राममंदिर को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका न दाखिल करने के सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के एलान का अयोध्या के संतों ने स्वागत किया है। संत-धर्माचार्यों ने मुस्लिम पक्ष के रुख की प्रशंसा करते हुए कहा कि एक बार फिर अयोध्या से सौहार्द का संदेश पूरे विश्व को गया है।
मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी ने भी बोर्ड के फैसले का स्वागत किया है, हालांकि दूसरे पक्षकार हाजी महबूब ने कहा कि वे पुनर्विचार याचिका करने के ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड के निर्णय के साथ हैं।
सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड का रुख प्रशंसनीय : नृत्यगोपाल दास
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नृत्यगाोपाल दास
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रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष एवं शीर्ष पीठ मणिरामदास जी की छावनी के महंत नृत्यगोपालदास ने कहा यह अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण है और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के रुख से स्पष्ट हो गया है कि न केवल सुप्रीम कोर्ट, बल्कि पूरा देश राममंदिर के हक में खड़ा है।
बोर्ड का यह रुख सुखद : दिनेंद्रदास
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महंत दिनेंद्रदास
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निर्मोही अखाड़ा के महंत व हिंदू पक्षकार दिनेंद्रदास के अनुसार सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड का यह रुख अत्यंत सुखद है। अब रामलला के मंदिर की राह मे कोई रोड़ा नहीं है। मुस्लिमों ने फैसले को स्वीकार कर यह जता दिया कि वे सांप्रदायिक भेदभाव से ऊपर देश के जिम्मेदार नागरिक हैं।
विवाद नहीं अब सौहार्द का समय : शरद शर्मा
विहिप के प्रांतीय प्रवक्ता शरद शर्मा ने कहा कि अब विवाद का नहीं, बल्कि सौहार्द का समय है। मुस्लिम पक्ष ने इस सच्चाई को समझा इसके लिए हम सभी भारतवासी उनके प्रति कृतज्ञ हैं। अब बस ट्रस्ट बनने की देरी है, राममंदिर का निर्माण शुरू हो जाएगा।
हम पुनर्विचार याचिका करने के निर्णय पर कायम : हाजी
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हाजी महबूब
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मुस्लिम पक्षकार हाजी महबूब ने कहा कि मैं पुनर्विचार याचिका करने के ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड के निर्णय के साथ हूं। बोर्ड ने जो निर्णय लिया है उसमें कोई बुराई नही है। हमें तो शांति और तरक्की चाहिए, अयोध्या ने हमेशा सबको शांति का पैगाम दिया है।
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इकबाल अंसारी
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बोर्ड के रुख का स्वागत : इकबाल
इकबाल अंसारी ने भी बोर्ड के रुख का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि हम पहले भी कहते रहें हैं कि अब इस मामले को और आगे बढ़ाने की जरूरत नही है। कोर्ट ने जो निर्णय दे दिया वह हम सभी को मानना चाहिए। जरूरी चीज है कि अमन-ओ-चैन बना रहे।