लोहिया अस्पताल जाने के बावजूद उनकी गंभीरता से जांच क्यों नहीं की गई?
उन्हें आइसोलेट क्यों नहीं किया गया? मौत के बाद अगर कोरोना संक्रमण की आशंका के बाद चिकित्सकों ने इस मामले को गंभीरता से क्यों नहीं लिया। अनुदीप के शव को परिवारीजनों को क्यों सौंपा गया।
उनकी शव यात्रा और क्रियाकर्म में शामिल लोगों की जांच क्यों नहीं हुई? अनुदीप के परिवारीजनों की जांच क्यों नहीं की गई? पुलिस-प्रशासन ने अनुदीप की ट्रैवल हिस्ट्री क्यों नही जांची? यह सारे सवाल पूरे सिस्टम और अधिकारियों को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं।