यूपी के शिल्पकारों की कला को निखारेंगे रीना ढाका, रितु बेरी व मनीष मल्होत्रा जैसे नामचीन फैशन डिजाइनर
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उत्तर प्रदेश को विशिष्ट पहचान दिलाने वाले यूपी के शिल्पकारों के हुनर को मुंबई के नामचीन फैशन डिजाइनर और निखारेंगे। रीना ढाका, रितु बेरी, मनीष मल्होत्रा और जेजे बलाया जैसे प्रोफेशनल फैशन डिजायनर शिल्पकारों को बदलते जमाने के हिसाब से तकनीक आधारित ज्ञान देंगे। साथ ही उन्हें अपने उत्पाद की आकर्षक पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के गुर सिखाकर बाजार भी मुहैया कराएंगे।
इसी क्रम में फैशन डिजायनर रीना ढाका ने प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग के अपर मुख्य सचिव नवनीत सहगल से भेंट कर यूपी सरकार के साथ मिलकर काम करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक जिला-एक उत्पाद योजना को शिल्पकला के पुनर्जीवन का अभिनव प्रयास बताया। कहा कि हाल के दिनों में खादी के कपड़ों की खासी मांग बढ़ी है। तमाम बड़ी कंपनियां खादी आधारित डिजायनर कपड़े तैयार कर रही हैं, जिन्हें ग्लोबल मार्केट में हाथों-हाथ लिया गया। खादी की थीम पर फैशन शो हो रहे हैं।
ठीक ऐसे ही ओडीओपी के तहत अंबेडकरनगर, मऊ, इटावा व बाराबंकी के वस्त्र उत्पाद, बदायूं, कासगंज, शाहजहांपुर, चंदौली, बरेली व उन्नाव की जरी-जरदोजी, भदोही, सोनभद्र व मिर्जापुर की कालीन, फर्रूखाबाद की वस्त्र छपाई, गौतमबुद्धनगर के रेडीमेड गारमेंट, हरदोई के हैंडलूम, जौनपुर की ऊनी कालीन, कुशीनगर का केला फाइबर, ललितपुर की जरी सिल्क साड़ी, लखनऊ की चिकन कारी व जरी-जरदोजी, वाराणसी की रेशमी साड़ियां जैसे तमाम उत्पाद हैं, जो थोड़े से प्रयास से वैश्विक फैशन जगत में छा सकते हैं। जरूरत है शिल्पकारों को नए जमाने के हिसाब से ट्रेनिंग, पैकेजिंग, मार्केटिंग और ब्रांडिंग का ज्ञान देने की।
यूपी के शिल्प नई पहचान देना चाहते हैं
रीना ने कहा उनकी ही तरह और डिजायनर भी यहां के शिल्प को फैशन इंडस्ट्री की पहचान बनाना चाहते हैं। रीना ने उन्नाव में जरी-जरदोजी के शिल्पियों से भेंट कर उनकी कार्यशैली, मशीन, तकनीक व बाजार के बारे में जानकारी प्राप्त की।
शिल्पकारों को मिलेगा नया बाजार : सहगल
अपर मुख्य सचिव, एमएसएमई नवनीत सहगल ने बताया कि शिल्पकारों को आधुनिकता के लिहाज से जरूरी प्रशिक्षण दिलाने के लिए अलग-अलग स्तरों पर काम चल रहा है। फैशन इंडस्ट्री के नामचीन डिजायनरों से भी इन्हें मार्गदर्शन मिलेगा। इससे न केवल यूपी की कलाकारी को नई पहचान मिलेगी, बल्कि शिल्पकारों को नया बाजार दिलाने में भी मददगार साबित होगी।