बागपत के डीएम का 'लेटर बम', सीनियर IAS पर लगाए दलालों को संरक्षण देने का आरोप
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अपर मुख्य सचिव वन संजीव सरन पर लगे गंभीर आरोपों का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा कि एक और आईएएस अफसर ने अपने से सीनियर आईएएस अफसर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला कल्याण विभाग के तत्कालीन निदेशक व बागपत के मौजूदा डीएम भवानी सिंह ने प्रमुख सचिव महिला कल्याण रेणुका कुमार पर दलालों को संरक्षण देने, एक संस्था को नियम विरुद्ध करोड़ों का भुगतान करने, एक एनजीओ को करोड़ों की बेशकीमती जमीन का आवंटन कराने तथा तत्कालीन सत्ताधारी दल को फायदा पहुंचाने के लिए आनन-फानन में रानी लक्ष्मीबाई अवार्ड बंटवाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
दो आईएएस अफसरों के बीच छिड़ी जंग का खुलासा हाल ही में सार्वजनिक हुए भवानी सिंह के तीन पत्रों से हुआ है। यही नहीं भवानी सिंह ने पत्र में रेणुका पर नियम विरुद्ध काम करने का दबाव बनाने का आरोप जड़ते हए उनकी भर्त्सना तक किए जाने की बात कही है।
प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में एक के बाद एक अफसरों के बीच चल रही रार सामने आ रही है। अभी कुछ दिन पहले आईएफएस अधिकारी एके जैन ने सीनियर आईएएस अफसर संजीव सरन पर गंभीर आरोप लगाए थे। एके जैन व संजीव सरन के बीच छिड़ी जंग अभी थमी भी नहीं कि एक नया लेटर बम फूट गया।
यह लेटर बम 2010 बैच के युवा आईएएस भवानी सिंह का है। भवानी सिंह ने ये चिट्ठियां इसी साल 17 व 20 मार्च को 1987 बैच की आईएएस प्रमुख सचिव रेणुका कुमार को उस समय लिखीं थीं जब वह इसी विभाग में निदेशक महिला कल्याण के पद पर कार्यरत थे।
भवानी सिंह ने अपने पत्र में ये लगाए आरोप
भवानी सिंह ने अपने पत्र में खुलासा किया है कि डीएम की आपत्तियों को दरकिनार कर हुए महिला समाख्या को करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया गया। भवानी सिंह ने रेणुका की कार्यशैली पर भी सवाल खड़ा करते हुए स्वेच्छाचारितापूर्ण ढंग से काम करने का आरोप लगाया है।
बकौल भवानी सिंह प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भी उनके ऊपर पुरानी योजनाओं को ही आगे बढ़ाने का दबाव बनाया गया लेकिन उन्होंने इन्कार कर दिया। प्रमुख सचिव के साथ तल्खी का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि भवानी सिंह ने उनकी बैठकों में हिस्सा लेने से यह कहते हुए इन्कार कर दिया कि वह न तो उनके निजी सचिव हैं और न ही वैयक्तिक सहायक।
भवानी ने पत्र में लिखा है कि वह विभागाध्यक्ष हैं और अगर उनसे कोई सूचना मांगी जानी है तो लिखित में मांगी जाए। भवानी सिंह ने अपने पत्र में लिखा है कि उनके मणिपुर चुनाव ड्यूटी पर रहने के दौरान निदेशालय के अफसरों पर दबाव बनाकर करोड़ों रुपये का भुगतान एनजीओ को बिना खुली प्रतिस्पर्धा व पारदर्शी प्रक्रिया के कर दिया गया।
यूनिसेफ परामर्शदाताओं के जरिये अधिकारियों पर नियम विरुद्ध कार्य करने के लिए लगातार दबाव बनाया जाता रहा है। भवानी सिंह ने रेणुका के साथ हुए विभागीय पत्राचार का उल्लेख करते हुए अपने पत्र में लिखा है कि आपने जो मेरी भर्त्सना की है वह वास्तव में तत्वहीन, सारहीन तथा निराधार है।
वास्तव में भर्त्सना ऐसे अधिकारियों की होनी चाहिए जो एक निष्पक्ष, पेशेवर, नियमबद्ध सिविल सेवक के अपने कर्त्तव्यों को भूलकर कभी राजनीतिक हितों को तुष्ट करने, तो कभी स्वयं अपनी सस्ती लोकप्रियता के लिए अपने इर्द-गिर्द जमा चापलूसों के बहकावे में आकर नियमों के खिलाफ कार्य करते हैं। भवानी सिंह ने पत्र में यह भी कहा है कि जब भी मौका मिला तो वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मुख्य सचिव व प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री से मिलकर साक्ष्य सहित पूरे मामले को रखेंगे।
यह हैं भवानी सिंह के आरोप
1- शासन स्तर पर संबंधित लोगों/संस्थाओं से साठगांठ कर राजधानी में ताज होटल के बगल में करोड़ों रुपये की बेशकीमती जमीन सत्ताधारी दल के करीबी शैल एनजीओ को दे दी गई ।
2- बिना किसी स्क्रीनिंग कमेटी का परामर्श लिए चुनाव से ठीक पहले सरकारी धन को रेवड़ियों की तरह बांटा गया। तत्कालीन सत्ताधारी पार्टी के करीबी लोगों को ही रानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान दिया गया।
3- तत्कालीन सत्ताधारी दल के लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए महिला समाख्या को निदेशालय में समाहित कर लिया गया।
4- महिला समाख्या को बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना की गाइडलाइन का अतिक्रिमण करते हुए विभिन्न जिलों के डीएम की निगेटिव रिपोर्ट के बावजूद करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया।
5- यूनिसेफ के तथाकथित परामर्शदाताओं का प्रयोग कर विभाग के अधिकारियों पर दबाव बनाकर नियम विपरीत काम कराया गया। इसके अलावा आउटसोर्स एजेंसी से लेखाकार पद पर नियुक्ति के लिए लगातार दबाव बनाया जाता रहा।
यह हैं रेणुका कुमार के जवाब
1- भवानी सिंह के आरोप बेबुनियाद हैं। एनजीओ को जमीन तत्कालीन मुख्यमंत्री के अनुमोदन पर एसिड पीड़िताओं को कैफे चलाने के लिए दी गई थी। यह जमीन एलडीए की है।
2- रानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान भी तत्कालीन मुख्यमंत्री के अनुमोदन पर दिए गए। यह सूची पंचायती राज विभाग देता है। इसके अलावा मेधावी छात्र-छात्राओं को पुरस्कार दिए गए थे। पुरस्कारों में कोई गड़बड़ी नहीं है।
3- महिला समाख्या केंद्र सरकार का एनजीओ है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ में इस संस्था ने अच्छा काम किया है। बेसिक शिक्षा विभाग से इसका एमओयू खत्म हो गया था। बड़े समूह का लाभ लेने के लिए ही इसे महिला कल्याण विभाग में समाहित किया गया।
4- केंद्र सरकार से 10 जिलों में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत मिले पैसे से महिला समाख्या ने 17 जिलों में अवेयरनेस का काम किया। जहां तक कुछ डीएम के निगेटिव रिपोर्ट देने की बात है तो यह वह डीएम हैं जो कार्यक्रम में खुद मौजूद थे।
5- यूनिसेफ ने अपने परामर्शदाता विभाग की मदद के लिए दिए हैं। जहां तक आउटसोर्स एजेंसी की बात है तो जो भी कर्मचारी ठीक काम नहीं करते उनकी जगह दूसरा आदमी मांगा जाता है। इस मामले में भी यही हुआ होगा।
क्या कहते हैं भवानी सिंह
इस समय बागपत के डीएम भवानी सिंह का कहना है कि यह पत्र उस समय के हैं जब मैं महिला कल्याण विभाग में निदेशक के पद पर कार्यरत था। यह पत्र प्रमुख सचिव रेणुका कुमार के पत्रों के जवाब में लिखे गए थे। विभाग की योजनाओं के संबंध में हम दोनों के ही मत एक नहीं थे।
कई मसलों पर मेरी आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए वह अपने ढंग से विभाग के अफसरों पर दबाव डालकर काम कराती थीं। मैंने मुख्य सचिव से विभाग से तबादला करने का अनुरोध किया था। अब मैं उस विभाग में नहीं हूं। साथ ही कर्मचारी आचरण सेवा नियमावली से भी बंधा हुआ हूं। इसलिए मैं अब उस बारे में कुछ भी नहीं बोल सकता हूं।
क्या कहती हैं रेणुका कुमार
प्रमुख सचिव महिला कल्याण रेणुका कुमार का कहना है कि भवानी सिंह जब विभाग में थे तो वह काम नहीं करते थे। जब मैंने उनको डांटा तो वे मेरे ऊपर आरोप लगाने लगे। उन्होंने जितने भी आरोप लगाए हैं उनमें बिलकुल सच्चाई नहीं है। मैंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों पर सफाई मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव को दे दी है। मैंने वह सभी कागज भी सौंप दिए हैं जिसके अनुसार विभाग में कार्रवाई की गई थी। मुख्यमंत्री, विभागीय मंत्री व मुख्य सचिव तीनों ही मेरी सफाई से संतुष्ट हैं।