फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   ayodhya and pulwama will be the part of syllabus in Lucknow University

LU: लविवि पढ़ाएगा अयोध्या उत्खनन और पुलवामा हमला, प्राचीन भारतीय इतिहास पाठ्यक्रम में किया जाएगा शामिल

Mon, 17 Apr 2023 04:38 PM IST
ishwar ashish माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 17 Apr 2023 04:38 PM IST
सार

लखनऊ विश्वविद्यालय में अयोध्या उत्खनन और पुलवामा के बारे में भी पढ़ाया जाएगा। अयोध्या उत्खनन को स्नातक के प्राचीन भारतीय इतिहास पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा।

विज्ञापन
ayodhya and pulwama will be the part of syllabus in Lucknow University
- फोटो : amar ujala

विस्तार

लखनऊ विश्वविद्यालय का प्राचीन भारतीय इतिहास एवं पुरातत्व विभाग स्नातक के विद्यार्थियों को अयोध्या उत्खनन भी पढ़ाएगा। नई शिक्षा नीति के तहत होने वाले बदलावों के तहत विभाग ने इसे अपने सिलेबस में शामिल करने का फैसला किया है। इसके तहत बीए चतुर्थ सेमेस्टर के आठवें पेपर फील्ड आर्कियोलॉजी के चौथे यूनिट में अयोध्या के उत्खनन के साथ ही भीमबेटका, कालीबंगा और हस्तिनापुर को भी शामिल किया गया है।

विज्ञापन


विभाग के अध्यक्ष प्रो. पीयूष भार्गव ने बताया कि अयोध्या उत्तर प्रदेश में स्थित एक प्राचीन नगर है जिसका उल्लेख रामायण, महाभारत तथा विभिन्न पुराणों में मिलता है। पुराणों के अनुसार इस नगर को इक्ष्वांकु वंश के मनु ने बसाया था। उसके बाद उनकी पीढ़ी में दशरथ, राम आदि ने शासन किया। बाद के ग्रंथों में इसे कोसल के नाम से जाना गया। बाद में इसके दो भाग कर दिए गए- उत्तर कोसल और दक्षिण कोसल। उत्तर कोसल की राजधानी श्रावस्ती तथा दक्षिण कोसल की राजधानी कुशावती बताई गई है। प्राचीन ग्रंथों में उल्लेख है कि यह नगर सरयू नदी के किनारे बसा हुआ था। रघुवंश में भी इसका उल्लेख मिलता है।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें - क्षेत्रीय दलों की चली तो यूपी में सिर्फ चार सीटों पर लड़ सकेगी कांग्रेस
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें - नेताओं से लेकर अंडरवर्ल्ड तक को था अतीक के मुंह खोलने का डर, पुलिस से कबूले थे 14 नाम


फादर ऑफ इंडियन आर्कियोलॉजी कहे जाने वाले अलेक्जेंडर कनिंघम ने लगभग 1862-63 में अयोध्या का सर्वे करवाया था। 1889-91 के मध्य ए. फ्यूहरर ने भी अयोध्या का सर्वे किया था। चीनी यात्री फाह्यान इसे शा-ची के नाम से पुकारता है। इसके बाद अयोध्या में 1969-1970 ईसवी में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के अवध किशोर नारायण ने पुरातात्विक उत्खनन किया था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के प्रो. बीबी लाल ने 1975 से 1985 के मध्य, रामायण से संबंधित विभिन्न स्थलों जैसे भारद्वाज आश्रम नंदीग्राम (अयोध्या), चित्रकूट और शृंग्वेरपुर (प्रयागराज) का पुरातात्विक उत्खनन कराया था।

2003 में कनाडा के भौतिक शास्त्री (जियो फिजिसिस्ट) प्लॉट रवि लॉयड ने जीपीआर सर्वे किया और बताया कि 0.5 मीटर से 5.5 मीटर तक की गहराई में विभिन्न संरचनाएं मालूम पड़ रही हैं। इसी यहां पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की तरफ से हरी मांझी और बीआर मणि ने भी पुरातात्विक उत्खनन कराया। विभिन्न उत्खनन के आधार पर यहां कुल नौ सांस्कृतिक कालों के बारे में जानकारी प्राप्त हुई। यहां प्राचीनतम अधिवास उत्तर कृष्ण मार्जित काल का प्राप्त हुआ है, जबकि सबसे बाद का अधिवास उत्तर मुगल काल से संबंधित था। प्राचीन भारतीय इतिहास एवं पुरातत्व विषय के फील्ड आर्कियोलॉजी के पेपर में स्नातक एवं परास्नातक के छात्रों को विभिन्न महत्वपूर्ण पुरास्थलों के उत्खनन के बारे में पढ़ाया जाता है। ये उसी प्रक्रिया का भाग है।

रक्षा अध्ययन में कई बदलाव
लविवि के रक्षा अध्ययन विभाग ने भी नई शिक्षा नीति के तहत अपने सिलेबस में बदलाव किया है। इसके तहत पुलवामा हमले को सिलेबस का अंग बनाया गया है। डॉ. ओपी शुक्ला ने बताया कि इसके साथ ही सिलेबस में कई अन्य महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed