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Lucknow News: आतंकवादी से कनेक्शन बताकर वृद्ध को नौ दिन डिजिटल अरेस्ट रखा, 47 लाख ऐंठे
Tue, 27 Oct 2026 01:33 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Tue, 27 Oct 2026 01:33 AM IST
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एआई फोटो
लखनऊ। आधार कार्ड के गलत इस्तेमाल से कश्मीर में सिम कार्ड लेने, बैंक खाता खोलने और आतंकवादी से कनेक्शन होने का डर दिखाकर साइबर ठगों ने रेलवे के सेवानिवृत्त अधिकारी आलोक कुमार शर्मा (69) को नौ दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा। खुद को एनआईए चीफ, एटीएस अधिकारी और सीनियर इंस्पेक्टर बताने वाले जालसाजों ने मनी लॉन्ड्रिंग में फंसाने और गिरफ्तारी का भय दिखाकर उनसे 47 लाख रुपये ऐंठ लिए। आरोपियों ने जांच के नाम पर रकम वापस करने का भरोसा दिया था। पीड़ित की तहरीर पर साइबर क्राइम थाने में तीनों आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
अलीगंज की विष्णु लोक कॉलोनी निवासी आलोक कुमार के मुताबिक, 15 अक्तूबर की दोपहर उनके पास व्हाट्सएप कॉल आई। कॉल करने वाली ने खुद को लखनऊ पुलिस मुख्यालय में तैनात सीनियर इंस्पेक्टर अनीता शर्मा बताया। उसने कहा कि उनके आधार कार्ड का गलत इस्तेमाल कर कश्मीर में सिम कार्ड लिया गया है। इसी सिम से कश्मीर में एचडीएफसी बैंक में खाता खोला गया, जिसका संबंध आतंकवादी आसिफ फौजी से है। इस खाते का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में किया जा रहा है। ठग ने यह भी कहा कि उनके नाम का वारंट जारी हुआ है।
वीडियो कॉल पर दिखाया अधिकारियों का रौब
आलोक ने बीमारी का हवाला देकर वारंट घर भेजने के लिए कहा तो ठग ने उनकी बात एटीएस पुणे के अधिकारी प्रेम कुमार गौतम से कराई। कॉल पर आने से पहले उन्हें नमस्ते के बाद जय हिंद बोलने के लिए कहा गया। प्रेम ने अपना आईडी प्रूफ दिखाकर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप दोहराया और एटीएस कार्यालय आने को कहा। असमर्थता जताने पर उसने उनकी बात कथित एनआईए चीफ राकेश अग्रवाल से कराई।
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आलोक के मुताबिक, वीडियो कॉल पर आते ही राकेश ने प्रेम को डांटते हुए पूछा कि गिरफ्तारी वारंट होने के बावजूद आलोक को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया और उनका खाता होल्ड क्यों नहीं हुआ। यह सुनकर वह घबरा गए। इसका फायदा उठाकर आरोपी ने पूछताछ में सहयोग करने पर आरोपों से मुक्त करने का भरोसा दिया। साथ ही, किसी को बताने पर परिवार पर संकट आने की धमकी दी और उन्हें एक कमरे में बंद रहने को कहा।
जांच के नाम पर तुड़वाई एफडी
दो दिन पूछताछ के बाद 17 अक्तूबर को आरोपियों ने जांच के लिए खाते में रकम जमा करने को कहा। जांच पूरी होने पर पैसे लौटाने का भरोसा दिया। मानसिक दबाव में आकर आलोक ने अपनी बचत और एफडी तुड़वाकर 23 अक्तूबर तक अलग-अलग बैंक खातों में किस्तों में कुल 47 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद आरोपियों ने कॉल काट दी। दो दिन तक रकम वापस नहीं मिलने पर उन्हें ठगी का पता चला और उन्होंने साइबर क्राइम थाने में शिकायत की। एडीसीपी क्राइम किरण यादव ने बताया कि रविवार होने के कारण पीड़ित की रकम फ्रीज नहीं हो सकी थी। मंगलवार को बैंक से संपर्क किया जाएगा। आरोपियों के मोबाइल नंबरों की भी जांच की जा रही है।
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अलीगंज की विष्णु लोक कॉलोनी निवासी आलोक कुमार के मुताबिक, 15 अक्तूबर की दोपहर उनके पास व्हाट्सएप कॉल आई। कॉल करने वाली ने खुद को लखनऊ पुलिस मुख्यालय में तैनात सीनियर इंस्पेक्टर अनीता शर्मा बताया। उसने कहा कि उनके आधार कार्ड का गलत इस्तेमाल कर कश्मीर में सिम कार्ड लिया गया है। इसी सिम से कश्मीर में एचडीएफसी बैंक में खाता खोला गया, जिसका संबंध आतंकवादी आसिफ फौजी से है। इस खाते का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में किया जा रहा है। ठग ने यह भी कहा कि उनके नाम का वारंट जारी हुआ है।
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वीडियो कॉल पर दिखाया अधिकारियों का रौब
आलोक ने बीमारी का हवाला देकर वारंट घर भेजने के लिए कहा तो ठग ने उनकी बात एटीएस पुणे के अधिकारी प्रेम कुमार गौतम से कराई। कॉल पर आने से पहले उन्हें नमस्ते के बाद जय हिंद बोलने के लिए कहा गया। प्रेम ने अपना आईडी प्रूफ दिखाकर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप दोहराया और एटीएस कार्यालय आने को कहा। असमर्थता जताने पर उसने उनकी बात कथित एनआईए चीफ राकेश अग्रवाल से कराई।
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आलोक के मुताबिक, वीडियो कॉल पर आते ही राकेश ने प्रेम को डांटते हुए पूछा कि गिरफ्तारी वारंट होने के बावजूद आलोक को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया और उनका खाता होल्ड क्यों नहीं हुआ। यह सुनकर वह घबरा गए। इसका फायदा उठाकर आरोपी ने पूछताछ में सहयोग करने पर आरोपों से मुक्त करने का भरोसा दिया। साथ ही, किसी को बताने पर परिवार पर संकट आने की धमकी दी और उन्हें एक कमरे में बंद रहने को कहा।
जांच के नाम पर तुड़वाई एफडी
दो दिन पूछताछ के बाद 17 अक्तूबर को आरोपियों ने जांच के लिए खाते में रकम जमा करने को कहा। जांच पूरी होने पर पैसे लौटाने का भरोसा दिया। मानसिक दबाव में आकर आलोक ने अपनी बचत और एफडी तुड़वाकर 23 अक्तूबर तक अलग-अलग बैंक खातों में किस्तों में कुल 47 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद आरोपियों ने कॉल काट दी। दो दिन तक रकम वापस नहीं मिलने पर उन्हें ठगी का पता चला और उन्होंने साइबर क्राइम थाने में शिकायत की। एडीसीपी क्राइम किरण यादव ने बताया कि रविवार होने के कारण पीड़ित की रकम फ्रीज नहीं हो सकी थी। मंगलवार को बैंक से संपर्क किया जाएगा। आरोपियों के मोबाइल नंबरों की भी जांच की जा रही है।