मंत्रिमंडल से बर्खास्त किए जाएंगे आजम खां?
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बसपा ने भी सवाल उठाया कि राज्यपाल और आजम खां में चल रहे लेटर वार के बीच अभिभाषण का क्या तुक है। बसपा ने विधानभवन में बैनर लहराए और प्रदर्शन किया। हंगामे के कारण विधानमंडल के दोनों सदनों की कार्यवाही नहीं चल सकी।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी और विधानमंडल दल के नेता सुरेश खन्ना ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव या तो आजम को बर्खास्त करें अथवा जवाब दें कि वे राज्यपाल पर आजम के हमलों से सहमत हैं?
दोनों नेताओं ने कहा, राज्यपाल का अभिभाषण सरकार तैयार करती है। राज्यपाल चाहते तो सरकार की उपलब्धियों का पुलिंदा पढ़ने से इन्कार कर नाराजगी जता सकते थे।
पर, उन्होंने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए सरकार की उपलब्धियों को पढ़ा। मुख्यमंत्री को भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए आजम पर कार्रवाई करनी चाहिए।
कार्यवाही रोककर आजम पर चर्चा की मांग
भाजपा विधानमंडल दल के नेता सुरेश खन्ना ने भी आजम व राज्यपाल के बीच चल रहे विवाद को व्यवस्था के प्रश्न के रूप में उठाने का प्रयास किया लेकिन अध्यक्ष ने उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी।
अध्यक्ष ने परंपरा का हवाला देते हुए अभिभाषण पढ़ने की बात कही तो बसपा के सदस्यों ने फिर हंगामा व शोर-शराबा शुरू कर दिया।
हंगामे व नारेबाजी के बीच अध्यक्ष ने भी पहला और अंतिम पैरा पढ़ा और फिर आज का एजेंडा निपटाकर कार्यवाही बृहस्पतिवार तक के लिए स्थगित कर दी।
नेता विधानमंडल खन्ना व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. वाजपेयी ने स्पष्ट किया कि सदन की आगे की कार्यवाही में भाजपा हिस्सा लेगी।
साथ ही कानून-व्यवस्था पर सरकार की असफलता, किसानों के उत्पीड़न, गन्ना किसानों के बकाया भुगतान और सड़कों की जर्जर हालत को मुद्दा बनाकर सरकार को घेरेगी।
आजम ने भी किया पलटवार
राजीव गांधी की सरकार में मंत्री केके तिवारी अक्सर तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह पर निशाना साधते थे। एक बार राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री से आपत्ति जताई तो राजीव ने तत्काल तिवारी को मंत्री पद से हटा दिया।
भाजपा ने कहा कि सीएम कार्रवाई करें या आजम के हमलों से सहमति जताएं, बसपा ने भी इस मसले पर भाजपा के साथ दिखी।
बसपा ने कहा कि लेटर वार के बीच अभिभाषण का क्या तुक। हालांकि इस पूरे मामले पर आजम खां का भी बयान आ गया है। उन्होंने कहा कि मैं राज्यपाल के खिलाफ साक्ष्य जुटा रहा हूं। जल्द ही राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलूंगा।
मैंने गवर्नर को चिट्ठी लिख दी, इस पर बवाल हो रहा है। ‘लाट साहब’ को चिट्ठी लिखने की परंपरा तो अंग्रेजों के जमाने से है। तब इसे क्यों नहीं रोका गया?
विधानमंडल के पटल पर रखे गए ये अध्यादेश
विधानसभा में संसदीय कार्य मंत्री मो. आजम खां तथा विधान परिषद में नेता सदन अहमद हसन ने अध्यादेशों को सदन के पटल पर रखा।
गौरतलब है कि इन अध्यादेशों को हाल ही में राज्यपाल की मंजूरी मिली थी।
शोरशराबे के बीच ही विधानमंडल के दोनों सदनों में पिछले साल पारित किए गए आठ विधेयकों को राज्यपाल की मंजूरी मिल जाने तथा उनके अधिनियम बन जाने की सूचना भी दी गई।
इनमें जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था (विशेष उपबंध) विधेयक-2014 और डॉ. शकुंतला मिश्रा पुनर्वास विश्वविद्यालय (भिन्नरूपेण योग्य हेतु) उत्तर प्रदेश (संशोधन विधेयक) 2014, उ.प्र. कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2014, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग विधेयक 2014, माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड (संशोधन) विधेयक 2014, उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग (संशोधन) विधेयक, 2014 और मूल्य संवर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2014 शामिल हैं।