लखनऊ लौटे अमिताभ ठाकुर, देना होगा इन आरोपों का जवाब
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गृह मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात करने के बाद इन दिनों विवादों से घिरे वरिष्ठ आईपीएस अधिकार बुधवार को लखनऊ लौट आए हैं। अब उनको उन आरोपों का जवाब देना है जो उन पर सरकार ने लगाए हैं।
राज्य सरकार ने निलंबित आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर के खिलाफ लंबा-चौड़ा आरोपपत्र तैयार कर लिया है। इसके लिए विभिन्न जिलों से रिपोर्ट मंगाई गई और अमिताभ ठाकुर की ओर से दायर की गई लोकहित याचिकाओं का विस्तृत ब्यौरा जुटाया गया है। आरोपपत्र में कई बिंदुओं पर विस्तार से आरोप लगाए गए हैं। सरकार ने अमिताभ पर ये आरोप लगाए हैं।
•हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने 9 अप्रैल 2014 को एक रिट याचिका के जवाब में अमिताभ ठाकुर को आदेश दिया था कि सरकारी सेवा में रहते हुए शासन की अनुमति के बगैर लोकहित याचिका न दाखिल करें। यह निर्देश सभी लोकसेवकों के लिए था, लेकिन ठाकुर की ओर से निरंतर याचिकाएं दाखिल की जा रही हैं।
•वे शासन के नियंत्रण में कार्यरत रहने के बावजूद शासन की नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में शासन द्वारा किये जा रहे कार्यों को अनधिकृत एवं अमर्यादित ढंग से चुनौती दे रहे हैं। वे अप्रिय स्थिति उत्पन्न करने, शासन के धन एवं शासकीय अधिकारियों के समय व श्रम के अपव्यय, अपने पदीय दायित्वों से इतर कार्य करने, शासकीय व्यवस्था और उच्च न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन करने के दोषी हैं।
देना होगा इन आरोपों का भी जवाब
•ठाकुर द्वारा सतर्कत विभाग, गृह विभाग, पुलिस महानिदेशक एवं प्रदेश सरकार की विभिन्न जांच एजेंसियों, जैसे सतर्कता अधिष्ठान, सीबीसीआईडी, ईओडब्लू, भ्रष्टाचार निवारण संगठन, एसआईबी कोऑपरेटिव के विरुद्ध उच्च न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से जनहित रिट याचिका दायर की गई। याचिका में ठाकुर की ओर से राज्य सरकार द्वारा जांच के लिए बनाये गये नियमों का विरोध करते हुए इन जांच एजेंसियों को राज्य सरकार की स्वीकृति के बिना ही न्यायालय में आरोप-पत्र दाखिल किये जाने की अनुमति प्रदान करने का अनुरोध किया गया।
•उनके द्वारा अनियमिततायें व नियम विरुद्ध कृत्य किये जाने के कारण 15 अक्टूबर 2013 को उनका स्पष्टीकरण मांगा गया था। ठाकुर के 29 अक्टूबर 2013 के स्पष्टीकरण पर पुलिस महानिदेशक ने आख्या दी थी कि ठाकुर ने यह रिट याचिका शासन की अनुमति के बिना सस्ती लोकप्रियता अर्जित करने के उद्देश्य से दाखिल की और शासन की वर्तमान व्यवस्थाओं की आलोचना का वातावरण पैदा किया।
•इसी प्रकार, अपने पद के अनुरूप कर्तव्यों से हटकर मनमाने ढंग से शासन की अनुमति लेने की आवश्यकता समझे बिना नियमों के विपरीत शासन व अन्य के खिलाफ विभिन्न याचिकाएं दायर की गईं।
शासकीय क्षमता का अनुचित प्रयोग का भी आरोप
•ठाकुर ने अपनी शासकीय क्षमता एवं सरकारी संसाधनों का अनुचित प्रयोग करते हुए विभिन्न शासकीय एवं अर्द्धशासकीय विभागों से आवश्यक एवं गोपनीय सूचनायें प्राप्त करके उनके आधार पर स्वयं तथा अपनी पत्नी डॉ. नूतन ठाकुर के माध्यम से जनहित याचिकाएं दाखिल कीं।
•आरोप पत्र में कहा गया है कि अमिताभ ठाकुर अपनी शासकीय क्षमता एवं सरकारी संसाधनों का अनुचित प्रयोग करने, विभिन्न विभागों एवं कार्यालयों पर बिना समुचित कारण के संगत सूचनाएं उपलब्ध कराने का दबाव बनाने, उक्त सूचनाएं अनुचित ढंग से अपनी पत्नी को उपलब्ध कराकर उन्हें उनके दुरुपयोग के लिए प्रेरित करने, शासकीय मर्यादा और शालीनता का अतिक्रमण करने, अपनी पदीय गरिमा के परे जाकर कार्य करने और शासन की छवि के विपरीत काम करने के दोषी हैं, जो अखिल भारतीय सेवाएं (आचरण) नियमावली-1968 के नियम-3 का उल्लंघन है।
•विभिन्न घटनाओं के बाद अमिताभ ठाकुर ने वहां पहुंचकर मनमाना व्यवहार किया, जिससे तनावपूर्ण स्थिति पैदा हुई। उन्होंने डीजीपी मुख्यालय पर धरना दिया और मनमाने वक्तव्य दिए।