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पीएम मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में जमानत मंजूर
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लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कहा है कि यह सभी को पता है कि पीएम नरेंद्र मोदी या संवैधानिक पद पर बैठे हुए व्यक्ति को किसी वर्ग या धर्म में नहीं बांधा जा सकता क्योंकि वह देश के प्रत्येक नागरिक का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री समेत सांविधानिक पदों पर आसीन सभी व्यक्तियों का सम्मान करें।
जस्टिस मो. फैज आलम खान की एकल पीठ ने यह टिप्पणी प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ एक व्हाट्सएप ग्रुप में अमर्यादित फोटो शेयर करने के आरोप में एक महीने से अधिक समय से जेल में बंद साठ वर्षीय व्यक्ति की जमानत अर्जी मंजूर करते हुए की। अभियुक्त मो. आफाक कुरैशी ने कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी थी। उन्होंने कहा कि वह अधिक पढ़ा-लिखा नहीं है और किसी फोटो को एडिट नहीं कर सकता। साथ ही कहा कि यह व्हाट्सएप ग्रुप स्थानीय थानाध्यक्ष ने बनाया था, जिस पर ऐसे संदेश शेयर करने की किसी की हिम्मत नहीं हो सकती है। सारी परिस्थितियों पर गौर करने के बाद कोर्ट ने कुरैशी को जमानत दे दी। दरअसल, अमीनाबाद पुलिस ने कुरैशी को 18 सितंबर 2021 को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। उसके खिलाफ थाने पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी कि उसने थानाध्यक्ष के व्हाट्सएप ग्रुप में प्रधानमंत्री की फोटो को अपमानजनक तरीके से पेश किया था।
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जस्टिस मो. फैज आलम खान की एकल पीठ ने यह टिप्पणी प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ एक व्हाट्सएप ग्रुप में अमर्यादित फोटो शेयर करने के आरोप में एक महीने से अधिक समय से जेल में बंद साठ वर्षीय व्यक्ति की जमानत अर्जी मंजूर करते हुए की। अभियुक्त मो. आफाक कुरैशी ने कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी थी। उन्होंने कहा कि वह अधिक पढ़ा-लिखा नहीं है और किसी फोटो को एडिट नहीं कर सकता। साथ ही कहा कि यह व्हाट्सएप ग्रुप स्थानीय थानाध्यक्ष ने बनाया था, जिस पर ऐसे संदेश शेयर करने की किसी की हिम्मत नहीं हो सकती है। सारी परिस्थितियों पर गौर करने के बाद कोर्ट ने कुरैशी को जमानत दे दी। दरअसल, अमीनाबाद पुलिस ने कुरैशी को 18 सितंबर 2021 को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। उसके खिलाफ थाने पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी कि उसने थानाध्यक्ष के व्हाट्सएप ग्रुप में प्रधानमंत्री की फोटो को अपमानजनक तरीके से पेश किया था।
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