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मुस्लिम पक्षकार ने मांगा बाबरी मस्जिद का मलबा, प्रशासन का इनकार, कहा-अब नहीं तय हो सकता
Mon, 10 Feb 2020 10:41 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 10 Feb 2020 10:41 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट के गठन के बाद मुस्लिम पक्षकारों की ओर से बाबरी मस्जिद का मलबा हासिल करने के लिए नई जद्दोजहद की सूचना के बाद सरकार अलर्ट हो गई है। बाबरी मस्जिद के पक्षकार रहे हाजी महबूब और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने प्रशासन से मलबा देने की मांग की है।
इस पर, प्रशासन ने साफ कर दिया है कि पूरे मामले का सुप्रीम कोर्ट से निस्तारण हो चुका है। जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने कहा कि फैसले के बाद संपूर्ण भूमि के मालिक रामलला हो चुके हैं। यह कैसे तय होगा कि कौन मलबा मंदिर का था, कौन मस्जिद का।
ऐसे में इसका मलबा मांगने की मांग उपयुक्त नहीं है। हाजी महबूब ने कहा कि कोर्ट के आदेश में बाबरी मस्जिद को छह दिसंबर 1992 को ढहाना आपराधिक कृत्य माना गया है, ऐसे में उसका पवित्र मलबा लेना जरूरी है। मस्जिद का निर्माण गैरकानूनी साबित नहीं हुआ है।
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हम विराजमान रामलला का दस गुणा दस फीट भूमि छोड़कर मस्जिद की मिट्टी, उसके खंभे, पत्थर आदि की मांग कर रहे हैं। बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी संयोजक व अधिवक्ता जफरयाब जिलानी ने कहा कि प्रशासन नहीं माना तो नए सिरे से सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।
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इस पर, प्रशासन ने साफ कर दिया है कि पूरे मामले का सुप्रीम कोर्ट से निस्तारण हो चुका है। जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने कहा कि फैसले के बाद संपूर्ण भूमि के मालिक रामलला हो चुके हैं। यह कैसे तय होगा कि कौन मलबा मंदिर का था, कौन मस्जिद का।
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ऐसे में इसका मलबा मांगने की मांग उपयुक्त नहीं है। हाजी महबूब ने कहा कि कोर्ट के आदेश में बाबरी मस्जिद को छह दिसंबर 1992 को ढहाना आपराधिक कृत्य माना गया है, ऐसे में उसका पवित्र मलबा लेना जरूरी है। मस्जिद का निर्माण गैरकानूनी साबित नहीं हुआ है।
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हम विराजमान रामलला का दस गुणा दस फीट भूमि छोड़कर मस्जिद की मिट्टी, उसके खंभे, पत्थर आदि की मांग कर रहे हैं। बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी संयोजक व अधिवक्ता जफरयाब जिलानी ने कहा कि प्रशासन नहीं माना तो नए सिरे से सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।