फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   analysis of by election

उपचुनाव के गणित में जानें, कौन सी पार्टी रहेगी भारी

Fri, 11 Aug 2017 02:52 PM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 11 Aug 2017 02:52 PM IST
विज्ञापन
analysis of by election
सीेएम योगी और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य - फोटो : डेमो
उपचुनाव के मद्देनजर राजनीतिक हलकों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के संसदीय क्षेत्रों के नतीजों को लेकर अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं। अनुमान लगाए जा रहे हैं कि इनके त्यागपत्र से खाली होने वाली गोरखपुर और फूलपुर संसदीय सीटों पर यदि सपा, बसपा और कांग्रेस गठबंधन करके लड़े तो भाजपा उम्मीदवारों की जीत की राह मुश्किल हो जाएगी।
विज्ञापन


हालांकि पिछले लोकसभा चुनाव में मिले वोटों के आधार पर विश्लेषण करें तो इन तीनों दलों को मिले कुल वोट भी योगी और केशव को मिले मतों से पीछे रह जाते हैं। यह बात ठीक है कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और सपा गठबंधन तथा बसपा को मिले वोटों का योग भाजपा से आगे रहा है। पर, मौजूदा राजनीतिक हालात और सियासी समीकरणों पर नजर डालें तो विधानसभा चुनाव की तरह इन संसदीय सीटों के उपचुनाव में विपक्षी गठबंधन को मत मिल पाना मुश्किल दिख रहा है।
विज्ञापन


एक तो लोकसभा चुनाव की परिस्थितियां व समीकरण अलग होते हैं। ऊपर से सपा, बसपा और कांग्रेस का परस्पर गठबंधन करके भाजपा के मुकाबले एक उम्मीदवार उतारना मौजूदा हालात में बहुत मुश्किल दिख रहा है। गठबंधन हो भी जाए तो वर्तमान परिस्थिति में भाजपा विरोधी कोई दल एक-दूसरे को अपना शत-प्रतिशत मत स्थानांतरित कराने की स्थिति में नहीं दिखता।
विज्ञापन
विज्ञापन

 
यह है कारण
प्रदेश और केंद्र में भाजपा का सत्ता में होना और ऊपर से सपा व बसपा में लगातार तेज हो रहा बिखराव भी चुनावी गणित को भाजपा के पक्ष में मजबूत करता दिख रहा है। गोरखपुर और फूलपुर से मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री के जुड़े होने के कारण शायद ही इन सीटों के मतदाता अपना रुतबा गंवाना और विकास कार्यों पर ब्रेक स्वीकार करें।

गोरखपुर सीट तो  काफी वक्त से गोरखनाथ मंदिर के खाते में ही जाती रही है। योगी खुद यहां से पांच बार सांसद रहे। उनसे पहले यहां से उनके गुरु महंत अवैद्यनाथ सांसद होते थे। फूलपुर सीट जरूर लंबे समय तक भाजपा के लिए बंजर साबित होती रही, पर अब परिस्थितियां काफी बदल चुकी हैं।

भाजपा की केंद्रीय राजनीति में मोदी के पदार्पण के बाद पिछड़ों व दलितों को लामबंद करके अगड़ों के साथ उनका समीकरण बनाकर जिस तरह की राजनीति शुरू हुई है और केशव मौर्य के रूप में पिछड़े वर्ग का एक चेहरा आज भाजपा में खास स्थान बना चुका है, उसे देखते हुए नहीं लगता कि इस इलाके की अति पिछड़ी जातियां भाजपा के अलावा किसी दूसरी पार्टी के उम्मीदवार के पक्ष में लामबंद होना पसंद करेंगी।

देखें, गोरखपुर और फूलपुर वोटों का गणित

analysis of by election
डेमो - फोटो : डेमो
यह है गोरखपुर का गणित
लोकसभा की गोरखपुर सीट पर पिछले चुनाव में योगी आदित्यनाथ को सपा, बसपा और कांग्रेस प्रत्याशियों के कुल वोट के मुकाबले लगभग एक लाख वोट ज्यादा मिले थे। वह भी तब जब कांग्रेस ने यहां अष्टभुजा तिवारी के  रूप में ब्राह्मण चेहरा उतारा था। सपा के टिकट पर इस इलाके में निषादों के बीच अच्छा प्रभाव रखने वाले जमुना प्रसाद निषाद की पत्नी राजमती लड़ी थीं।

बसपा ने भी निषाद उम्मीदवार ही उतारा था। यह उल्लेख इसलिए कि इस क्षेत्र में निषादों का काफी वोट है। इस जाति के साथ अन्य अति पिछड़ी जातियों में योगी आदित्यनाथ की काफी अच्छी पकड़ मानी जाती है। मतलब निषाद व ब्राह्मण वोटों में बंटवारा होने के बावजूद योगी 3 लाख से ज्यादा अंतर से जीते थे। विधानसभा चुनाव में गोरखपुर संसदीय सीट के अंतर्गत आने वाली सभी सीटों पर भाजपा के ही उम्मीदवार जीते।

हर जगह जीत का अंतर भी पर्याप्त रहा। गोरखपुर शहर में तो यह अंतर 60 हजार मतों के ऊपर रहा। हालांकि सभी पांचों सीटों पर भाजपा विरोधी वोटों (सपा, कांग्रेस व बसपा) का योग भाजपा से लगभग 72 हजार ज्यादा रहा। मगर, तब और आज की स्थिति में काफी परिवर्तन आ चुका है। योगी मुख्यमंत्री हैं। गोरखपुर का चुनाव उनकी प्रतिष्ठा का चुनाव होगा। बसपा, सपा और कांग्रेस की की जीत से कोई परिवर्तन आने की स्थिति भी नहीं दिख रही है। 
 
फूलपुर में वोटों का गणित
 पिछले लोकसभा चुनाव में फूलपुर सीट की स्थिति भी कमोबेश गोरखपुर जैसी ही रही। केशव मौर्य को सपा, बसपा और कांग्रेस के कुल वोट से लगभग एक लाख वोट ज्यादा मिले थे। वह भी तब जब कांग्रेस ने क्रिकेटर और मुस्लिम चेहरे मो. कैफ को मैदान में उतारा था। सपा ने यहां से कुर्मी उम्मीदवार धर्मसिंह पटेल को उतारा था। बसपा से खासा प्रभाव रखने वाले ब्राह्मण चेहरे कपिल मुनि करवरिया चुनाव लड़े थे।

विधानसभा चुनाव में फूलपुर संसदीय सीट के अंतर्गत आने वाली फाफामऊ, सोरांव, फूलपुर, इलाहाबाद उत्तरी और पश्चिमी सभी पांच सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार जीते। वह भी सभी जगह अपने निकटतम उम्मीदवार से औसतन 25 से 30 हजार वोटों के अंतर से। अगर विधानसभा चुनाव में भाजपा विरोधी सभी दलों के वोटों को जोड़ लें तो जरूर भाजपा का वोट विपक्ष से लगभग एक लाख कम दिखता है।

पर, फूलपुर में भी गोरखपुर जैसा फॉर्मूला भाजपा के पक्ष को मजबूत बना रहा है। विधानसभा चुनाव में इस इलाके के लोगों को लग रहा होगा कि शायद सपा या बसपा की भी सरकार बन जाए, पर आज ऐसी स्थिति नहीं है। फिर मुस्लिमों की लामबंदी भी पहले जैसी नहीं है। इसलिए विपक्ष अगर यहां मायावती को ही साझा उम्मीदवार बनाकर उतार दे तो भी इसकी संभावनाएं नहीं दिखाई देतीं कि उन्हें सपा का यादव या अन्य पिछड़ा वोट पूरा का पूरा मिल जाएगा। इसका लाभ स्वाभाविक रूप से भाजपा को मिलेगा। 
 

पढ़ें , फैक्ट फाइल

analysis of by election
डेमो - फोटो : डेमो
फैक्ट फाइल
लोकसभा चुनाव 2014
गोरखपुर संसदीय क्षेत्र
भाजपा : 5,39,127 
विपक्ष : 4,48,475 ( सपा : 2,26,344, बसपा : 1,76,412, कांग्रेस :  45,719)
 
विधानसभा चुनाव 2017
संसदीय सीट गोरखपुर की सभी पांचों सीटें (गोरखपुर ग्रामीण, गोरखपुर शहर, कैंपियरगंज, पिपराइच, सहजनवां) 
भाजपा : 4,52,495
विपक्ष : 5,25,126 (सपा और कांग्रेस : 3,26,315 बसपा : 1,98,811)

फूलपुर संसदीय क्षेत्र
लोकसभा चुनाव 2014
भाजपा : 5,03,564
विपक्ष : 4,17,093 (सपा : 1,95,256 बसपा : 1,63,710 कांग्रेस : 58,127)
 
विधानसभा चुनाव 2017
संसदीय सीट फूलपुर की सभी पांचों सीटें (फाफामऊ, सोरांव, फूलपुर, इलाहाबाद (उत्तरी), इलाहाबाद (पश्चिमी)
भाजपा : 4,28,974
विपक्ष : 5,23,616 (सपा और कांग्रेस : 2,98,980 बसपा : 2,24,636 ) 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed