क्यों आता है आजम को गु्स्सा, गुस्से के चर्चित मामले...
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नगर विकास मंत्री मो. आजम खां का अपने विभाग के अधिकारियों पर गुस्सा पहली बार नहीं है। इसके पहले भी वह विभागीय अधिकारियों पर गुस्सा उतार चुके हैं।
बता दें कि आजम ने हाल ही में सचिवालय प्रशासन के सचिव को पत्र लिखकर कहा कि सचिवालय का पूरा स्टाफ बदल दें। आजम का तर्क है कि ये सचिवालय का सारा स्टाफ सरकार विरोध काम कर रहा है।
अखिलेश सरकार बनते ही आजम ने विभागीय अधिकारियों की गाड़ियां छिनवा ली थीं। जिन्हें गाड़ियां दी भी गई थीं उनसे कहा गया था कि वे घर पर गाड़ी न रोककर गैरेज में खड़ी कराएंगे।
आजम एक बार फिर अपने अधिकारियों व कर्मचारियों से खफा हैं। चाहते हैं कि उनके विभाग से सचिवालय सेवा के सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को हटा दिया जाए। वह स्थानीय स्तर पर विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों से काम कराएंगे।
गुस्से से बच जाएं इसलिए छुट्टी पर जाते थे अधिकारी
नगर विकास व अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मो. आजम खां की तुनकमिजाजी किसी से छिपी नहीं है। विभागीय फाइलों पर टिप्पणी लिखना, अधिकारियों को सामने खड़ा कर भला-बुरा कहना, कोई नई बात नहीं है।
यह स्थिति तब है जब उनके विभाग में उनके हिसाब से अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की गई है। नगर विकास विभाग सचिव को छोड़कर उनकी किसी से पटी नहीं।
प्रमुख सचिव नगर विकास के पद पर चाहे प्रवीर कुमार रहे हों या सीबी पालीवाल उनकी किसी से नहीं पटी। प्रवीर कुमार से तो वे इतना नाराज हुए कि उन्हें अपने यहां बैठक में बुलाना तक बंद कर दिया।
सीबी पालीवाल आजम के गुस्से से बचने के लिए कई बार लंबी छुट्टी पर गए। स्थिति इतनी खराब हुई कि नियुक्ति विभाग को उन्हें राजस्व विभाग में तैनाती देनी पड़ी।
नगर विकास विभाग हो या अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, सभी में आजम की मर्जी से ही अधिकारी लगाए गए हैं। कहते हैं कि यही अधिकारी आजम से फाइल भी पास कराते हैं।
ऐसे में आजम का अपने अधीनस्थों पर गुस्सा होना समझ से परे है। आजम ने सचिव सचिवालय प्रशासन को यह पत्र 3 जुलाई को लिखा है। सचिवालय प्रशासन ने पत्र को इतना गोपनीय रखा कि किसी को भनक तक नहीं लगी। कुछ कर्मचारी संगठनों के हाथ पत्र लगने के बाद चर्चाएं शुरू हुई।
गुस्से की वजह कहीं यह तो नहीं
दोनों विभागों में अधिकतर नए अफसर व कर्मी
आजम के दोनों विभागों में अधिकतर नए कर्मचारी हैं। नगर विकास विभाग में कुल नौ अनुभाग हैं। प्रत्येक अनुभाग का प्रभारी अनुभाग अधिकारी होता है।
इसके ऊपर अनुसचिव, उप सचिव, संयुक्त सचिव, विशेष सचिव और सचिव हैं। कुछ अनुभाग अधिकारियों और समीक्षा अधिकारियों को छोड़ दिया जाए तो अधिकतर सत्ता बदलने के बाद तैनात हुए हैं। नगर विकास विभाग में मौजूदा समय मात्र एक ही अनुभाग अधिकारी बसपा सरकार के समय का है।
आजम के गुस्से की असली वजह अल्पसंख्यक कल्याण विभाग बताई जा रही है। विभाग की कुछ सूचनाएं ऐसी थीं जिन्हें आजम चाहते थे कि बाहर न जाएं। इसके बाद भी वह बाहर निकल गईं। कहा तो यह भी जाता है कि मदरसों से जुड़ी सूचना है। आजम द्वारा चिट्ठी के बाद से अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।
आजम के चर्चित मामले
* जौहर विवि के कुलपति को श्रम विभाग द्वारा 20 करोड़ रुपये सेस वसूली का नोटिस मिलने पर भी आजम भड़क चुके हैं। इसके लिए श्रम विभाग के अधिकारियों तक को आड़े हाथों लेते हुए मुख्यमंत्री तक को पत्र लिखा था।
* आजम तीन साल पहले नगर विकास विभाग के अधिकारियों पर इतना खफा हुए थे कि फाइलें देखने से इनकार कर दिया था। प्रमुख सचिव नगर विकास विभाग को पत्र लिखकर साफ कह दिया था कि उनके पास पत्रावलियां नहीं भेजी जाएं। काफी मान-मनौवल के बाद वे माने।
* आजम के मंत्रालय में लगा निजी स्टाफ उनके व्यवहार से इतना नाराज हुआ था कि उसने सचिव सचिवालय प्रशासन को पत्र लिखकर कह दिया था कि आजम के साथ काम नहीं कर सकते। इसमें दो निजी सचिव व तीन अपर सचिव ने पत्र में हस्ताक्षर भी किए थे। इससे खफा आजम ने मुख्यमंत्री से इनके खिलाफ कार्रवाई तक को लिखा था।
अफसर को कह डाला बदतमीज
* निकाय अधिकारियों को पद के आधार पर गाड़ियां दी गई हैं। आजम ने सचिव स्तर के अधिकारियों को छोड़कर बाकी की गाड़ियां छीनने के आदेश दे दिया था। गाड़ियां छीनी भी, लेकिन बाद में वापस दे दी गईं।
* आजम ने दो साल पहले अधिकारियों की बैठक बुलाई थी। बैठक में कुछ शीर्ष अधिकारी नहीं पहुंचे तो वे भड़क उठे, मीडिया के सामने ही संयम खो दिया। एक अफसर को कह दिया कि बकवास करते हो, चुप बैठिए आप। एक अफसर को बदतमीज तक भी कह डाला था।
* आजम खां लखनऊ में नगर आयुक्त रहे एनपी सिंह पर इस कदर गुस्सा हुए कि उन्हें हटवा कर ही माने। सब जानते हैं कि एनपी सिंह पर गुस्सा वह किस वजह से हुए थे। बताते हैं कि एनपी को पंचमतल के एक शीर्ष अधिकारी का अर्शीवाद प्राप्त था। इसलिए वह नहीं चाहते थे कि उनके विभाग में किसी और के चहेते को तैनाती दी जाए।
* निकायों में कार्यरत संविदा कर्मियों और अभियंताओं को भी गुस्से का शिकार होना पड़ा था। नगर विकास मंत्री बनते ही सबसे पहले आजम ने संविदा कर्मियों को रखने का कारण पूछा था और बिना कारण रखे गए कर्मियों को हटाने का आदेश दिया था। हालांकि हाईकोर्ट के आदेश के बाद इन कर्मियों को फिर से निकायों में रखा गया।