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Lucknow News: सुर, लय और ताल की त्रिवेणी से सजी शाम
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संत गाडगे प्रेक्षागृह में प्रतिभागियों ने दी शानदार प्रस्तुति। -आयोजक
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लखनऊ। केवल एक माह के प्रशिक्षण के बाद सुर, लय और ताल के अद्भुत संगम की प्रस्तुतियां देकर प्रशिक्षुओं ने दर्शकों का मन मोह लिया। मौका था उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी में चल रही संगीत कार्यशाला के समापन अवसर पर प्रस्तुतियों का। गायन, वादन और नृत्य तीनों विधाओं में प्रशिक्षण प्राप्त करीब 200 कलाकारों ने अपने गुरुओं के निर्देशन में संत गाडगे प्रेक्षागृह में मंगलवार शाम कमाल का प्रदर्शन किया।
समारोह का शुभारंभ संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। राहुल अवस्थी के निर्देशन में शास्त्रीय गायन के प्रतिभागियों ने राग भूपाली में लक्ष्ण गीत ‘मा नि बरज गाए’, छोटा ख्याल ‘जाऊं तोरे चरण कमल वारी’ और राग बिहाग में ‘गोपाल गोकुल बल्लभी’ सुनाकर तालियां बटोरीं। उस्ताद गुलशन भारती के निर्देशन में उपशास्त्रीय प्रस्तुति में प्रतिभागियों ने दादरा ‘झमाझम पानी भरे री कौन अलबेली की नार’, ठुमरी ‘सांवरिया ने जादू डाला’ और ‘टप्पा मैं ता चाल पहचानी’ सुनाकर मनभावन प्रदर्शन किया। डॉ. पवन कुमार के निर्देशन में तबला वादन की प्रस्तुति भी कमाल की रही। नन्हे हाथों से लेकर 75 साल के बुजुर्ग तक ने तबले पर अपनी प्रतिभा दिखाई। प्रतिभागियों ने तीन ताल में ठेका, कायदा, रूपक और कहरवा ताल का वादन कर प्रशंसा हासिल की।
शहर के वरिष्ठ संगीतकार केवल कुमार के निर्देशन में लोक गायन की प्रस्तुतियां हुईं। प्रतिभागियों ने ‘भोले बाबा के चरनन मा’, ‘ओ चंदा जइयो बिरन के देसवा’, ‘पूरब से आई’ और ‘गोरी नयना तोहार रत्नार’ जैसी रचनाएं सुनाकर सभी का दिल जीत लिया। डॉ. मंजू मलकानी के निर्देशन में हुई कथक प्रस्तुति में प्रतिभागियों ने ‘कन्हैया तोरी मुरली बैरन भई’, ‘रंगी सारी गुलाबी चुनरिया’, ‘डमरू हर कर बाजे’ सतरंगी नृत्य कर वाहवाही अर्जित की। इसमें एक दिव्यांग प्रतिभागी ने भी कथक प्रस्तुति दी। नीता जोशी के निर्देशन में हुई कथक नृत्य की प्रस्तुति में प्रतिभागियों ने ‘बसो मोरे नयनन में नंदलाल’, ‘ध्यान मूलम’, ‘छाप तिलक’, ‘दमादम’, ‘मैं तो पिया से नैना लड़ा आई’ पर अत्यंत सुंदर संयोजन पेश किए।
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संचालन महिता दिवास्कर ने किया। इस अवसर पर प्रमुख सचिव मुकेश मेश्राम, लोकगायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी, संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष प्रो. जयंत खोत, उपाध्यक्ष विभा सिंह, पर्यटन विभाग के सलाहकार जेपी सिंह और अकादमी के निदेशक डॉ. शोभित नाहर आदि मौजूद रहे।
संगीत से जुड़ता है पूरा समाज : जयवीर सिंह
मुख्य अतिथि संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि विभाग की ओर से प्रदेश के 75 जनपदों में हुई कार्यशालाओं में 19 हजार प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। पंजीकृत कलाकारों को तीन से अधिक कार्यक्रम देने के लिए शासन से अनुमति लेनी होगी। पंजीकृत कलाकारों की प्रस्तुतियों को विभाग की वेबसाइट पर अपलोड भी किया जाएगा। इससे पारदर्शिता आएगी।
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समारोह का शुभारंभ संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। राहुल अवस्थी के निर्देशन में शास्त्रीय गायन के प्रतिभागियों ने राग भूपाली में लक्ष्ण गीत ‘मा नि बरज गाए’, छोटा ख्याल ‘जाऊं तोरे चरण कमल वारी’ और राग बिहाग में ‘गोपाल गोकुल बल्लभी’ सुनाकर तालियां बटोरीं। उस्ताद गुलशन भारती के निर्देशन में उपशास्त्रीय प्रस्तुति में प्रतिभागियों ने दादरा ‘झमाझम पानी भरे री कौन अलबेली की नार’, ठुमरी ‘सांवरिया ने जादू डाला’ और ‘टप्पा मैं ता चाल पहचानी’ सुनाकर मनभावन प्रदर्शन किया। डॉ. पवन कुमार के निर्देशन में तबला वादन की प्रस्तुति भी कमाल की रही। नन्हे हाथों से लेकर 75 साल के बुजुर्ग तक ने तबले पर अपनी प्रतिभा दिखाई। प्रतिभागियों ने तीन ताल में ठेका, कायदा, रूपक और कहरवा ताल का वादन कर प्रशंसा हासिल की।
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शहर के वरिष्ठ संगीतकार केवल कुमार के निर्देशन में लोक गायन की प्रस्तुतियां हुईं। प्रतिभागियों ने ‘भोले बाबा के चरनन मा’, ‘ओ चंदा जइयो बिरन के देसवा’, ‘पूरब से आई’ और ‘गोरी नयना तोहार रत्नार’ जैसी रचनाएं सुनाकर सभी का दिल जीत लिया। डॉ. मंजू मलकानी के निर्देशन में हुई कथक प्रस्तुति में प्रतिभागियों ने ‘कन्हैया तोरी मुरली बैरन भई’, ‘रंगी सारी गुलाबी चुनरिया’, ‘डमरू हर कर बाजे’ सतरंगी नृत्य कर वाहवाही अर्जित की। इसमें एक दिव्यांग प्रतिभागी ने भी कथक प्रस्तुति दी। नीता जोशी के निर्देशन में हुई कथक नृत्य की प्रस्तुति में प्रतिभागियों ने ‘बसो मोरे नयनन में नंदलाल’, ‘ध्यान मूलम’, ‘छाप तिलक’, ‘दमादम’, ‘मैं तो पिया से नैना लड़ा आई’ पर अत्यंत सुंदर संयोजन पेश किए।
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संचालन महिता दिवास्कर ने किया। इस अवसर पर प्रमुख सचिव मुकेश मेश्राम, लोकगायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी, संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष प्रो. जयंत खोत, उपाध्यक्ष विभा सिंह, पर्यटन विभाग के सलाहकार जेपी सिंह और अकादमी के निदेशक डॉ. शोभित नाहर आदि मौजूद रहे।
संगीत से जुड़ता है पूरा समाज : जयवीर सिंह
मुख्य अतिथि संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि विभाग की ओर से प्रदेश के 75 जनपदों में हुई कार्यशालाओं में 19 हजार प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। पंजीकृत कलाकारों को तीन से अधिक कार्यक्रम देने के लिए शासन से अनुमति लेनी होगी। पंजीकृत कलाकारों की प्रस्तुतियों को विभाग की वेबसाइट पर अपलोड भी किया जाएगा। इससे पारदर्शिता आएगी।