{"_id":"5fc7dd348ebc3ea36075908c","slug":"b-ed-and-b-t-c-students-banned-on-reimbursement-decision-on-finding-irregularities","type":"story","status":"publish","title_hn":"बीएड और बीटीसी छात्रों को शुल्क भरपाई पर रोक, गड़बड़ियां मिलने पर फैसला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बीएड और बीटीसी छात्रों को शुल्क भरपाई पर रोक, गड़बड़ियां मिलने पर फैसला
Thu, 03 Dec 2020 12:00 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Thu, 03 Dec 2020 12:00 AM IST
विज्ञापन
बीएड
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदेश में बीएड और बीटीसी विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति और शुल्क भरपाई पर रोक लगा दी गई है। इस योजना में इन संस्थानों में लगातार मिल रहीं गड़बड़ियों पर शासन ने यह फैसला किया है। समाज कल्याण समेत सभी संबंधित विभागों को इस बारे में निर्देश दे दिए गए हैं।
बीएड और बीटीसी संस्थानों को इस मद में किए गए भुगतान की जांच कराई जा रही है। शासन स्तर से कराई जा रही शुरुआती जांच में लखनऊ के टीडीएल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, सिटी कॉलेज, विकट इंस्टीट्यूट और कानपुर के श्री शक्ति डिग्री कॉलेज में ही गड़बड़ियां मिलीं। यह जांच संबंधित जिला प्रशासन के माध्यम से कराई गई थी। लखनऊ के इन तीनों संस्थानों में किसी भी शिक्षक के वेतन संबंधी बैंक साक्ष्य नहीं मिले। जबकि, नियम है कि भुगतान राशि अनिवार्य रूप से बैंक खाते में ही भेजी जाएगी। जांच टीम इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि संस्थानों में अध्ययन-अध्यापन का कार्य नहीं हो रहा था। सिर्फ प्रवेश लेने और परीक्षा कराने तक ही इनकी भूमिका सीमित है। कानपुर के श्री शक्ति डिग्री कॉलेज में 17 शिक्षकों में से 10 ही परीक्षा नियामक प्राधिकारी के यहां से अनुमोदित मिले।
सूत्रों के मुताबिक, अभी अन्य जिलों की रिपोर्ट नहीं आई है, मगर वहां भी जबरदस्त गड़बड़ियों की आशंका जताई गई है। इसके मद्देनजर शासन ने छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के तहत बीएड और बीटीसी पाठ्यक्रम के लिए दी जाने वाली राशि को जारी करने की अनुमति नहीं दी है। शेष पाठ्यक्रमों को पहले की ही तरह राशि जारी करने की अनुमति दे दी है। प्रदेश में बीएड के करीब तीन हजार और बीटीसी के 2300 संस्थान हैं। इस योजना में कुल बजट की करीब 40 फीसदी राशि इन्हीं दो पाठ्यक्रमों पर खर्च होती है। शासन के सूत्रों के मुताबिक, जिन जिलों में जांच कराई जा रही है, उन सभी जगहों से रिपोर्ट आने के बाद ही इन पाठ्यक्रमों में भुगतान के बाबत अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
बीएड और बीटीसी संस्थानों को इस मद में किए गए भुगतान की जांच कराई जा रही है। शासन स्तर से कराई जा रही शुरुआती जांच में लखनऊ के टीडीएल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, सिटी कॉलेज, विकट इंस्टीट्यूट और कानपुर के श्री शक्ति डिग्री कॉलेज में ही गड़बड़ियां मिलीं। यह जांच संबंधित जिला प्रशासन के माध्यम से कराई गई थी। लखनऊ के इन तीनों संस्थानों में किसी भी शिक्षक के वेतन संबंधी बैंक साक्ष्य नहीं मिले। जबकि, नियम है कि भुगतान राशि अनिवार्य रूप से बैंक खाते में ही भेजी जाएगी। जांच टीम इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि संस्थानों में अध्ययन-अध्यापन का कार्य नहीं हो रहा था। सिर्फ प्रवेश लेने और परीक्षा कराने तक ही इनकी भूमिका सीमित है। कानपुर के श्री शक्ति डिग्री कॉलेज में 17 शिक्षकों में से 10 ही परीक्षा नियामक प्राधिकारी के यहां से अनुमोदित मिले।
विज्ञापन
सूत्रों के मुताबिक, अभी अन्य जिलों की रिपोर्ट नहीं आई है, मगर वहां भी जबरदस्त गड़बड़ियों की आशंका जताई गई है। इसके मद्देनजर शासन ने छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के तहत बीएड और बीटीसी पाठ्यक्रम के लिए दी जाने वाली राशि को जारी करने की अनुमति नहीं दी है। शेष पाठ्यक्रमों को पहले की ही तरह राशि जारी करने की अनुमति दे दी है। प्रदेश में बीएड के करीब तीन हजार और बीटीसी के 2300 संस्थान हैं। इस योजना में कुल बजट की करीब 40 फीसदी राशि इन्हीं दो पाठ्यक्रमों पर खर्च होती है। शासन के सूत्रों के मुताबिक, जिन जिलों में जांच कराई जा रही है, उन सभी जगहों से रिपोर्ट आने के बाद ही इन पाठ्यक्रमों में भुगतान के बाबत अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
विज्ञापन