गन्ना भुगतान: सबसे बड़ा डिफॉल्टर बजाज ग्रुप
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शुगर कांप्लेक्स चलाने वाले बड़े चीनी मिल समूह गन्ना मूल्य भुगतान पर सरकार को ठेंगा दिखा रहे हैं।
उन पर मुख्यमंत्री और गन्ना आयुक्त की चेतावनी का भी असर नहीं हो रहा है।
प्रदेश में गन्ना मूल्य का सबसे बड़ा डिफॉल्टर सबसे बड़ा चीनी उत्पादक बजाज ग्रुप है। यह ग्रुप किसानों के 1526 करोड़ रुपये दबाए बैठा है।
95 चीनी मिलों ने की थी पेराई
प्रदेश में निजी क्षेत्र के 95 चीनी मिलों ने गन्ना पेराई की थी। इनमें सर्वाधिक चीनी मिलें बजाज ग्रुप की हैं। कई यूनिटों वाले आधा दर्जन और चीनी मिल समूह हैं।
बाकी मिलों का स्वामित्व किसी एक के हाथ में हैं। बड़े चीनी मिल की शुगर मिलों के साथ ही डिस्टिलरी, इथनॉल प्लांट, पावर जनरेशन प्लांट और अन्य सहायक यूनिटें हैं।
सहायक यूनिटों से बड़ा मुनाफे कमाने वाले समूह ही भुगतान में रोड़े डाल रहे हैं। उन पर सरकार के निर्देशों का असर नहीं हो रहा है।
दबाए बैठा है 1526 करोड़ का भुगतान
गन्ना आयुक्त सुभाष चंद्र शर्मा ने बताया कि सर्वाधिक बकाया भी बजाज ग्रुप पर ही है। इस समूह ने गन्ना किसानों को 1526 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं किया गया है।
इसी प्रकार मवाना ग्रुप पर 566 करोड़, मोदी ग्रुप पर 417 करोड़, सिंभावली पर 273 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य बकाया है।
उन्होंने कहा कि गन्ना किसानों के बड़े बकायादार चीनी मिल समूहों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
गन्ना आयुक्त ने बताया कि निजी क्षेत्र की सिंगल मालिकाना हक वाली अधिकांश चीनी मिलों से 90 प्रतिशत से अधिक गन्ना मूल्य का भुगतान कर दिया गया है।
कुछ ने कर दिया है पूरा भुगतान
निजी क्षेत्र की आईपीएल ग्रुप की पांच मिलों के अलावा परसेंडी एवं टोडरपुर चीनी मिल ने भी शत-प्रतिशत गन्ना मूल्य का भुगतान कर दिया है।
चीनी निगम की एक मात्र मोहिउद्दीनपुर, मेरठ मिल तथा सहकारी क्षेत्र की बिजनौर जनपद की स्नेह रोड चीनी मिल भी शत-प्रतिशत गन्ना मूल्य अदा कर चुकी हैं।
सहकारी क्षेत्र की 23 चीनी मिलों ने 88.36 प्रतिशत गन्ना मूल्य का भुगतान किया है।
5304 करोड़ गन्ना मूल्य बकाया, सुनवाई आज
चीनी मिलों पर किसानों का 5304 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य अब भी बकाया है। इस पर देय ब्याज अलग है। हाईकोर्ट में मंगलवार को गन्ना मूल्य पर सुनवाई होनी है।
इधर भारतीय किसान यूनियन ने गन्ना मूल्य भुगतान को लेकर गन्ना आयुक्त कार्यालय की तालाबंदी की घोषणा की है।
चीनी मिलों ने बीते पेराई सत्र में 19,388.05 करोड़ रुपये मूल्य का गन्ना खरीदा था। सोमवार तक किसानों को 14,083.53 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया है।