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बीएड: कहीं सीट खाली तो कहीं सीट से ज्यादा आवंटन

Sun, 28 Jun 2015 10:44 AM IST
सचिन त्रिपाठी/अमर उजाला, लखन
सचिन त्रिपाठी/अमर उजाला, लखन Updated Sun, 28 Jun 2015 10:44 AM IST
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B ed admission in Uttar Pradesh colleges.

उदाहरण 1- बरेली के अनुदानित हिंदू कॉलेज को 100 अभ्यर्थी आवंटित किए गए हैं। अब कॉलेज प्रशासन प्रवेश समन्वयक को पत्र लिखकर अपने यहां केवल 50 सीटें होने की बात कह रहा है। सीट से ज्यादा आवंटन पर अब क्या होना है, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।

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उदाहरण 2- वाराणसी के सरकार से अनुदानित सुधाकर डिग्री कॉलेज को 180 अभ्यर्थी आवंटित हो गए हैं। कॉलेज प्रशासन की माने तो एनसीटीई ने इस कॉलेज में केवल 100 सीटों की मान्यता ही प्रदान की है। प्रवेश समन्वयक को पत्र लिखकर कॉलेज प्रशासन ज्यादा आवंटन निरस्त करने की मांग कर रहा है।
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उदाहरण 3- बरेली स्थित एडेड बरेली कॉलेज को बीएड की संयुक्त काउंसलिंग में 101 सीटें आवंटित की गई हैं। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि उसके यहां केवल 100 सीटें ही हैं। संयुक्त प्रवेश परीक्षा समन्वयक को पत्र लिखकर कॉलेज ने अब एक अभ्यर्थी का आवंटन रद्द करने की मांग की है।
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एक ओर निजी बीएड कॉलेज जहां दाखिले न होने को लेकर परेशान हैं, दूसरी ओर एडेड कॉलेजों में सीट से ज्यादा आवंटन हो गए हैं। इन तीन उदाहरण की तरह प्रदेश में बहुत से अनुदानित कॉलेज ऐसे हैं, जहां सीट से ज्यादा अभ्यर्थी आवंटित हो गए हैं। अभ्यर्थी कॉलेजों में दाखिला लेने पहुंच रहे हैं।

एनसीटीई की गाइडलाइन तो है कुछ अलग

B ed admission in Uttar Pradesh colleges.

एनसीटीई की गाइडलाइन के अनुसार कॉलेज मान्यता से ज्यादा अभ्यर्थियों को दाखिला नहीं दे सकते। इसलिए वे राज्य प्रवेश समन्वयक को पत्र लिखकर समाधान की मांग कर रहे हैं। प्रवेश समन्वयक भी समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर इस मामले में क्या किया जाए।

प्रदेश में निजी कॉलेजों के बीएड पाठ्यक्रम में हालत यह है कि प्रदेश के 1825 कॉलेजों की कुल 1,81,370 सीटों में से करीब सवा लाख अभी भी खाली पड़ी हुई हैं। कई कॉलेजों में तो एक भी दाखिला नहीं हुआ है। कॉलेज पहुंचने से पहले ही अभ्यर्थियों से आवंटित कॉलेज की फीस जमा कराई जा चुकी है। इसलिए कॉलेजों की भी समझ में नहीं आ रहा है कि वे क्या करें।

रजिस्ट्रार द्वारा उपलब्ध कराई सीटों पर हुआ आवंटन
संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा के सह समन्वयक प्रो. पवन अग्रवाल के अनुसार काउंसलिंग शुरू करने से पहले प्रदेश भर के राज्य विश्वविद्यालयों से उनके यहां की बीएड सीटों का कॉलेजवार ब्यौरा मांगा गया था। ब्यौरा उपलब्ध कराने के लिए अंतिम तिथि 10 मार्च से बढ़ाते-बढ़ाते 30 मई 2015 निर्धारित की गई।

इस तिथि तक विवि के रजिस्ट्रारों ने उनके यहां के बीएड कॉलेजों में निर्धारित सीटों का आंकड़ा दिया था। उसी के हिसाब से पांच जून से शुरू हुई काउंसलिंग में कॉलेजों को अभ्यर्थी आवंटित कर दिए गए। सह समन्वयक के अनुसार सीट आवंटन के बाद यह कहना कि उन्हें ज्यादा अभ्यर्थी आवंटित हो गए हैं, सही नहीं है।

31 अक्तूबर 2014 तक पूरे करने थे मानक

B ed admission in Uttar Pradesh colleges.

एनसीटीई ने शैक्षिक सत्र 2015-17 के लिए दो महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। पहला बीएड पाठ्यक्रम दो साल का करना, और दूसरा बीएड की मूल इकाई में 50 स्टूडेंट्स का होना। एक संस्था में अधिकतम दो इकाई की बाध्यता है। इसलिए एक कॉलेज में बीएड की अधिकतम 100 सीट ही हो सकती हैं।

इन सीटों के हिसाब से कॉलेजों को इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रति 25 स्टूडेंट्स पर एक शिक्षक की व्यवस्था करनी थी। ये मानक पूरे करने के लिए एनसीटीई ने 31 अक्टूबर 2014 का समय दिया था। तय समय तक मानक पूरे न करने वाली संस्थाओं में एनसीटीई ने सीटें घटा दीं। संस्थानों ने इसकी सूचना विवि के रजिस्ट्रारों को नहीं दी। नतीजा यह हुआ है कि रजिस्ट्रार ने पुरानी सीट संख्या ही लखनऊ विश्वविद्यालय को भेज दी और उसी पर आवंटन हो गया।

काउंसलिंग शुरू होने के बाद शासनादेश

बीएड काउंसलिंग पांच जून से शुरू हुई थी। इसके बावजूद उच्च शिक्षा विभाग ने एनसीटीई के मानक के अनुसार इकाई-एक में 50 स्टूडेंट्स होने और अधिकतम दो इकाई संबंधी शासनादेश 15 जून को जारी किया है। शासनादेश में यह भी साफ नहीं किया गया है कि प्रावधान इसी सत्र से या अगले सत्र से प्रभावी होंगे। इसलिए अभी तक कंफ्यूजन है कि कॉलेजों में इकाई संबंधी मानक इसी सत्र से या अगले सत्र से पालन किए जाएं।

मामले पर राज्य बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा के सह समन्वयक  प्रो. पवन अग्रवाल का कहना है, 'काउंसलिंग में रजिस्ट्रारों द्वारा उपलब्ध कराई गई सीट संख्या के आधार पर ही कॉलेजों को अभ्यर्थी आवंटित किए गए हैं। आवंटन के बाद सीटें कम होने की सूचना देने के बाद हमारे स्तर से आवंटन निरस्त नहीं किया जा सकता।'

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