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Lucknow News: नौकर को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में हाईकोर्ट के पूर्व जज व पत्नी की गिरफ्तारी पर रोक
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लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अनिल कुमार व उनकी पत्नी वंदना श्रीवास्तव की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। पूर्व न्यायमूर्ति के नौकर ने उस पर चोरी का आरोप लगने के बाद आत्महत्या कर ली थी, मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप पूर्व न्यायमूर्ति व उनकी पत्नी पर लगा है। कोर्ट ने याचियों को अंतरिम राहत देने के साथ-साथ राज्य सरकार को चार सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।
न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह की ग्रीष्मावकाशकालीन खंडपीठ ने सोमवार को यह आदेश पूर्व न्यायमूर्ति व उनकी पत्नी की याचिका पर दिया। याचिका में 2 अप्रैल 2025 की उस एफआईआर को रद्द करने का आग्रह किया गया, जिसमें मृतक महेश निषाद की पत्नी ने याचियों पर उसके पति को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है। साथ ही मामले में याचियों की गिरफ्तारी पर रोक लगाने की भी गुजारिश की गई।
याचियों की ओर से दलील दी गई कि महेश निषाद ने 18 मार्च 2025 को अलीगंज थाने में स्वीकार किया था कि उसने साढ़े छह लाख रुपये याचियों के घर से चोरी किए हैं तथा 90 हजार व 38 हजार रुपये वापस भी किए। उसके छोटे भाई शंकर निषाद व पत्नी कविता निषाद के साथ थाने में लिखित समझौता हुआ कि वह बाकी के पैसे छह माह में लौटा देगा। कहा गया कि इसके 13 दिनों बाद उसने आत्महत्या कर ली, लिहाजा ये नहीं कहा जा सकता कि याचियों ने मृतक को आत्महत्या के लिए उकसाया हो। यह भी दलील दी गई कि मृतक पर बैंकों का लाखों रुपये कर्ज था तथा उसका घर भी नीलामी प्रक्रिया में था। उधर, राज्य सरकार की ओर से मामले में विवेचना की स्थिति से अवगत कराया गया। याचियों के अधिवक्ता प्रांशु अग्रवाल ने बताया कि कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद पारित अपने आदेश में कहा कि मामले में प्रथम दृष्टया आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध गठित करने वाले तत्वों का अभाव दिख रहा है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने हाईकोर्ट के पूर्व जज व पत्नी की इस मामले में गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी।
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न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह की ग्रीष्मावकाशकालीन खंडपीठ ने सोमवार को यह आदेश पूर्व न्यायमूर्ति व उनकी पत्नी की याचिका पर दिया। याचिका में 2 अप्रैल 2025 की उस एफआईआर को रद्द करने का आग्रह किया गया, जिसमें मृतक महेश निषाद की पत्नी ने याचियों पर उसके पति को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है। साथ ही मामले में याचियों की गिरफ्तारी पर रोक लगाने की भी गुजारिश की गई।
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याचियों की ओर से दलील दी गई कि महेश निषाद ने 18 मार्च 2025 को अलीगंज थाने में स्वीकार किया था कि उसने साढ़े छह लाख रुपये याचियों के घर से चोरी किए हैं तथा 90 हजार व 38 हजार रुपये वापस भी किए। उसके छोटे भाई शंकर निषाद व पत्नी कविता निषाद के साथ थाने में लिखित समझौता हुआ कि वह बाकी के पैसे छह माह में लौटा देगा। कहा गया कि इसके 13 दिनों बाद उसने आत्महत्या कर ली, लिहाजा ये नहीं कहा जा सकता कि याचियों ने मृतक को आत्महत्या के लिए उकसाया हो। यह भी दलील दी गई कि मृतक पर बैंकों का लाखों रुपये कर्ज था तथा उसका घर भी नीलामी प्रक्रिया में था। उधर, राज्य सरकार की ओर से मामले में विवेचना की स्थिति से अवगत कराया गया। याचियों के अधिवक्ता प्रांशु अग्रवाल ने बताया कि कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद पारित अपने आदेश में कहा कि मामले में प्रथम दृष्टया आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध गठित करने वाले तत्वों का अभाव दिख रहा है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने हाईकोर्ट के पूर्व जज व पत्नी की इस मामले में गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी।
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