खत्म हो सकती है इन आयुर्वेदिक कॉलेजों की मान्यता
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प्रोफेसर और रीडर की कमी राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेजों की मान्यता पर तलवार बनकर लटक रही है। सीसीआईएम (केंद्रीय भारतीय चिकित्सा परिषद) ने आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेजों को शिक्षकों की कमी पूरी करने के लिए 30 दिसंबर की समय सीमा तय की है।
अब आयुर्वेद निदेशालय यूनानी मेडिकल कॉलेजों के चिकित्सकों की तरह शासन से रीडर से प्रोफेसर पद की प्रोन्नति नियमावली में ढील की उम्मीद लगाए बैठा है।
शासन ने राजकीय यूनानी मेडिकल कॉलेजों के पांच रीडरों को प्रोफेसर पद पर प्रोन्नति दी थी। नियमावली 2006 के अंतर्गत पदोन्नति मामले में दायर याचिका पर हाईकोर्ट के आदेश के बाद शासन ने यह फैसला किया था।
नियमानुसार रीडर से प्रोफेसर पद के लिए न्यूनतम छह साल का अनुभव होना चाहिए लेकिन शिक्षक इसे पूरा नहीं कर रहे थे।
अब 21 रीडर बनेंगे प्रोफेसर
इसी के बाद डॉ. मो. यासीन आजमी, डॉ. मजाहिर आलम, डॉ. बरकत उल्ला नदवी, डॉ. नईमुद्दीन अंसारी व डॉ. नजीब हंजला अम्मार को रीडर से प्रोफेसर पद पर प्रोन्नति दी गई थी।
इसमें डॉ. यासीन को प्रोन्नति में एक वर्ष दो माह और अन्य को एक वर्ष पांच माह की ढील स्वीकृत की गई थी।
इसी आधार पर आयुर्वेद कॉलेजों के शिक्षकों को शिथलीकरण का लाभ देने का प्रस्ताव है। बताया जा रहा है कि 21 रीडर प्रोफेसर बनने की लाइन में हैं।
इनका प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था लेकिन कुछ आपत्ति के बाद वापस आ गया। अब इसे सोमवार को फिर शासन में रखा जाना है।
उम्मीद है, यूनानी कॉलेजों के शिक्षकों की तरह ही आयुर्वेद कॉलेजों की मान्यता बचाने के लिए राहत दी जा सकती है।