फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   bada imambada in lucknow

सिर्फ नाम का ही बड़ा नहीं, बड़ा इमामबाड़ा

Thu, 01 Aug 2013 04:09 PM IST
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क Updated Thu, 01 Aug 2013 04:09 PM IST
विज्ञापन
bada imambada in lucknow

नवाबों का शहर कहे जाने वाले लखनऊ की ऐतिहासिक इमारतों में शुमार बड़ा इमामबाड़ा को भुलभुलैया के नाम से भी जानते हैं।

विज्ञापन


इमामबाड़ा ऐतिहासिक द्वार का घर है, जो ऐसी अद्भुत वास्तुकला से परिपूर्ण है, जिसे देखकर आधुनिक वास्तुकार भी हैरत में पड़ जाते हैं।

इसका निर्माण नवाब आसफ़उद्दौला ने 1784 में कराया था। इसके संकल्पकार थे किफायतउल्ला, जो ताजमहल के वास्तुकार के निकटतम संबंधी के रूप में जाने जाते थे।

नवाब द्वारा अकाल राहत कार्यक्रम में निर्मित यह विशाल भव्य संरचना है, जिसे असाफाई इमामबाड़ा भी कहते हैं। इसकी संरचना में गोथिक प्रभाव के साथ राजपूत और मुग़ल वास्तुकला का मिश्रण दिखाई देता है।

वास्तुकला
बड़ा इमामबाड़ा एक रोचक भवन है, जो मस्जिद है न मकबरा। कक्षों के निर्माण और वॉल्ट के उपयोग से इसमें सशक्त इस्लामी प्रभाव दिखता है।

इमामबाड़ा वास्तव में एक विहंगम आंगन के बाद बना हुआ एक विशाल हॉल है, जहां दो विशाल तिहरे आर्च वाले रास्तों से पहुंचा जाता है। इमामबाड़े का केंद्रीय कक्ष करीब 50 मीटर लंबा और 16 मीटर चौड़ा है।
विज्ञापन


स्तंभहीन कक्ष की छत करीब 15 मीटर से अधिक ऊंची है। यह हॉल लकड़ी, लोहे और पत्थर के बीम के बाहरी सहारे के बिना खड़ी विश्व की सबसे बड़ी संरचना है, जिसे किसी बीम या गार्डर के बिना ही ईंटों को आपस में जोडक़र खड़ा किया गया है। जो वास्तुकला की भव्यता को परिलक्षित करता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


क्यों कहते हैं भूलभुलैया
इमामबाड़े में तीन विशाल कक्ष हैं, जिसकी दीवारों के बीच लंबे गलियारे हैं, जो लगभग 20 फीट चौड़े हैं। यही घनी और गहरी संरचना भूलभुलैया कहलाती है।

असल में यहां1000 से भी अधिक छोटे रास्ते हैं जो देखने में एक जैसे लगते हैं। पर ताज्जुब करने वाली बात यह है कि, ये सभी अलग-अलग रास्ते पर निकलते है। कुछ तो ऐसे भी हैं जिनके सिरे बंद है।

अरे ये भूलभुलैया में बावड़ी क्या है
भूलभुलैया में मौजूद बावड़ी सीढ़ीदार कुएं को कहते हैं, जो इमामबाड़े में एक अचंभित करने वाली संरचना है। यह पूर्व नवाबी युग की धरोहर है। शाही हमाम नामक यह बावड़ी गोमती नदी से जुड़ी है, जिसमें पानी से ऊपर केवल दो मंजिले हैं, शेष तल साल भर पानी के भीतर डूबा रहता हैं।

इमामबाड़े के दिलचस्प किस्से
इस अद्भुत इमारत के निर्माण के पीछे दिलचस्प किस्से भी जुड़े हैं। माना जाता है कि सन् 1785 में लखनऊ में रोजगार की कमी की वजह से भयावह भुखमरी की समस्या आ गई।

आवाम की भलाई और भर पेट भोजन की व्यवस्था करने के लिए इमामबाड़े के निर्माण का निर्णय लिया गया, जिसने हजारों की संख्या में लोगों को रोजगार मुहैया कराया।

इमामबाड़े में एक विशाल हॉल है, जिसमें कभी नवाब बैठते थे। इसके एक मंजिल ऊपर भूलभुलैया है। जो एक अनसुलझी पहेली है जिसमें अगर आप भटक जाएं तो कोई बड़ी बात नहीं।

सुरंगों का है जाल
जानकारों की मानें तो भूलभुलैया के कुछ रास्ते इतने खतरनाक थे कि, इसमें लोग फंसकर अपनी जान भी गवां चुके हैं। कहा जाता है कि भूलभुलैया भूमिगत सुरंगों का एक ऐसा जाल है जो इमामबाड़े को दिल्ली, कोलकाता और फैजाबाद से जोड़ता है। जिसे लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर बंद कर दिया गया है।


इमामबाड़े का ऐतिहासिक ही नहीं धार्मिक महत्व भी है और इसी के फलस्वरूप मुहर्रम के महीने में यहां से ताजिया का जुलूस निकाला जाता है।

क्या है रूमी दरवाजा
रूमी दरवाजा इमामबाड़े के बाहर पुराने लखनऊ का प्रवेश द्वार माना जाता है। यह लगभग 60 फीट उंचा है, जिसमें तीन मंजिल हैं। इस दरवाजे से आप नवाबों के शहर का भरपूर नजारा ले सकते हैं। यह दरवाजा लखनऊ की पहचान है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed