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Lucknow News: घुसपैठिया बांग्लादेशी कर रहा था टप्पेबाजी, साथी संग गिरफ्तार
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हसन शेख और उमर शेख।
लखनऊ। भारत में घुसपैठ कर टप्पेबाजी करने वाले बांग्लादेशी को साथी संग वजीरगंज पुलिस ने शुक्रवार सुबह डालीगंज पुल के नीचे से गिरफ्तार किया। दोनों आठ महीने से दुबग्गा में छिपकर रह रहे थे। शातिर शहर में घूम-घूम कर लोगों को रियाल बेचने का लालच देकर ठगते थे।
इंस्पेक्टर राजेश त्रिपाठी के मुताबिक आरोपी हसन शेख बांग्लादेश के गोपालगंज में गोहाला गांव का रहने वाला है। पकड़ा गया उसका साथी पश्चिम बंगाल के गोरिया चौबीस परगना का उमर शेख है। पूछताछ में हसन ने बताया कि वह आठ वर्ष पहले अवैध तरीके से बांग्लादेश की सीमा पारकर भारत में घुसा था। उस वक्त उसकी उम्र 21 वर्ष थी। पश्चिम बंगाल में वह कुछ दिन किराये के मकान में रहा। इसी दौरान उमर शेख से पहचान हुई। इसके बाद दोनों ने मिलकर ठगी शुरू कर दी।
इंस्पेक्टर ने बताया कि 15 नवंबर को दोनों ने निशातगंज निवासी चूड़ी विक्रेता गुल्लू सोनकर को 300 रियाल देने का झांसा दिया। दो लाख भारतीय रुपयों में सौदा तय हुआ। आरोपियों ने रियाल लेने के लिए दुकानदार को अगले दिन वजीरगंज बुलाया। यहां गुल्लू को कागज का बंडल थमाकर दोनों उनके दो लाख रुपये लेकर भाग निकले थे। पीड़ित की शिकायत पर केस दर्ज कर पुलिस की पांच टीमें गठित की गईं। सर्विलांस और सीसीटीवी कैमरों की मदद से दोनों को गिरफ्तार किया गया। आरोपी इंदिरानगर और महानगर में भी टप्पेबाजी कर चुके हैं।
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दिल्ली पुलिस ने भेजा था जेल
हसन और उमर पश्चिम बंगाल से दिल्ली पहुंचे थे। यहां सुकुरपुर में सड़क किनारे रहते थे। फिर यहीं के एक युवक को झांसे में लेकर हसन शेख ने उसके मकान के फर्जी दस्तावेज पर आधार और पैनकार्ड बनवा लिया। दोनों टप्पेबाजी करते रहे। एक मामले में हसन को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार भी किया। कई वर्ष बाद जेल से छूटने पर वह उमर के साथ लखनऊ आ गया। यहां दोनों ने फिर ठगने का खेल शुरू कर दिया। इंस्पेक्टर ने बताया कि आरोपियों के पास से 29 रियाल (कीमत 34,655 रुपये), एक कपड़े में बंधा कागज का बंडल, आठ हजार रुपये और छह मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। आरोपी टप्पेबाजी की रकम को मनी एक्सचेंज की दुकानों पर रियाल में बदलवा लेते थे।
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इंस्पेक्टर राजेश त्रिपाठी के मुताबिक आरोपी हसन शेख बांग्लादेश के गोपालगंज में गोहाला गांव का रहने वाला है। पकड़ा गया उसका साथी पश्चिम बंगाल के गोरिया चौबीस परगना का उमर शेख है। पूछताछ में हसन ने बताया कि वह आठ वर्ष पहले अवैध तरीके से बांग्लादेश की सीमा पारकर भारत में घुसा था। उस वक्त उसकी उम्र 21 वर्ष थी। पश्चिम बंगाल में वह कुछ दिन किराये के मकान में रहा। इसी दौरान उमर शेख से पहचान हुई। इसके बाद दोनों ने मिलकर ठगी शुरू कर दी।
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इंस्पेक्टर ने बताया कि 15 नवंबर को दोनों ने निशातगंज निवासी चूड़ी विक्रेता गुल्लू सोनकर को 300 रियाल देने का झांसा दिया। दो लाख भारतीय रुपयों में सौदा तय हुआ। आरोपियों ने रियाल लेने के लिए दुकानदार को अगले दिन वजीरगंज बुलाया। यहां गुल्लू को कागज का बंडल थमाकर दोनों उनके दो लाख रुपये लेकर भाग निकले थे। पीड़ित की शिकायत पर केस दर्ज कर पुलिस की पांच टीमें गठित की गईं। सर्विलांस और सीसीटीवी कैमरों की मदद से दोनों को गिरफ्तार किया गया। आरोपी इंदिरानगर और महानगर में भी टप्पेबाजी कर चुके हैं।
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दिल्ली पुलिस ने भेजा था जेल
हसन और उमर पश्चिम बंगाल से दिल्ली पहुंचे थे। यहां सुकुरपुर में सड़क किनारे रहते थे। फिर यहीं के एक युवक को झांसे में लेकर हसन शेख ने उसके मकान के फर्जी दस्तावेज पर आधार और पैनकार्ड बनवा लिया। दोनों टप्पेबाजी करते रहे। एक मामले में हसन को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार भी किया। कई वर्ष बाद जेल से छूटने पर वह उमर के साथ लखनऊ आ गया। यहां दोनों ने फिर ठगने का खेल शुरू कर दिया। इंस्पेक्टर ने बताया कि आरोपियों के पास से 29 रियाल (कीमत 34,655 रुपये), एक कपड़े में बंधा कागज का बंडल, आठ हजार रुपये और छह मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। आरोपी टप्पेबाजी की रकम को मनी एक्सचेंज की दुकानों पर रियाल में बदलवा लेते थे।